शरद नवरात्रि का आगाज 11 अक्टूबर से होने वाला है, जिसमें माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। अगर आप इस पावन अवसर पर माँ का दर्शन करने की योजना बना रहे हैं, तो भारत के ये 10 प्रसिद्ध दुर्गा मंदिर आपके लिए खास विकल्प बन सकते हैं।
वैष्णो देवी मंदिर, जम्मू‑कश्मीर – कटरा में स्थित यह मंदिर देश के सबसे बड़े तीर्थस्थलों में से एक है। यहाँ भक्त लगभग 12 किमी की चढ़ाई करके पवित्र गुफा तक पहुँचते हैं, जहाँ महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती के तीन प्राकृतिक पिंडियों की पूजा होती है।
कामाख्या मंदिर, असम – गुवाहाटी के नीलांचल पहाड़ी पर स्थित यह मंदिर 51 शक्तिपीठों में गिना जाता है। यह स्त्री शक्ति और प्रजनन क्षमता से जुड़ी मान्यताओं के कारण प्रसिद्ध है और नवरात्रि के दौरान विशेष पूजा‑अर्चना का आयोजन करता है।
दक्षिणेश्वर काली मंदिर, पश्चिम बंगाल – कोलकाता के पास हुगली नदी के किनारे स्थित यह मंदिर 19वीं शताब्दी में रानी रासमणि द्वारा बनवाया गया था। यहाँ माँ भवतारिणी को समर्पित नौ शिखरों वाली वास्तुकला और शांत वातावरण श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।
अंबाजी मंदिर, गुजरात – गुजरात‑राजस्थान सीमा के पास स्थित यह शक्तिपीठ माना जाता है कि यहाँ माँ सती का हृदय भाग गिरा था। यहाँ देवी की प्रतिमा के बजाय पवित्र श्री यंत्र की पूजा की जाती है और भाद्रपद पूर्णिमा पर बड़ा मेला लगता है।
मैहर वाली शारदा माता, मध्य प्रदेश – मध्य प्रदेश के मैहर में त्रिकूट पहाड़ी पर स्थित यह मंदिर ज्ञान और शक्ति की देवी शारदा को समर्पित है। यहाँ सीढ़ियों से ऊपर चढ़कर पहुँचा जाता है और नवरात्रि के दौरान भक्तों की भीड़ उमड़ती है।
बगलामुखी मंदिर, हिमाचल प्रदेश – कांगड़ा जिले में स्थित यह मंदिर माँ बगलामुखी को दस महाविद्याओं में से एक मानता है। दूर‑दूर से श्रद्धालु यहाँ विशेष पूजा और हवन के लिए आते हैं, जिससे यह हिमाचल के प्रमुख आध्यात्मिक केंद्रों में गिना जाता है।
भ्रमराम्बा मल्लिकार्जुन मंदिर, आंध्र प्रदेश – श्रीशैलम में स्थित यह मंदिर 12 शिव ज्योतिर्लिंगों और प्रमुख शक्तिपीठों में गिना जाता है। यहाँ माँ भ्रमराम्बा के साथ भगवान मल्लिकार्जुन की पूजा की जाती है, जो शिव‑शक्ति के संगम को दर्शाता है।
बनशंकरी मंदिर, कर्नाटक – बादामी क्षेत्र में स्थित यह मंदिर माँ शाकंभरी को समर्पित है। यहाँ राहुकाल में विशेष पूजा की परंपरा है और बनशंकरी जात्रा मेला बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।
नैना देवी मंदिर, उत्तराखंड – नैनीताल में नैनी झील के किनारे स्थित यह मंदिर माँ नैना देवी को समर्पित है, जहाँ माना जाता है कि यहाँ माँ सती की नेत्र गिरे थे। यहाँ माँ काली और भगवान गणेश की भी पूजा होती है, जिससे प्राकृतिक सुंदरता के साथ आध्यात्मिक अनुभव मिलता है।
दुर्गा कुंड मंदिर, वाराणसी – वाराणसी में स्थित यह प्राचीन मंदिर लाल रंग की बनावट और पास के कुंड के कारण विशिष्ट है। नवरात्रि के दौरान यहाँ विशेष पूजा होती है और काशी आने वाले भक्तों के लिए यह एक अनिवार्य तीर्थस्थल बन जाता है।
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