एआई अब स्वास्थ्य से जुड़े क्षेत्रों में भी तेजी से इस्तेमाल हो रहा है। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने एक ऐसा एआई मॉडल बनाया है, जो सोते समय शरीर से मिलने वाले अलग-अलग संकेतों का विश्लेषण करके भविष्य में होने वाली संभावित बीमारियों और मृत्यु के जोखिम का अनुमान लगा सकता है।आइए जानते हैं स्टैनफोर्ड के इस नए एफएम मॉडल और इसके हैरान कर देने वाले आंकड़ों के बारे में विस्तार से।
स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने एक नया और एडवांस एआई मॉडल स्लीप एफएम तैयार किया है। यह एआई मॉडल यूजर को सोते हुए देखकर एक ही रात में यह बता सकता है कि उसे भविष्य में कौन-सी बीमारियां हो सकती हैं और उसकी उम्र कितने वर्ष तक रहने की संभावना है। एजेंसी के अनुसार, इस एआई मॉडल के नतीजे काफी हैरान करने वाले हैं और इनकी सटीकता का स्तर 80 से 90 प्रतिशत तक पाया गया है।
स्लीप एफएम मॉडल नींद के दौरान शरीर में होने वाली गतिविधियों को बारीकी से समझने की कोशिश करता है। यह रातभर मिलने वाले मस्तिष्क, हृदय और सांसों से जुड़े संकेतों का विश्लेषण करता है।
मॉडल सोते समय मस्तिष्क की तरंगों, दिल की धड़कन, सांस लेने के तरीके और आंखों की हलचल जैसे संकेतों का अध्ययन करता है। इन संकेतों में मौजूद पैटर्न को समझकर यह भविष्य में संभावित स्वास्थ्य समस्याओं का अनुमान लगाता है।
शोध में बताए गए आंकड़ो के अनुसार, स्लीप एफएम मॉडल लक्षण दिखाई देने से पहले ही भविष्य में होने वाली करीब 130 तरह की बीमारियों के जोखिम का अनुमान लगा सकता है। इसका मकसद किसी बीमारी का तुरंत इलाज करना नहीं, बल्कि संभावित जोखिम को पहले पहचानने में मदद करना है। अगर किसी व्यक्ति में भविष्य में किसी बीमारी का जोखिम पहले पता चलता है, तो समय पर जांच और इलाज की दिशा में कदम उठाने में मदद मिल सकती है।
स्लीप एफएम मॉडल को बड़े स्तर के क्लिनिकल स्लीप डेटा पर प्रशिक्षित किया गया है। दिए गए विवरण के अनुसार, इसकी ट्रेनिंग 65 हजार लोगों के करीब छह लाख घंटे के क्लिनिकल स्लीप डेटा पर की गई। इतने बड़े डेटा सेट की मदद से एआई मॉडल को नींद के दौरान शरीर में दिखाई देने वाले अलग-अलग पैटर्न और भविष्य के स्वास्थ्य जोखिमों के बीच संबंध समझने में मदद मिली।
आमतौर पर भविष्य में किसी बीमारी के जोखिम का अनुमान लगाने के लिए उम्र, लिंग और बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) जैसे सामान्य कारकों का इस्तेमाल किया जाता है। दिए गए शोध विवरण के अनुसार, स्लीप एफएम इन जोखिम मॉडल्स की तुलना में भविष्य की बीमारियों का अनुमान लगाने में ज्यादा सटीक साबित हुआ है। इसकी एक और खासियत है कि यह सिर्फ व्यक्ति की सामान्य जानकारी पर निर्भर नहीं करता, बल्कि नींद के दौरान शरीर से मिलने वाले कई तरह के संकेतों का विश्लेषण करता है।
इस तरह के एआई मॉडल का सबसे बड़ा संभावित फायदा बीमारी के जोखिम को पहले पहचानना हो सकता है। अगर भविष्य में किसी बीमारी का खतरा समय रहते पता चल जाए, तो व्यक्ति और डॉक्टर समय पर जरूरी जांच और उपचार की दिशा में कदम उठा सकते हैं। इससे बीमारी के गंभीर होने से पहले उस पर ध्यान देने का मौका मिल सकता है। हालांकि, एआई का अनुमान मेडिकल जांच या डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।
स्लीप एफएम का मॉडल यह दिखाता है कि नींद के दौरान शरीर में होने वाले बदलावों में स्वास्थ्य से जुड़े महत्वपूर्ण संकेत छिपे हो सकते हैं। एआई इन्हीं संकेतों में मौजूद पैटर्न को समझकर भविष्य के संभावित स्वास्थ्य जोखिमों का अनुमान लगाने की कोशिश करता है।
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