खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रामगंगा और बहगुल नदियां तटीय गांव कसारी में उपजाऊ जमीन काटती हुई अब तेजी से गांव की आबादी की तरफ बढ़ रही हैं। करीब एक हफ्ते से जारी भूमि के कटान से अब तक गांव के करीब 10-12 किसानों की करीब 150 बीघा जमीनें फसलों समेत कटकर नदियों में समा चुकी है। गत गुरुवार से नदी के जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि से गांव के लोग बेहद परेशान हैं।
जानवरों को फसल खिलाने को मजबूर किसान जिन किसानों के खेत नदियों के बिल्कुल पास कटान वाली स्थिति में पहुंच गए हैं, वह कड़ी मेहनत और काफी लागत लगाकर तैयार की गई फसलें काटकर जानवरों को खिलाने के लिए मजबूर हैं। हालांकि, नदियों के पानी का फैलाव बाहर नहीं होने से आसपास के अन्य गांव और वहां की फसलें अभी सुरक्षित हैं, लेकिन 20 दिन पहले नदी का रुख बदलने के बाद से कसारी गांव का क्षेत्र कटान की जद में आ गया है।
इनके खेत कटकर नदी में समाए बता दें कि बीते एक सप्ताह में गांव के विनोद का 10 बीघा पालेज फसल का खेत, रामलड़ैते का तिल की फसल सहित 8 बीघा और इसी फसल वाले राधे, रामभरोसे और दोदराम के क्रमश: 18, 10 व 15 बीघा खेत, छंगेलाल का बाजरा व उर्द की फसल सहित 8 बीघा, राजपाल का 10 और प्रदीप का बिना किसी फसल वाला 12 बीघा खेत कटकर नदी में समा चुका है।
कटान रोकने के नहीं हुए प्रयास इसी गांव के राजाराम, पातीराम और राजेश के साझेदारी का 18 बीघा खेत भी नदियों के कटान की भेंट चढ़ गया है। नदी का रुख भांपते हुए इन सभी ने पहले से ही खेत में फसल नहीं बोई थी। राजेश, रामभरोसे, राधे, प्रदीप आदि ग्रामीणों ने बताया कि कटान से बचे खेतों में खड़ी फसल जानवरों को चारे के रूप में खिला रहे हैं क्योंकि यह बची हुई जमीन भी एक-दो दिन में कट जाने के आसार हैं। ग्रामीणों के अनुसार पानी का स्तर अब भी धीरे-धीरे बढ़ रहा है, लेकिन कटान रोकने के लिए अब तक कोई प्रयास शुरू नहीं हुए हैं।
किसानों की बात दोनों नदियां अब तक गांव से काफी दूर दक्षिण में बहती थी। बरसात में दोनों नदियां एक होने पर उन्होंने अचानक अपना रुख गांव की तरफ मोड़ लिया है। हमारी करीब छह बीघा जमीन नदियों में कट गई है। -पातीराम हमने 15 बीघा जमीन बटाई पर लेकर उसमें बाजरा बोया था। फसल अच्छी हुई थी लेकिन उफनाई नदियों ने सब कुछ छीन लिया। पूरा खेत कटकर नदी में चला गया। जमीन के साथ हमारी लागत भी चली गई। -दोदराम मैं स्वंय कसारी गांव जाकर वहां की स्थिति का जायजा ले चुका हूं। कसारी में चार दिन पहले ही कटान रोकने के फौरी उपाय करने के लिए बाढ़ खंड के अभियंताओं को पत्र भेजा जा चुका है। -मधुसूदन गुप्ता, एसडीएम, जलालाबाद
गर्रा और खन्नौत में उफान बढ़ने से शहरी तटीय इलाकों पर मंडराया खतरा भारी बारिश और बैराजों से पानी की निकासी बढ़ने से यूपी के शाहजहांपुर जिले से होकर निकली गंगा और रामगंगा नदियां पहले से चढ़ी हुई हैं। अब गर्रा और खन्नौत नदियों में तेजी से उफान बढ़ने से शहर के दोनों तटीय इलाकों पर बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।
खतरे के निशान से गंगा 50 सेमी और रामगंगा 59 सेमी नीचे सिंचाई विभाग के बाढ़ नियंत्रण कक्ष को शुक्रवार सुबह मिली सूचनाओं के अनुसार कलान के भैंसार बांध पर गंगा 24 घंटे में 17 सेमी बढ़कर 143.15 मीटरगेज पर और रामगंगा चार सेमी बढ़कर 136.71 मीटरगेज पर पहुंच गई। बताया गया कि खतरे के निशान से अभी गंगा 50 सेमी और रामगंगा 59 सेमी नीचे बह रही है।
गर्रा में उफान शहर के पूर्वी छोर पर बह रही खन्नौत और पश्चिमी किनारे पर बह रही गर्रा में उफान बढ़ रहा है। शुक्रवार को सुबह तक गर्रा 147.40 मीटरगेज पर बह रही थी, लेकिन शाम को उसका जलस्तर 15 सेमी बढ़कर 147.55 मीटर गेज हो गया। इसी तरह सुबह खन्नौत का जलस्तर 143.80 मीटरगेज रहा, लेकिन शाम तक उसका जलस्तर 25 सेमी बढ़कर 144.05 मीटरगेज हो गया।
शहरी क्षेत्र बाढ़ से पूरी तरह सुरक्षित गर्रा और खन्नौत में दिनभर जलस्तर में वृद्धि जारी रहने से प्रशासन ने शहर के तटीय क्षेत्रों की निगरानी बढ़ा दी है। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता सुनील भास्कर ने शुक्रवार की शाम दोनों नदियों के तटीय इलाकों का दौरा करके अजीजगंज में गर्रा नदी पर बने बांध की स्थिति का जायजा लिया। अधिशासी अभियंता ने बताया कि अभी दोनों नदियों के करीबी शहरी क्षेत्र बाढ़ से पूरी तरह सुरक्षित हैं। उन्होंने बताया कि शुक्रवार शाम तक खतरे के निशान से गर्रा 1.15 मीटर और खन्नौत 1.70 मीटर गेज नीचे बह रही थी। उन्होंने बताया कि अजीजगंज का बांध पूरी तरह सुरक्षित है।
Comments ()
Be the first to share your perspective on this story!