लोगों ने घटना की सूचना अंचल प्रशासन को दी तो अंचलाधिकारी सुबह मौके पर पहुंचे और कटावनिरोधी काम शुरू कराया। साथ में वहां उन सभी मकानों को खाली कराया गया जो कटाव की जद में आ सकते थे। अंचलाधिकारी ने घटना की जानकारी आपदा प्रबंधन को दी और कटावनिरोधी काम शुरू कराने की बात कही।
सबौर सीओ दिव्या कुमारी ने कहा कि कटाव की जानकारी मिलने के बाद इंग्लिश गांव में कटाव का जायजा लेने के लिए गए थे। कटाव पीड़ित से बात की। कटाव पीड़ित को चिह्नित कर जो भी सरकारी सहायता राशि होगी दिलायी जाएगी। जरूरी सामान भी दिया गया है। किचन चलाने को लेकर जिला में पत्र भेजा गया है। आदेश मिलने पर आवश्यकतानुसार किचन भी चलाया जाएगा।
सबौर प्रखंड की फरका पंचायत के इंग्लिश गांव निवासी 45 वर्षीय राधे साह और उनके परिवार के सात सदस्य जब रविवार की रात खाना खाकर बिस्तर पर सोने गए, तब किसी को भी इस बात की आशंका नहीं थी कि आधी रात को गंगा की तेज धारा का कहर पूरे परिवार पर टूटने वाला है। रात करीब सवा दो बजे राधे की मां को अहसास हुआ कि उनके घर की छत पर लगी टिन के शेड टूट रहे हैं। घर में चोर घुसने की आशंका से वह जोर-जोर से चिल्लाने लगीं।
मदद की गुहार सुनकर राधे और उनके परिवार के अन्य सदस्यों की नींद खुली। सभी जैसे ही मां के कमरे में पहुंचे तो देखा कि शेड से बने घर का एक हिस्सा धीरे-धीरे नदी की धारा में कटने लगा है। यह दृश्य देखकर परिवार के सभी सदस्य बिलखने लगे। सभी लोग तेजी से घर के बाहर सुरक्षित जगह पर निकल आए। वहीं राधे अपने कट रहे आशियाने से सिर्फ गाय को निकाल पाए। इतनी ही देर में दो कमरे का पक्का मकान और टिन के शेड से बने दो कमरे आंखों के सामने नदी में विलीन हो गए।
नदी की तेज धारा में इन्होंने अपने घर के बक्से, चौकी, पलंग, आलमीरा, अनाज, चारा समेत अन्य सामान बहते देखे। अंधेरा होने के कारण चंद मिनटों में घर और सामान आंखों से ओझल हो गए। राधे और उसके पूरे परिवार पर नदी की तेज धारा कहर बनकर टूट पड़ी। रात करीब दो से ढाई बजे के बीच 15 घर कटाव की भेंट चढ़ गए।
एक के बाद एक कटकर बह रहे घरों के लोगों की चीख-पुकार सनुकर आसपास के लोग अपने घरों से बाहर निकल आए। पड़ोसी राजू चौबे, मणिभूषण चौबे व भगवान यादव ने बताया कि इस दृश्य को देखने के बाद लगा कि अब हमारा घर भी गंगा में समा जाएगा। हमने अपने घरों के सभी लोगों को बाहर निकालकर सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया। वहीं घर की कीमती सामान को निकालकर सड़क पर निकालकर रखने लगे। हालांकि सुबह तीन बजे से कटाव बंद हो गया। बावजूद मन में भय समाया हुआ है कि कभी भी हमारा घर कटाव में बह सकता है। हमने अपने घर के सारे सामान बांध लिए हैं।
सबौ सीओ दिव्या कुमारी जब कटाव स्थल पर पहुंचीं तो मौत के मुंह से बाल-बाल बचे एक ही परिवार के सभी लोग फफक पड़े। बोले, पहले हमलोगों की खेती योग्य भूमि कटाव में समा गई। अब घर भी समा गया। घर में उपयोग करने वाले सभी सामान भी पानी में बह गए। लोगों के सामने संकट की स्थिति उत्पन्न हो गई है। रहने से लेकर खाने-पीने तक की समस्या हो गई है। बच्चों की पढ़ाई-लिखाई तो प्रभावित हुआ ही है। सीओ ने आश्वासन देते हुए कहा जहां तक संभव होगा, लोगों को सरकारी सहायता दिलायी जाएगी।
सबौर इंग्लिश गांव के एक दर्जन से अधिक घर जो गंगा कटाव की जद में हैं, वह खाली कर रहे हैं। फरका पंचायत के मुखिया राजेंद्र प्रसाद मंडल एवं ग्रामीण सतीश कुमार ने कहा कि राधे शाह एवं सरवन शाह के घर के अलावा शंकर शाह, प्रकाश शाह, छोटू तांती, प्रमोद तांती, कुलदीप तांती, विशाल तांती, तुला तांती, अवधेश तांती, राजकुमार तांती, कुलदीप तांती, क्रांति तांती, भरत, संतोष, शंभू, छोटू सहित अन्य लोगों का भी घर गंगा कटाव में समा गया। इनलोगों के घर का पहले भी कुछ हिस्सा गंगा कटाव में कट चुका था और अपना-अपना घर सभी खाली कर दूसरे जगह रह रहे थे।
सबौर प्रखंड कार्यालय में अपने सात सदस्यीय परिवार के साथ आश्रय लेने वाले राधे ने बताया कि जिस समय यह हादसा हुआ, नदी की धारा काफी तेज थी। कटाव स्थल के पास पानी में तेज गति से भंवर बन गया था। घूम रहे पानी की धारा की चपेट में आकर नदी किनारे की जमीन तेजी से ढहती रही। ग्रामीणों ने बताया कि 2022 में भी इस जगह पर भीषण कटाव हुआ था। उस समय कई घर गंगा में समा गए थे।
इंग्लिश में गंगा कटाव की जानकारी मिलते ही फ्लड फाइटिंग की टीम मौके पर पहुंची और युद्धस्तर पर गंगा कटाव बचावरोधी कार्य शुरू कर दिया। लगभग 200 मजदूर और छह नाव को इस कार्य में लगाया गया है। फ्लड फाइटिंग के कनीय अभियंता चंचल कुमार ने कहा कि गंगा कटाव स्थल पर युद्ध स्तर पर मजदूर को लगाकर बचाव कार्य की जा रही है। इंग्लिश गांव में गंगा कटाव स्थल पर गंगा की धारा गोल घूमते हुए कुछ दूर आगे बढ़कर बह रही है। ऐसा लग रहा है कि अंदर ही अंदर पानी मिट्टी का कटाव कर रहा है।
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