समाजवादी पार्टी अपनी पारंपरिक लाल-हरी पहचान के साथ अब नीले रंग को भी राजनीतिक संदेश के तौर पर सामने ला रही है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव हाल में नीले रंग का गमछा पहने नजर आए। इसी बीच पार्टी की छात्र इकाई समाजवादी छात्र सभा के लिए भी नया ड्रेस कोड घोषित किया गया है। इसमें नीली टी-शर्ट, नीली जींस और लाल टोपी शामिल है।
अखिलेश यादव ने मंगलवार को पार्टी मुख्यालय में इस नए ड्रेस कोड की घोषणा करते हुए नीले रंग को लोकतंत्र, संविधान, बहुजन आंदोलन और अन्याय के खिलाफ विद्रोह से जोड़ा। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी की सोच नई है, इसलिए उसकी यूनिफॉर्म भी नई होनी चाहिए।
अखिलेश यादव के मुताबिक, नीले रंग का सामाजिक और राजनीतिक महत्व है। उन्होंने इसे बहुजन आंदोलन, दलित समुदाय और डॉ. भीमराव आंबेडकर से जुड़ा रंग बताया। उन्होंने कहा कि नीला रंग लोकतांत्रिक मूल्यों, संविधान और दुनिया का नागरिक बनने की सोच का भी संकेत देता है। उनके मुताबिक यह रंग नई सोच को भी दर्शाता है। अखिलेश ने यह भी कहा कि नीला रंग व्यक्ति को युवा दिखाता है।
नए ड्रेस कोड में नीली जींस को शामिल करने की वजह बताते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि कभी जींस फैक्ट्री, खदान और खेतों में काम करने वाले लोगों की पोशाक हुआ करती थी। आज यही जींस फैशन का हिस्सा है और नई पीढ़ी में शायद ही कोई ऐसा हो जो जींस नहीं पहनता।
अखिलेश ने कहा कि यूनिफॉर्म का उद्देश्य सिर्फ एक जैसा पहनावा तय करना नहीं है। उनके मुताबिक, एक जैसी पोशाक छात्रों के बीच पहनावे से पैदा होने वाले भेद को कम करती है और बराबरी की भावना को मजबूत करती है। उन्होंने कहा, “जब नई पीढ़ी की सोच नई है तो यूनिफॉर्म भी नई होनी चाहिए।”
सपा प्रमुख ने शिक्षण संस्थानों में दो सप्ताह का ‘छात्र जागरूकता सप्ताह’ आयोजित करने की भी घोषणा की। इसका उद्देश्य खास तौर पर Gen Z और Gen Alpha के छात्रों से जुड़ना है। अखिलेश ने कहा कि पार्टी हर साल कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के छात्रों से जुड़ने के लिए काम करेगी। यह केवल छात्रों को पार्टी का सदस्य बनाने तक सीमित नहीं होगा, बल्कि पार्टी की विचारधारा से उन्हें जोड़ने पर भी जोर रहेगा।
सपा की नई नीली पहचान को उसकी PDA (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) राजनीति के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। अखिलेश यादव ने PDA को प्रगतिशील, सकारात्मक और लोकतांत्रिक बताया। उन्होंने कहा कि इसका मकसद लोगों को जोड़ना, भाईचारा और सद्भाव बढ़ाना, संविधान का सम्मान करना और लोगों को विश्व नागरिक बनाना है।
नीला रंग लंबे समय से दलित राजनीति, बहुजन आंदोलन और डॉ. आंबेडकर के प्रतीकवाद से जुड़ा रहा है। सपा के मामले में यह बदलाव इसलिए भी ध्यान खींच रहा है क्योंकि पार्टी की पारंपरिक पहचान लाल टोपी और लाल-हरे रंगों से जुड़ी रही है।
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ सपा की नई दृश्य पहचान को पार्टी की व्यापक छवि बदलने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। नीले रंग के साथ जींस और टी-शर्ट का इस्तेमाल पार्टी की राजनीति को युवा और समकालीन रूप में पेश करने की कोशिश माना जा रहा है।
