मध्य प्रदेश के इलाके में बाढ़ की सूचना पर मुख्यमंत्री खुद हालात का जायजा लेने के लिए पहुंचे थे। हालांकि अब मंदाकिनी नदी का पानी में उतर चुका है। जिसके चलते चारों तरफ कीचड़ ही कीचड़ व्याप्त हो गया है। डीएम पुलकित गर्ग और पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह अपनी अपनी पूरी टीम के साथ लगातार बाढ़ ग्रस्त क्षेत्र में बने रहे। उन्होंने लोगों को सुरक्षित रहने का एक तरफ निर्देश दिया तो दूसरी तरफ खाने के पैकेट पीने के लिए पानी की व्यवस्था स्वयं नांव से जा करके उपलब्ध कराई। बताते हैं कि शिवहरे धर्मशाला में चर्तुमाशा बिताने के लिए बिहार के अरवल जिले के सुनैनी निवासी कमला शरण करीब 50 लोगों के साथ ठहरे हुए थे। कमला शरण बाढ़ के दौरान फंस गए और उनकी मौत हो गई। इसी तरह रामधाम में बुजुर्ग संत बाढ़ के दौरान कमरे में थे। अचानक पानी भर जाने के बाद वह बाहर निकले और उनकी डूबने से मौत हो गई। नयागांव के खटकाना मोहल्ले में एक बुजुर्ग महिला की भी बाढ़ के दौरान घर में पानी भर जाने से मौत हो गई। बाढ़ का पानी उतरने के बाद सभी शव बरामद किए गए।
एक दिन पूर्व रामघाट, भरतघाट और नयागांव आदि इलाकों में तबाही मचाने के बाद रविवार को मंदाकिनी की धारा कुछ शांत हुई। नदी की धारा लाल निशान से पहुंचने से राहत मिली है। अभी भी गलियां और सड़कें मलबे से पटी हैं। सैकड़ों की संख्या में बिजली के खंभे और तार टूटे पड़े हैं। तेज बहाव के साथ जलभराव से करीब चार सौ घरों की दीवारें दरक गई हैं। राजापुर इलाके में तिरहार क्षेत्र के करीब दो दर्जन गांव अभी भी बाढ़ के पानी से घिरे हैं। तिरहार के मुख्य मार्ग पर जलभराव से आवागमन बंद है।
मंदाकिनी नदी में आई प्रलयकारी बाढ़ की चपेट में आने वाले लोगों को शनिवार आधी रात तक रेस्क्यू किया गया। करीब आठ सौ लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। राहत एवं बचाव कार्य में सेना भी हेलीकॉप्टर से जुटी रही। यूपी-एमपी की एनडीआरएफ, एसडीआरएफ टीमें भी तैनात रहीं। बाढ़ के तेज बहाव वे मुख्यालय कर्वी का मंदाकिनी पुल क्षतिग्रस्त हो गया है। इससे वाहनों का आवागमन रोका गया है। यही नहीं, हनुमान धारा मार्ग पर बना नयागांव पुल बह गया है। चित्रकूट-सतना मार्ग क्षतिग्रस्त होने से भारी वाहनों का आवागमन रोका गया है।
चित्रकूट में मंदाकिनी नदी की प्रलयकारी बाढ़ से प्रभावित चित्रकूट का जायजा लेने रविवार सुबह मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पहुंचे। उन्होंने पैदल भ्रमण कर जलमग्न मकानों में हुए नुकसान को देखा, पीड़ितों से संवाद किया और राहत शिविरों में सामग्री बांटी। उन्होंने नुकसान की भरपाई का भरोसा देते हुए अधिकारियों को सर्वे के निर्देश दिए। बाढ़ में अब तक वृद्धा समेत तीन लोगों की मौत हुई है। वहीं, सेना ने शनिवार आधी रात तक रेस्क्यू अभियान चलाकर करीब 800 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया।
शनिवार को आई प्रलयकारी बाढ़ की जानकारी मिलने पर मुख्यमंत्री देर रात रीवा पहुंच गए थे। उन्होंने अधिकारियों के साथ रीवा में बैठक कर राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा की थी। इसके बाद रविवार सुबह वह हेलीकाप्टर से चित्रकूट पहुंचे। मुख्यमंत्री ने करीब दो घंटे तक प्रभावित क्षेत्रों का पैदल भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि संकट की घड़ी में मप्र सरकार बाढ़ पीड़ितों के साथ है। अधिकारियों को तीन दिन चित्रकूट में रहकर राहत पहुंचाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री प्राचीन मुखारविंद के पास बनाए गए आश्रय स्थल भी पहुंचे और यहां बाढ़ प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर हालचाल लिया।
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