रक्षा विभाग ने आज एक नई नीति जारी की है, जिसके तहत 30 वर्ष से अधिक आयु के पुरुष सैनिकों को नियमित रूप से टेस्टोस्टेरोन स्तर की जाँच करानी अनिवार्य होगी। यह निर्णय पेंटागन के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा लिया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य सैनिकों की शारीरिक फिटनेस और युद्धक तत्परता को सुनिश्चित करना है।
टेस्टोस्टेरोन, एक प्रमुख पुरुष हार्मोन, शारीरिक शक्ति, मांसपेशी द्रव्यमान और ऊर्जा स्तर पर गहरा प्रभाव डालता है। पेंटागन के अनुसार, आयु के साथ इस हार्मोन का स्तर घटता है, जिससे सैनिकों की शारीरिक क्षमताएँ प्रभावित हो सकती हैं। नई जाँच के तहत, सैनिकों के रक्त नमूने एक निर्धारित समय पर लिए जाएंगे और परिणामों के आधार पर आवश्यक चिकित्सा या प्रशिक्षण हस्तक्षेप तय किया जाएगा।
इस कदम की घोषणा करते हुए पेंटागन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "हमारा लक्ष्य है कि हर सैनिक अपने सर्वोच्च शारीरिक स्तर पर रहे। टेस्टोस्टेरोन की जाँच हमें यह सुनिश्चित करने में मदद करेगी कि कोई भी सैनिक शारीरिक रूप से कमजोर होकर तैनाती पर न जाए।" अधिकारी ने आगे बताया कि जाँच के परिणाम गोपनीय रखे जाएंगे और केवल चिकित्सा एवं प्रशिक्षण विभाग को ही उपलब्ध कराए जाएंगे।
हालाँकि, इस नीति का दायरा केवल पुरुष सैनिकों तक सीमित है। पेंटागन ने स्पष्ट किया कि महिलाओं के लिए यह परीक्षण अनिवार्य नहीं है क्योंकि उनका हार्मोन प्रोफ़ाइल पुरुषों से मूलतः भिन्न है। पेंटागन के एक स्वास्थ्य अधिकारी ने कहा, "टेस्टोस्टेरोन पुरुषों में शारीरिक प्रदर्शन का प्रमुख सूचक है, जबकि महिलाओं में एस्ट्रोजन और अन्य हार्मोन प्रमुख भूमिका निभाते हैं। इसलिए, समान परीक्षण मानदंड महिलाओं पर लागू नहीं होते।"
इस निर्णय पर कुछ विशेषज्ञों ने सवाल उठाए हैं कि क्या यह नीति लैंगिक समानता के सिद्धांतों के अनुरूप है। एक सैन्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ ने कहा, "यह निर्णय पुरुषों के लिए आवश्यक हो सकता है, लेकिन महिलाओं के लिए वैकल्पिक शारीरिक मूल्यांकन मानदंड विकसित करना भी ज़रूरी है ताकि सभी सैनिकों का समान रूप से मूल्यांकन हो सके।"
सैन्य अधिकारियों ने बताया कि यह नीति पहले से चल रही शारीरिक फिटनेस कार्यक्रमों के साथ समन्वित होगी। सैनिकों को एक विस्तृत गाइडलाइन दी जाएगी, जिसमें बताया जाएगा कि किस प्रकार के परीक्षण, किस आवृत्ति और किस प्रकार के परिणाम पर चिकित्सकीय या प्रशिक्षणात्मक कदम उठाए जाएंगे।
पेंटागन ने यह भी स्पष्ट किया कि यह नीति केवल सक्रिय ड्यूटी पर तैनात सैनिकों पर लागू होगी, और रिजर्व व रिटायर्ड सैनिकों पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। इसके अलावा, पेंटागन ने कहा कि भविष्य में महिलाओं के लिए भी समान शारीरिक मानदंडों की समीक्षा की जाएगी ताकि सभी सैनिकों को समान रूप से तैयार किया जा सके।
इस नई नीति के तहत, अमेरिकी सैनिकों की शारीरिक तत्परता पर गहरा प्रभाव पड़ेगा। पेंटागन आशा करता है कि यह कदम सैन्य बल को अधिक सक्षम और स्वास्थ्यवर्धक बनाएगा, जिससे भविष्य में युद्धक क्षमताओं में सुधार होगा।
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