बिहार में कई ऐसे प्राचीन मंदिर हैं, जिनसे जुड़ी मान्यताएं और लोककथाएं आज भी लोगों को आकर्षित करती हैं। पटना से करीब 35 किलोमीटर पश्चिम दिशा में बिहटा के अमहरा, राघोपुर और कंचनपुर गांवों के संगम के पास स्थित मां वन देवी मंदिर भी ऐसा ही एक प्राचीन और रहस्यमयी धार्मिक स्थल है। इन दिनों यह मंदिर बॉलीवुड फिल्म ‘द वन’ को लेकर चर्चा में है। हाल ही में फिल्म की निर्माता एकता कपूर और निर्देशक दीपक मिश्रा ने मां वन देवी मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की, चुनरी चढ़ाई और देवी का आशीर्वाद लिया। बताया जा रहा है कि इसी वन देवी के नाम पर फिल्म की कहानी तैयार की गई है। फिल्म 25 सितंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। फिल्म में बिहार के महापर्व छठ पूजा को भी दिखाया गया है। दिलचस्प बात यह है कि इस मंदिर से जुड़ी लोककथा अब बॉलीवुड तक पहुंच गई है। सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया की आने वाली फिल्म ‘द व्वान: फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट’ की कहानी का आधार भी इसी वन देवी मंदिर से जुड़ी कथा को बताया जा रहा है। फिल्म निर्माताओं के मुताबिक, मंदिर और इसके आसपास प्रचलित किस्सों ने फिल्म की कहानी में अहम भूमिका निभाई है।
करीब 400 साल पुराना बताया जाता है मंदिर
स्थानीय लोगों के मुताबिक, मां वन देवी का यह मंदिर करीब 400 साल पुराना है। घने जंगल के बीच स्थित इस स्थान को मां वन देवी का धाम माना जाता है। यह कोई बहुत विशाल मंदिर नहीं है, जहां दूर से ही ऊंचे शिखर दिखाई दें। जंगल और ग्रामीण परिवेश के बीच मौजूद यह छोटा-सा धार्मिक स्थल अपनी पुरानी परंपराओं और इससे जुड़ी लोककथाओं के कारण खास पहचान रखता है।
विंध्यवासिनी से जुड़ा है मां वन देवी का संबंध
स्थानीय लोककथाओं में मां वन देवी का संबंध विंध्याचल की मां विंध्यवासिनी से जोड़ा जाता है। मान्यता के मुताबिक, राघोपुर निवासी विद्यानंद मिश्रा नाम के एक भक्त विंध्याचल जाकर देवी की श्रद्धापूर्वक पूजा किया करते थे। उम्र बढ़ने के साथ उनके लिए इतनी लंबी यात्रा करना मुश्किल होने लगा। कहा जाता है कि एक दिन देवी ने उन्हें सपने में दर्शन दिए और अपने पवित्र पिंड का एक अंश उनके निवास स्थान पर ले जाने को कहा। इसके बाद विद्यानंद मिश्रा देवी के आदेश के अनुसार पवित्र पिंड लेकर आए और उसे अपने गांव के पास स्थित जंगल में स्थापित कर दिया। उस समय यहां कोई भव्य मंदिर नहीं था। एक झोपड़ी के अंदर पिंड स्थापित कर पूजा की जाती थी। चूंकि यह स्थान जंगल के बीच था, इसलिए देवी को ‘वन देवी’ यानी जंगल की देवी कहा जाने लगा। मंदिर में वन देवी के साथ भैरव बाबा भी पिंड रूप में विराजमान हैं।
सूर्यास्त के बाद जंगल में जाने की मनाही क्यों?
मां वन देवी मंदिर से जुड़ी सबसे दिलचस्प मान्यता इस जंगल को लेकर है। स्थानीय लोककथाओं के अनुसार, पुराने समय में इस जंगल में कुछ रहस्यमयी घटनाएं हुआ करती थीं। इन घटनाओं के कारण आसपास रहने वाले लोग परेशान रहते थे। इसी वजह से सूर्यास्त के बाद लोगों को जंगल की ओर जाने से रोकने की परंपरा शुरू हुई। आज भी मंदिर से जुड़ी लोककथाओं में इस मान्यता का जिक्र मिलता है। हालांकि, इन कथित रहस्यमयी घटनाओं के संबंध में कोई वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। इसलिए इसे स्थानीय मान्यता और लोककथा के तौर पर ही देखा जाता है।
यहां मूर्ति नहीं, पिंड रूप में होती है देवी की पूजा
मां वन देवी मंदिर की सबसे खास बात यहां की पूजा पद्धति है। यहां देवी की पूजा किसी पारंपरिक प्रतिमा के रूप में नहीं होती, बल्कि पवित्र पत्थर के पिंड स्वरूप की पूजा की जाती है। स्थानीय आस्था में वन देवी को जंगल की रक्षक देवी माना जाता है। आसपास रहने वाले लोगों के बीच पीढ़ियों से यह विश्वास चला आ रहा है कि देवी जंगल और यहां रहने वाले लोगों की रक्षा करती हैं। मंदिर की यही अलग पहचान इसे दूसरे सामान्य मंदिरों से अलग बनाती है।
पटना से करीब 35 किलोमीटर दूर है मंदिर
मां वन देवी मंदिर पटना से करीब 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां बस या ट्रेन से भी पहुंचा जा सकता है। मंदिर के लिए नजदीकी रेलवे स्टेशन बिहटा रेलवे स्टेशन बताया जाता है। स्टेशन से स्थानीय साधनों के जरिए मंदिर तक पहुंचा जा सकता है।
अधिकारी भी रखते हैं आस्था
मां वन देवी के दर्शन के लिए कई अधिकारी भी पहुंच चुके हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, कई आईएएस और आईपीएस अधिकारियों ने यहां पूजा-अर्चना की है। पूर्व आईपीएस अधिकारी मनु महाराज की भी इस मंदिर में आस्था होने की बात कही जाती है और वे यहां पूजा कर चुके हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, पूर्व राष्ट्रपति तक मां वन देवी का प्रसाद पहुंचाया गया है। इस तरह स्थानीय आस्था, पुरानी लोककथाओं और अब बॉलीवुड से जुड़ने के कारण बिहटा का मां वन देवी मंदिर एक बार फिर चर्चा में है।
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