लगभग 500 खिलाड़ियों की टीम के साथ जापान पहुँचा भारत, और इस बार भी एशिया की प्रमुख खेल शक्तियों में अपनी जगह बनाए रखी। इस बार पदकों की संख्या से अधिक चर्चा उन ऐतिहासिक जीतों की रही, जो भारतीय एथलीटों ने विभिन्न खेलों में हासिल कीं।
महिला हॉकी टीम ने 44 साल बाद एशियन गेम्स का स्वर्ण जीता, चीन को 1‑0 से हराकर। इस जीत के साथ पहली बार एक ही संस्करण में भारत की पुरुष और महिला हॉकी टीमों ने दोनों ही स्वर्ण पदक अपने नाम किए और महिला टीम ने अगले ओलंपिक के लिए क्वालिफाई भी कर ली।
कबड्डी में भारत का प्रदर्शन शानदार रहा। मेन्स और विमेंस दोनों टीमों ने फाइनल में ईरान को हराकर स्वर्ण पदक डिफेंड किया, जिससे दोनों ही टीमें द्विपदक विजेता बन गईं।
तीरंदाजी ने भारत के लिए पाँच स्वर्ण लाया। 17‑वर्षीय कुमकुम अनिल मोहोड ने विमेंस इंडिविजुअल रिकर्व में स्वर्ण जीतकर इतिहास रचा; वह एशियन गेम्स में गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। कुमकुम ने अंकिता भकत और कीर्ति शर्मा के साथ विमेंस रिकर्व टीम का भी स्वर्ण जीता, साथ ही लॉस एंजेलिस ओलंपिक का कोटा भी सुरक्षित किया।
गोल्फ में प्रणवी शरथ उर्स ने 15‑अंडर 265 के स्कोर से स्वर्ण पदक जीता, जिससे वह एशियन गेम्स में स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय महिला गोल्फर बनीं। महिला टीम स्पर्धा में प्रणवी, अदिति अशोक और दीक्षा डागर ने मिलकर सिल्वर मेडल secured किया।
निशानेबाजी में भारत को 15 पदक मिले। नीरू ढांडा ने विमेंस ट्रैप में स्वर्ण जीतकर देश के लिए पहला व्यक्तिगत स्वर्ण हासिल किया। कमलजीत और सुरुचि सिंह ने मिक्स्ड 10 मीटर एयर पिस्टल में एशियन रिकॉर्ड की बराबरी करते हुए स्वर्ण जीता।
सावन बरवाल ने 1982 के बाद एशियन गेम्स मैराथन में भारत को पहला पदक दिलाया और राष्ट्रीय रिकॉर्ड स्थापित किया। सर्वेश कुशारे ने मेन्स हाई जंप में 56 साल बाद स्वर्ण जीतकर इंतजार खत्म किया, जबकि बरानिका एलंगोवन ने पोल वॉल्ट में स्वर्ण जीतकर पहली भारतीय बनीं। विमेंस 10,000 मीटर में सीमा कुमारी ने 16 साल बाद भारत को पदक दिलाया।
कुश्ती में अमन सहरावत ने पुरुष 57 किग्रा वर्ग में स्वर्ण जीतकर उत्तर कोरिया के विश्व चैंपियन चोंग सोंग हान को 10‑7 से हराया। सुजीत कलकल, अंतिम पंघल और दीपक पूनिया ने क्रमशः स्वर्ण, सिल्वर और कांस्य पदक जीते, कुल मिलाकर भारत ने कुश्ती में छह पदक हासिल किए।
बॉक्सिंग में लवलीना बोरगोहेन ने स्वर्ण जीतकर इतिहास रचा; वह मैरी कॉम के बाद एशियन गेम्स में बॉक्सिंग स्वर्ण जीतने वाली दूसरी भारतीय महिला बनीं। परवीन हुड्डा और अंकुश पंघल ने भी बॉक्सिंग में स्वर्ण पदक हासिल कर देश का मान बढ़ाया।
कुछ कम-परिचित खेलों में भी भारत ने पहला एशियन गेम्स पदक जीता। सुचिका तरियाल ने मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स में भारत को पहला पदक दिलाया। सॉफ्ट टेनिस में जय मीणा ने सेमीफाइनल तक पहुँचकर इस खेल में पहला पदक सुनिश्चित किया। वुशू में रोशिबिना देवी ने लगातार तीसरे एशियन गेम्स में पदक जीतकर निरंतरता बनाये रखी।
वेटलिफ्टिंग में मीराबाई चानू ने महिलाओं के 49 किग्रा वर्ग में सिल्वर जीता, जो 1998 के बाद भारत का इस वर्ग में पहला पदक था। स्क्वैश में अनाहत सिंह ने महिला सिंगल्स में सिल्वर जीतकर एशियन गेम्स में सिल्वर जीतने वाली पहली भारतीय बनीं, जबकि अभय सिंह पुरुष सिंगल्स के फाइनल तक पहुँचे।
एशियन गेम्स 2026 भारत के लिए लॉस एंजेलिस ओलंपिक की तैयारी के लिहाज़ से भी महत्वपूर्ण रहा। तीरंदाजी, हॉकी, सेलिंग, स्क्वैश, सर्फिंग, टेनिस और ट्रायथलॉन में ओलंपिक क्वालिफिकेशन दांव पर था। भारत ने मेन्स‑विमेंस हॉकी के अलावा आर्चरी में कंपाउंड मिक्स्ड टीम और विमेंस इंडिविजुअल रिकर्व के कोटा भी हासिल किए।
भारत का सबसे शानदार दिन शुक्रवार (2 अक्टूबर) रहा, जब दल ने 12 पदक जीते, जिनमें छह स्वर्ण शामिल थे। अगले दिन (शनिवार, 3 अक्टूबर) भी नौ पदक जोड़े गए, जिससे भारत का समग्र प्रदर्शन और भी चमकदार हो गया।
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