समस्तीपुर जिले में साइबर अपराधियों ने लोगों को ठगने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाए। कहीं परिचित की पहचान और तस्वीर का इस्तेमाल कर भरोसा जीता गया तो कहीं लालच और धमकी देकर रुपये ऐंठे गए। तीन अलग-अलग मामलों में साइबर ठगों ने कुल 6.71 लाख रुपये की ठगी की। इनमें दो मामलों में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।
परिचित की पहचान चुराकर 2.52 लाख रुपये ठगे
परिचित की तस्वीर देखकर विजय शंकर को विश्वास हो गया। इसके बाद ठगों के बताए बैंक खातों में अलग-अलग किस्तों में 2.52 लाख रुपये भेज दिए। बाद में वास्तविक युवक और उसके परिजनों से संपर्क करने पर ठगी का खुलासा हुआ।
12 लाख के सामान का झांसा देकर 3.99 लाख ऐंठे दूसरे मामले में साइबर अपराधियों ने एक महिला को करीब 12 लाख रुपये के कपड़े और सोने के आभूषण देने का झांसा दिया। शुरुआत में यूपीआई के माध्यम से 12 हजार रुपये मंगाए गए। इसके बाद ठगों ने धमकी भरे ऑडियो और वीडियो भेजकर महिला को डराया और दबाव बनाया। इसके बाद अलग-अलग माध्यमों से महिला से कुल 3.99 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए गए। मामले में प्राथमिकी दर्ज कर पुलिस जांच कर रही है।
पूसा बाजार के व्यवसायी से भी 20 हजार की ठगी इसी कड़ी में पूसा बाजार के एक व्यवसायी को भी साइबर ठगों ने निशाना बनाया। ठगों ने व्यवसायी की पहचान के एक अधिकारी का नाम लेकर व्हाट्सऐप कॉल के जरिए 65 हजार रुपये की मांग की। उक्त अधिकारी अक्सर व्यवसायी की दुकान पर सामान लेने जाते थे। ठगों ने व्यवसायी को अपने झांसे में लेकर 10-10 हजार रुपये की रकम दो बार बताए गए बैंक खाते में ट्रांसफर करा ली। बाद में जब व्यवसायी ने संबंधित अधिकारी से संपर्क किया तो उसे ठगी का एहसास हुआ।
भरोसा, लालच और डर बना ठगी का हथियार इन घटनाओं में साइबर ठगी के अलग-अलग तरीके सामने आए हैं। कहीं अपराधियों ने नाइजीरिया में रहने वाले परिचित की तस्वीर और पहचान का इस्तेमाल कर भरोसा पैदा किया तो कहीं सामान देने का लालच दिया गया। एक मामले में धमकी देकर पीड़िता पर दबाव बनाया गया। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, यूपीआई आईडी और डिजिटल लेनदेन की कड़ियों की जांच कर रही है। ठगी की रकम किन खातों में पहुंची और उसके बाद कहां ट्रांसफर की गई, इसका भी पता लगाया जा रहा है। पढ़ें: बंद निगमों के कर्मचारियों को मिलेगा एक-एक लाख मुआवजा, तीन महीने में भुगतान के निर्देश
दो मामलों में प्राथमिकी, जांच शुरू साइबर पुलिस उपाधीक्षक दुर्गेश दीपक ने बताया कि दो मामलों में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। पुलिस मामले की गंभीरता से छानबीन कर रही है। ठगी में इस्तेमाल किए गए बैंक खातों और अन्य माध्यमों से संबंधित जांच की जा रही है। उन्होंने बताया कि जल्द ही पूरे मामले का उद्भेदन कर लिया जाएगा।
पुलिस ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की साइबर पुलिस ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर किसी परिचित की तस्वीर या नाम देखकर आर्थिक मदद न करें। किसी भी आपात स्थिति में संबंधित व्यक्ति से दूसरे माध्यम से संपर्क कर पहले पुष्टि करें। साइबर ठगी होने पर तत्काल 1930 पर शिकायत करने के साथ बैंक को भी सूचना दें, ताकि रकम को होल्ड कराने की संभावना बढ़ सके।
चार दिन पहले चार आरोपितों की हुई थी गिरफ्तारी हाल के दिनों में समस्तीपुर में साइबर अपराध से जुड़े मामलों में पुलिस ने तकनीकी और वित्तीय जांच के आधार पर कार्रवाई की है। 26 सितंबर को डिजिटल अरेस्ट से जुड़े 6.31 करोड़ रुपये के साइबर ठगी मामले में चार आरोपितों को गिरफ्तार किया गया था। जांच में एक खाते में करीब 90 लाख रुपये के संदिग्ध लेनदेन का भी पता चला था।
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