रूस ने 2 अक्टूबर 2026 को चेल्याबिंस्क में चेबारकुल सेंटर‑2026 सैन्य अभ्यास सफलतापूर्वक पूरा किया। यह अभ्यास कई क्षेत्रों में एक साथ चलाया गया, जिसमें 11 रेंज और कास्पियन सागर शामिल थे। कुल 47,000 से अधिक सैनिक, लगभग 2,000 सैन्य वाहन, 90 विमान और 77 नौसैनिक जहाज भागीदारी कर रहे थे।
इस पैमाने के अभ्यास ने रूस की सैन्य तत्परता को अंतरराष्ट्रीय मंच पर दिखाने का अवसर दिया। नई तकनीकों पर विशेष जोर दिया गया, जो आधुनिक युद्ध की जरूरतों को पूरा करती हैं।
अभ्यास की सबसे उल्लेखनीय विशेषता गेरान‑4 और गेरान‑5 ड्रोन झुंड थे। ये समूह में उड़कर लक्ष्य पर सटीक हमला कर सकते हैं, कम लागत में प्रभावी साबित हुए। साथ ही रिमोट‑कंट्रोल्ड TSHRK ‘श्टर्म’ रोबोटिक कॉम्प्लेक्स ने सभी का ध्यान आकर्षित किया।
यह सिस्टम टी‑72 और टी‑90 टैंकों के शिल्प पर आधारित है। बिना चालक के स्वयं गोला‑बारूद लोड कर सकता है और फायरिंग भी कर सकता है। टी‑90M टैंकों ने एरिना‑M सुरक्षा प्रणाली का उपयोग करके ड्रोन को हवा में ही नष्ट कर दिया। ये तकनीकें दर्शाती हैं कि रूस सैनिकों की सुरक्षा बढ़ाते हुए दुश्मन पर दबाव बनाने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।
राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने खुद अभ्यास स्थल का निरीक्षण किया। उनके साथ चीन, बेलारूस, पाकिस्तान और अन्य CSTO देशों के प्रतिनिधि भी मौजूद थे। पुतिन ने हाल के युद्धों से मिले सबक साझा करने और सहयोगी देशों के बीच भरोसा मजबूत करने की बात कही।
45 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों ने इस अभ्यास को देखा। फोकस ऑटोमेशन और मशीन‑आधारित सामूहिक सुरक्षा पर रहा। सेंटर‑2026 सिर्फ एक अभ्यास नहीं, बल्कि भविष्य के युद्ध की झलक पेश करता है।
ड्रोन झुंड की रणनीति हाल के संघर्षों से निकली है, जहाँ सस्ते और प्रभावी ड्रोन बड़े बदलाव ला रहे हैं। श्टर्म जैसे रोबोटिक सिस्टम यह साबित करते हैं कि मानव‑रहित मशीनें आगे बढ़कर हमला करेंगी। एरिना‑M जैसी सक्रिय सुरक्षा प्रणाली टैंकों को ड्रोन हमलों से बचाती है, जो आज की सबसे बड़ी चुनौती बन चुकी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह अभ्यास रूस की सैन्य क्षमता को आधुनिक बनाने की दिशा में ठोस कदम है और यह पश्चिमी देशों को संकेत देता है कि रूस तकनीकी क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम है।
चीन, बेलारूस और पाकिस्तान की भागीदारी यूरेशिया में शक्ति संतुलन को बदल सकती है। CSTO के साथ मिलकर अभ्यास करना सामूहिक सुरक्षा को मजबूत करता है। कई प्रतिनिधियों की मौजूदगी से रूस अपनी उपलब्धियों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित करना चाहता है, जिसे कुछ विश्लेषक नाटो के जवाब के रूप में देखते हैं।
चुनौतियों की बात भी है। रोबोटिक सिस्टम और ड्रोन झुंड को बड़े पैमाने पर उपयोग करने में तकनीकी, लागत और रखरखाव संबंधी समस्याएँ आ सकती हैं। साइबर सुरक्षा भी बड़ा मुद्दा है, क्योंकि ये सिस्टम हैकर्स के निशाने पर हो सकते हैं।
फिर भी सेंटर‑2026 ने स्पष्ट कर दिया कि रूस स्वचालन को अपनी सैन्य रणनीति का केंद्र बना रहा है। भविष्य में ऐसे बड़े अभ्यास और भी देखे जा सकते हैं, जहाँ सहयोगी देशों के साथ मिलकर मशीन और मानव एक साथ लड़ेंगे और गठबंधन की ताकत बढ़ेगी।
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