पार्टी की PDA रणनीति में पिछड़े वर्गों, दलितों और अल्पसंख्यकों को साथ लाने पर जोर रहा है। ऐसे में नीला रंग दलित राजनीति और आंबेडकरवादी प्रतीकवाद से जुड़ता है, जबकि जींस-टीशर्ट का ड्रेस कोड युवा, खासकर कैंपस और सोशल मीडिया से जुड़े Gen Z मतदाताओं तक पहुंच बनाने का संदेश देता है। यानी सपा की नई विजुअल पहचान में दो संदेश एक साथ दिखाई देते हैं- दलित मतदाताओं के लिए सामाजिक न्याय और युवाओं के लिए पीढ़ीगत बदलाव।
हालांकि, नीले रंग का इस्तेमाल अपने आप में चुनावी पसंद तय करने के लिए पर्याप्त नहीं होगा। दलित राजनीति में नीले रंग का एक स्थापित जुड़ाव पहले से मौजूद है। ऐसे में सपा को दलितों तक अपनी पहुंच को संगठन में प्रतिनिधित्व, नेतृत्व के अवसरों और समुदाय से जुड़े मुद्दों के जरिए भी मजबूत करना होगा।
इसी तरह युवा मतदाताओं तक पहुंचने के लिए सिर्फ छात्र संगठन की ड्रेस बदलना काफी नहीं होगा। रोजगार, शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाएं, भर्ती, डिजिटल अवसर और सामाजिक गतिशीलता से जुड़े मुद्दे युवाओं के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
राजनीतिक विश्लेषक और लखनऊ की डॉ. भीमराव आंबेडकर यूनिवर्सिटी के राजनीति विज्ञान विभाग के प्रमुख शशिकांत पांडेय ने इसे सपा की PDA राजनीति के सामाजिक अर्थ को विस्तार देने की कोशिश बताया। उनके मुताबिक, नीला रंग आंबेडकरवादी और दलित प्रतीकवाद से जुड़ा है, जबकि अनौपचारिक ड्रेस कोड युवाओं से जुड़ने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि इसका चुनावी महत्व तभी बनेगा जब प्रतीकात्मक बदलाव के साथ संगठन में वास्तविक भागीदारी, प्रतिनिधित्व और स्पष्ट नीतिगत एजेंडा भी हो।
नीले रंग को लेकर बीजेपी की आलोचना पर प्रतिक्रिया देते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि PDA प्रगतिशील, सकारात्मक और लोकतांत्रिक है। उन्होंने लोगों को जोड़ने और संविधान का सम्मान करने की बात कही। राम मंदिर में चंदे से जुड़े कथित विवाद का जिक्र करते हुए अखिलेश ने बीजेपी से जुड़े लोगों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उन्हें रंगों से नहीं, भगवान से डरना चाहिए और चंदा चुराने वालों को सबसे बड़ा ढोंगी बताया।
अखिलेश यादव ने कहा कि अगर सपा उत्तर प्रदेश में सत्ता में आती है तो छात्र संघों के पुराने पदाधिकारियों की एक समिति बनाई जाएगी। इस समिति को ऑक्सफोर्ड और कैंब्रिज विश्वविद्यालयों समेत यूरोप के अन्य संस्थानों में भेजने की बात उन्होंने कही, ताकि वहां छात्र अपनी आवाज कैसे उठाते हैं और छात्र संगठन किस तरह काम करते हैं, इसे समझा जा सके।
इसके बाद वहां से सीखे गए विचारों को देश में लागू करने की दिशा में काम करने की बात अखिलेश ने कही। यानी सपा के लिए नीली टी-शर्ट और जींस सिर्फ नया ड्रेस कोड नहीं, बल्कि पार्टी की छात्र राजनीति और युवा जुड़ाव को नए तरीके से पेश करने की कोशिश के तौर पर सामने आ रही है।
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