दुनिया के कई हिस्सों में बैक्टीरियल बीमारियाँ स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन चुकी हैं। रूस में हाल ही में प्लेग के प्रकोप ने फिर से इस बात पर प्रकाश डाला कि एक ही बैक्टीरिया से भी व्यापक संक्रमण संभव है।
इन बैक्टीरिया का प्रभाव क्षेत्र के अनुसार भिन्न होता है—कुछ अफ्रीका में अधिक प्रचलित हैं, कुछ दक्षिण एशिया में, जबकि कुछ विश्वभर में फैलते हैं। भारत में भी इन 10 बैक्टीरिया के संक्रमण के मामले नियमित रूप से रिपोर्ट होते हैं।
विब्रियो कॉलेरी से हैजा होता है, जो दूषित पानी और भोजन से फैलता है। तेज दस्त और निर्जलीकरण बिना इलाज के घातक हो सकते हैं। 2025 में अफ्रीका और पूर्वी भूमध्यसागर में सबसे अधिक मामले दर्ज हुए, जबकि भारत में भी एनसीडीसी सर्विलांस में यह बैक्टीरिया पाया गया।
यर्सिनिया पेस्टिस प्लेग का कारण बनता है, जो मुख्यतः संक्रमित पिस्सुओं और छोटे स्तनधारियों के माध्यम से फैलता है। फेफड़ों वाला रूप सांस से भी फैल सकता है। अफ्रीका में अधिकांश मामले आते हैं, और भारत में 2002 में हिमाचल प्रदेश में 16 पुष्टि किए गए मामले दर्ज हुए।
शिगेला डिसेंट्री बैक्टीरियल पेचिस का कारण बनता है, जो दूषित पानी, भोजन और संक्रमित व्यक्ति के संपर्क से फैलता है। उप-सहारा अफ्रीका और दक्षिण एशिया में यह बीमारी विशेष रूप से बच्चों को प्रभावित करती है, और भारत में भी प्रकोप दर्ज हुए हैं।
साल्मोनेला टाइफी टाइफाइड का कारण बनता है, जो दूषित पानी और भोजन से फैलता है। दक्षिण एशिया और उप-सहारा अफ्रीका के कम स्वच्छता वाले क्षेत्रों में यह रोग अधिक प्रचलित है, और भारत में लगातार मामले रिपोर्ट होते हैं।
बोर्डेटेला पर्टुसिस काली खांसी का कारण बनता है, जो खांसने और छींकने से निकलने वाली बूंदों से फैलता है। 2025 में विश्वभर में 2.64 लाख से अधिक मामले दर्ज हुए, और भारत में 2,149 मामले रिपोर्ट हुए।
माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस टीबी का कारण बनता है, जो हवा के माध्यम से फैलता है। 2024 में दक्षिण-पूर्व एशिया में सबसे अधिक नए मामले आए, और भारत अकेले विश्व के लगभग 25% नए टीबी मामलों के लिए जिम्मेदार है।
निसेरिया मेनिन्जाइटिडिस मेनिन्जोकॉकल मेनिन्जाइटिस और रक्त संक्रमण का कारण बनता है। अफ्रीका के मेनिन्जाइटिस बेल्ट में इसका बोझ सबसे अधिक है, और 2025 में 24 देशों में 21,526 संदिग्ध मामले दर्ज हुए। भारत में भी मेनिन्जाइटिस के मामले रिपोर्ट हुए हैं।
क्लेबसिएला न्यूमोनिया निमोनिया, मूत्र पथ संक्रमण, रक्त संक्रमण और मेनिन्जाइटिस का कारण बनता है। दवा-प्रतिरोधी रूप विश्वभर में पाए जाते हैं, और भारत सहित 16 देशों में हाइपरवायरुलेंट प्रजातियों की मौजूदगी दर्ज है। एनसीडीसी सर्विलांस में 2024 में बड़ी संख्या में आइसोलेट्स पाए गए।
स्ट्रेप्टोकॉकस न्यूमोनिया निमोनिया, मेनिन्जाइटिस और रक्त संक्रमण का प्रमुख कारण है। यह विश्वभर में पाया जाता है, और भारत में भी यह निमोनिया का लगभग 19% हिस्सा बनाता है।
ई. कोलाई की अधिकांश किस्में हानिरहित हैं, पर कुछ गंभीर फूड पॉइजनिंग, दस्त और खूनी दस्त का कारण बनती हैं। यह बीमारी खासकर अफ्रीका और दक्षिण-पूर्व एशिया में अधिक प्रचलित है, और 2024 में एनसीडीसी सर्विलांस में इसकी हिस्सेदारी 33% थी।
इन 10 बैक्टीरिया की मौजूदगी और प्रभाव देश-देश में अलग-अलग हैं। दूषित पानी, खराब स्वच्छता और अस्पतालों में बढ़ते एंटीबायोटिक प्रतिरोध को लेकर चिंताएँ बढ़ रही हैं। भारत में भी इन बैक्टीरिया की निगरानी और वैज्ञानिक अध्ययन जारी हैं, इसलिए समय पर पहचान, निगरानी और सही उपचार अत्यंत आवश्यक है।
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