आइची‑नागोया एशियन गेम्स 2026 में शुक्रवार (2 अक्टूबर) को भारतीय रेसलर सुजीत कलकल ने मेन्स फ्रीस्टाइल 65 किग्रा वर्ग के फाइनल में जबरदस्त वापसी कर ताजिकिस्तान के वर्ल्ड मेडलिस्ट अब्दुलमजीद कुडिएव को 10‑9 से मात दी और स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
मैच की शुरुआत में कुडिएव ने लगातार दबाव बनाया और सुजीत 2‑9 से पीछे रह गया। लेकिन सुजीत ने डिफेंस को मजबूत रखते हुए स्कोर कम करने की कोशिश की, धीरे‑धीरे अंक जुटाए और अंत में 2‑9 से 10‑9 तक का फर्क उलट कर जीत पक्की की।
इस जीत से पहले सुजीत ने क्वालिफायर में जापान के पेरिस ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट कोटारो कियूका को हराकर फाइनल में जगह बनाई थी। दोनों पहलवानों के बीच 3‑3 का बराबर स्कोर रहा, फिर बड़े स्कोरिंग मूव के आधार पर सुजीत को विजेता घोषित किया गया। पूर्व भारतीय पहलवान विनेश फोगाट ने सुजीत की डिफेंस की तारीफ की और कहा कि अन्य भारतीय पहलवान उनसे बहुत कुछ सीख सकते हैं।
सुजीत का जन्म 5 नवंबर 2002 को हरियाणा के भिवानी जिले के इमलोटा गांव में हुआ। उनके पिता दयानंद कलकल राष्ट्रीय स्तर पर कुश्ती कर चुके थे और उन्होंने ही बेटे को इस खेल की ओर प्रेरित किया। सुजीत ने अपने गांव के स्थानीय अखाड़े में सीमित सुविधाओं के बावजूद प्रशिक्षण शुरू किया और 2020 में सोनीपत जाकर बेहतर कोचिंग और अंतरराष्ट्रीय स्तर के पहलवानों के साथ अभ्यास करने का अवसर पाया।
2022 में सुजीत ने अंडर‑23 एशियन चैंपियनशिप में गोल्ड और अंडर‑20 एशियन चैंपियनशिप दोनों जीतें। उसी साल ट्यूनिस में सीनियर रैंकिंग सीरीज में भी स्वर्ण पदक जीतकर सीनियर स्तर पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। हालांकि 2022 के कॉमनवेल्थ गेम्स चयन ट्रायल में बजरंग पूनिया से 0‑4 से हार का सामना करना पड़ा, लेकिन यह setback उसके सफर को रोक नहीं सका।
2024 में 65 किग्रा वर्ग के चयन ट्रायल में जीत हासिल कर एशियन और वर्ल्ड ओलंपिक क्वालिफायर में जगह मिली, पर बिश्केक जाने के दौरान दुबई में खराब मौसम और फ्लाइट समस्याओं के कारण वह और दीपक पूनिया देर से पहुँचे और नियमों के कारण मुकाबले में नहीं उतर पाए। बाद में इस्तांबुल में वर्ल्ड क्वालिफायर में सेमीफ़ाइनल में हार और ब्रॉन्ज मेडल मुकाबले में 2‑2 के बराबर स्कोर पर हार के कारण पेरिस 2024 का टिकट नहीं मिल सका।
पेरिस की निराशा के बाद सुजीत ने 2025 में अंडर‑23 एशियन चैंपियनशिप में फिर से स्वर्ण जीतकर वापसी की। बुडापेस्ट रैंकिंग सीरीज में उन्होंने पेरिस ओलंपिक के ब्रॉन्ज मेडलिस्ट इस्लाम दुदायेव को 11‑0 से हराया और सीनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप में क्वार्टर‑फ़ाइनल तक पहुंचकर ईरान के रहमान अमूजाद से 6‑5 से हार का सामना किया।
2025 के अंत में अंडर‑23 वर्ल्ड चैंपियनशिप में 65 किग्रा वर्ग का गोल्ड जीतते हुए सुजीत ने उज्बेकिस्तान के उमिदजोन जलोलोव को तकनीकी श्रेष्ठता से हराया। 2026 की शुरुआत में जाग्रेब ओपन और तिराना में खिताब जीतने के बाद बिश्केक में एशियन रेसलिंग चैंपियनशिप के 65 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक हासिल कर सीनियर स्तर पर अपनी सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक जोड़ ली। इस जीत के साथ वह 65 किग्रा वर्ग में दुनिया के नंबर‑1 पहलवान भी घोषित हुए।
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