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नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ का खतरा अब बिहार में भी बढ़ने लगा है। बिहार के कई जिलों में बाढ़ की आशंका को देखते हुए राज्य सरकार और आपदा प्रबंधन विभाग अलर्ट मोड पर हैं। वहीं, इस भीषण बाढ़ के खतरे को देखते हुए विशेषज्ञों ने भी चिंता जताई है। अचानक आने वाली इस फ्लैश फ्लड से भारी नुकसान की आशंका है। गांवों के डूबने के अलावा तटबंधों के क्षतिग्रस्त होने या टूटने और अन्य नुकसान की संभावना बनी हुई है।
देर शाम के बाद वाटर डिस्चार्ज बढ़ने से बढ़ेगा खतरा पश्चिमी चंपारण जिले के वाल्मीकिनगर में प्रवेश करने के बाद गंडक नदी छह जिलों से होते हुए बिहार की प्रमुख नदी गंगा में सोनपुर के पास मिलती है। इससे पहले यह वैशाली और सारण की सीमा से गुजरते हुए मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज और पश्चिमी चंपारण जिलों से होकर बहती है। इन जिलों के कई प्रखंडों और सैकड़ों पंचायतों के गांवों पर अब बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है।
स्थिति को देखते हुए लोगों को अलर्ट रहने और निचले इलाकों को खाली करने की सलाह दी गई है। प्रशासन ने लोगों को ऊंचे स्थानों पर शरण लेने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए लगातार माइकिंग कराई जा रही है और लोगों से निचले इलाकों में सतर्क रहने की अपील की जा रही है।
गंडक नदी के इन क्षेत्रों पर मंडरा रहा खतरा गोपालगंज जिले में गंडक नदी के बढ़ते जलस्तर और संभावित बाढ़ के खतरे को देखते हुए कुल छह तटीय प्रखंडों की 62 पंचायतों को सबसे अधिक संवेदनशील और प्रभावित क्षेत्र के रूप में चिह्नित किया गया है। इनमें सदर, कुचायकोट, मांझा, बैकुंठपुर, बरौली और सिधवलिया शामिल हैं। पूर्वी चंपारण जिले में गंडक नदी और उससे जुड़े संभावित बाढ़/फ्लैश फ्लड के खतरे को देखते हुए मुख्य रूप से अरेराज, केसरिया और संग्रामपुर प्रखंडों को सबसे संवेदनशील और प्रभावित क्षेत्र माना गया है।
पश्चिमी चंपारण जिले में पिपरासी, भितहा, ठकराहां, सिधुआं, बगहा, नौतन, योगापट्टी, मधुबनी, बैरिया और लौरिया प्रखंड संवेदनशील माने जा रहे हैं। वैशाली जिले में गंडक के बढ़ते जलस्तर से लालगंज, हाजीपुर और राघोपुर प्रखंड प्रभावित एवं संवेदनशील क्षेत्रों में शामिल हैं। वहीं, मुजफ्फरपुर जिले में पारू, सरैया और साहेबगंज प्रमुख रूप से संवेदनशील क्षेत्र हैं।
विशेषज्ञ ने बताया, कितना विनाशकारी हो सकता है बाढ़ का असर बाढ़ के कारणों और इससे बचाव पर दशकों से अध्ययन कर रहे विशेषज्ञ दिनेश कुमार मिश्रा ने बताया कि नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ का असर गंडक नदी पर अधिक दिखाई देगा। त्रिशूली नदी को ही नेपाल में नारायणी और बिहार में गंडक नदी के नाम से जाना जाता है।
उन्होंने कहा कि इसके कारण बिहार के कई जिलों, खासकर गंडक नदी के जलग्रहण क्षेत्र में आने वाले इलाकों में इसका प्रभाव देखने को मिलेगा। बाढ़ के पानी के तेज बहाव के कारण निचले इलाकों में सबसे ज्यादा खतरा रहेगा। कई गांव जलमग्न हो सकते हैं। तटबंधों पर दबाव बढ़ने से उनके टूटने का खतरा भी बना रहेगा। सहायक नदियों में भी बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इसके अलावा गंडक नदी से निकलने वाली नहरों पर भी दबाव बढ़ेगा।
उन्होंने कहा कि ऐसे में आपदा प्रबंधन की तैयारी सबसे महत्वपूर्ण हो जाती है, ताकि संभावित खतरे से प्रभावी तरीके से निपटा जा सके। पर्याप्त संख्या में नाव और बोट की व्यवस्था करने के साथ तटबंधों की लगातार निगरानी करना जरूरी है। ये भी पढ़ें- नेपाल में बाढ़ से तबाही: अबतक 95 शव बरामद, 500 लापता; कैलाश यात्रियों पर भी संकट, भारत सरकार ने भेजी मदद
आपदा प्रबंधन विभाग की तैयारी अहम संभावित बाढ़ के खतरे को देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग की तैयारी सबसे महत्वपूर्ण है। लोगों को निचले इलाकों से निकालकर ऊंचे और सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना, सुरक्षित निकासी की व्यवस्था करना, बाढ़ में फंसे लोगों को समय पर बाहर निकालने के लिए पर्याप्त रेस्क्यू संसाधन उपलब्ध रखना और SDRF की प्रतिनियुक्ति से लेकर तटबंधों की लगातार निगरानी सुनिश्चित करना बेहद अहम है। इन तैयारियों के जरिए बाढ़ के खतरे और उससे होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसके अलावा प्रभावित लोगों के लिए सुरक्षित रहने, भोजन और पेयजल की व्यवस्था करना भी प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती होगी।
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