प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मिले 1498 ममेंटोज की ई-नीलामी 17 सितंबर से शुरू होगी। इनमें भगवान राम का चांदी का ममेंटो, काकतीय कला तोरणम की प्रतिकृति, गोंड कला की पेंटिंग और राधा-कृष्ण की सोने से प्लेटेड कलाकृति जैसी कई खास वस्तुएं शामिल हैं। इनसे मिलने वाली रकम नमामि गंगे कार्यक्रम में जाएगी। आखिर इस बार की नीलामी में कौन-सी वस्तुएं सबसे खास हैं और इनकी शुरुआती कीमत कितनी रखी गई है? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं..
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अलग-अलग मौकों पर मिले खास उपहार अब आम लोग, संग्रहकर्ता और संस्थान भी खरीद सकेंगे। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने बुधवार को नई दिल्ली में पीएम ममेंटोज ई-नीलामी के आठवें संस्करण की शुरुआत की। यह ई-नीलामी 17 सितंबर 2026 से आधिकारिक पोर्टल के जरिए शुरू होगी। इस बार कुल 1,498 ममेंटोज नीलामी के लिए रखे गए हैं। इन वस्तुओं में भारत की कला, संस्कृति, परंपरा, शिल्प और आध्यात्मिक विरासत की झलक देखने को मिलेगी।
नीलामी में कई ऐसी वस्तुएं हैं जिनकी शुरुआती कीमत लाखों रुपये रखी गई है। इनमें कर्नाटक से भगवान राम का चांदी का ममेंटो 13.50 लाख रुपये की शुरुआती कीमत के साथ शामिल है। काकतीय कला तोरणम की चांदी की प्रतिकृति की शुरुआती कीमत 9 लाख रुपये है। गोंड कला की ट्री ऑफ लाइफ पेंटिंग 7.50 लाख रुपये से शुरू होगी। जगन्नाथ परिवार को रथ पर दर्शाने वाली कलाकृति की शुरुआती कीमत 6 लाख रुपये है। वहीं 99.99 फीसदी शुद्ध सोने से प्लेटेड फ्रेम वाली राधा-कृष्ण कलाकृति की शुरुआती कीमत 5.40 लाख रुपये रखी गई है।
पीएम ममेंटोज ई-नीलामी कई संस्करणों से आयोजित की जा रही है और इसमें नागरिकों, संग्रहकर्ताओं तथा संस्थानों की भागीदारी रही है। इस पहल के जरिए इन ममेंटोज को लोगों तक पारदर्शी तरीके से पहुंचाने का अवसर दिया जाता है। नीलामी में शामिल होने से पहले लोग प्रदर्शनी में इन वस्तुओं को देख भी सकेंगे। प्रदर्शनी में देश की पारंपरिक कारीगरी, कलात्मक शैली और अलग-अलग सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों को समझने का मौका मिलेगा। संस्कृति मंत्रालय ने नागरिकों, संस्थानों, कंपनियों और कला प्रेमियों से इसमें भाग लेने की अपील की है।
पीएम ममेंटोज ई-नीलामी की एक महत्वपूर्ण बात यह है कि इससे मिलने वाली रकम नमामि गंगे कार्यक्रम में भेजी जाती है। यानी प्रधानमंत्री को मिले इन उपहारों की नीलामी से प्राप्त धन का इस्तेमाल गंगा नदी के पुनरुद्धार और संरक्षण से जुड़े राष्ट्रीय अभियान में किया जाएगा। इस तरह यह पहल देश की सांस्कृतिक विरासत को गंगा संरक्षण के राष्ट्रीय अभियान से जोड़ती है। पूरी प्रक्रिया में वस्तुओं के दस्तावेजीकरण, प्रदर्शनी और संचालन की जिम्मेदारी संस्कृति मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय आधुनिक कला दीर्घा, नई दिल्ली ने संभाली है।
तकनीकी और भुगतान से जुड़ी प्रक्रिया के लिए अलग-अलग संस्थाओं के साथ समन्वय किया गया है। एनआईसी पोर्टल और तकनीकी सहायता उपलब्ध करा रहा है, जबकि मूल्यांकन और कीमत तय करने के लिए संबंधित अधिकारियों की मदद ली गई है। एसबीआई भुगतान गेटवे से जुड़ी सहायता देगा। सफल बोलीदाताओं को वस्तुओं की पैकिंग और डिलीवरी की जिम्मेदारी निर्धारित फाइन आर्ट हैंडलिंग एजेंसी की होगी।
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