भोजपुर जिले के आरा शहर में सेवानिवृत्त कस्टम अधिकारी राम कुमार सिंह हत्याकांड का पुलिस ने खुलासा करते हुए अब तक चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में मुख्य आरोपी चंदन सिंह,मनोज कुमार सिंह उर्फ लक्की, अभिषेक कुमार और टीपू शामिल हैं। पुलिस की जांच में हत्या के पीछे 14 कट्ठा जमीन का विवाद प्रमुख कारण बनकर सामने आया है। बुधवार को भोजपुर के एसपी अवधेश दीक्षित ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मामले में अब तक हुई कार्रवाई और जांच के दौरान सामने आए तथ्यों की जानकारी दी।
एसपी के अनुसार, राम कुमार सिंह की हत्या की साजिश करीब 15 से 20 दिन पहले ही रच ली गई थी। आरोपियों ने वारदात को अंजाम देने से लेकर घटना के बाद फरार होने तक की योजना तैयार की थी। पुलिस अब जमीन के दस्तावेजों, रजिस्ट्री, म्यूटेशन और आरोपियों के आपसी संबंधों के आधार पर पूरे मामले की कड़ियां जोड़ रही है।
कोलकाता एयरपोर्ट से मुख्य आरोपी समेत दो गिरफ्तार पुलिस के मुताबिक, मुख्य आरोपी चंदन सिंह और अभिषेक कुमार को कोलकाता एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया। वहीं, टीपू को आरा के टाउन थाना क्षेत्र से पकड़ा गया। मनोज कुमार सिंह उर्फ लक्की को घटना के तुरंत बाद गिरफ्तार कर लिया गया था। पुलिस सभी आरोपियों की भूमिका की जांच कर रही है और मामले में शामिल अन्य अभियुक्तों की गिरफ्तारी के लिए भी छापेमारी की जा रही है।
सुबह की सैर पर निकले अधिकारी की गोली मारकर हत्या गौरतलब है कि 15 अक्टूबर 2026 की सुबह करीब छह बजे नवादा थाना क्षेत्र में जैन कॉलेज के पूर्वी गेट के समीप राम कुमार सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वह रोज की तरह सुबह की सैर के लिए रमना मैदान की ओर जा रहे थे। इसी दौरान अपराधियों ने उन पर ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं। गंभीर रूप से घायल राम कुमार सिंह को अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई।
इस मामले में नवादा थाने में कांड संख्या 784/26 दर्ज किया गया था। घटना की गंभीरता को देखते हुए भोजपुर एसपी के निर्देश पर एसडीपीओ सदर-1 के नेतृत्व में विशेष जांच टीम (एसआईटी) गठित की गई थी। टीम मृतक के परिजनों के बयान, जमीन विवाद और हत्या के संभावित कारणों को केंद्र में रखकर जांच कर रही थी।
2006 से मृतक के बेटे के नाम पर थी विवादित जमीन पुलिस जांच के अनुसार, विवादित 14 कट्ठा जमीन भोजपुर जिले के सिंघही में स्थित है। इसका थाना नंबर 245, खेसरा नंबर 69 और खाता नंबर 88 बताया गया है। एसपी ने बताया कि वर्ष 2006 से जमीन राम कुमार सिंह के बेटे के नाम पर थी और वर्ष 2020 में उसकी घेराबंदी भी कराई गई थी।
जांच में सामने आया कि वर्ष 2025 में दूसरे पक्ष ने जमीन की पावर ऑफ अटॉर्नी हासिल की थी। इसके बाद अलग-अलग लोगों के नाम पर जमीन की रजिस्ट्री और म्यूटेशन कराए जाने की बात सामने आई है। पुलिस इसी जमीन विवाद को हत्या की मुख्य वजह मानकर जांच आगे बढ़ा रही है। ये भी पढ़ें- बिहार: एक प्रेम विवाह का दर्दनाक अंत! मुंगेर की अंकिता की बेगूसराय में संदिग्ध मौत; पति पर गंभीर आरोप
वारदात के बाद सिलीगुड़ी और गंगटोक होते हुए पहुंचे कोलकाता एसपी के मुताबिक, आरोपियों ने हत्या से तीन-चार दिन पहले अपने बैंक खातों में मौजूद रकम निकालकर अपनी पत्नियों के खातों में ट्रांसफर कर दी थी। उनकी पत्नियों को भी दूसरी जगह भेज दिया गया था। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी भोजपुर से निकलकर पहले सिलीगुड़ी गए और फिर गंगटोक होते हुए कोलकाता पहुंचे। इस दौरान उन्होंने अपनी पहचान छिपाने और पुलिस की गिरफ्त से बचने की कोशिश की।
पुलिस का दावा है कि आरोपियों ने नए सिम कार्ड और मोबाइल फोन खरीदे थे। कोलकाता एयरपोर्ट पर गिरफ्तारी के समय मुख्य आरोपी चंदन सिंह अपनी असली पहचान छिपाने का प्रयास कर रहा था।
एसपी अवधेश दीक्षित ने बताया कि पुलिस के पास आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य हैं। इनके आधार पर आरोपपत्र दाखिल किया जाएगा और मामले में स्पीडी ट्रायल कराने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि हत्याकांड में शामिल अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार प्रयास कर रही है।
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