अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के विकारुल मुल्क (वीएम) हॉल में गे-डेटिंग ऐप के जरिए हनीट्रैप करने वाले गिरोह के जाल में करीब 50 लोग आ चुके थे, जिनसे 10 लाख रुपये से अधिक रुपये वसूले जाने का अनुमान है। फिलहाल पुलिस को एक आरोपी शाहजिल के फोन से 12 वीडियो मिले हैं। एक और छात्र समेत चार आरोपी फरार हैं। माना जा रहा है कि उनके फोन में अन्य लोगों के वीडियो हो सकते हैं।
पुलिस पीड़ितों को चिह्नित करने के साथ आरोपियों की तलाश में जुटी है। उधर, शुक्रवार को गिरफ्तार किए गए बीबीए तृतीय वर्ष के छात्र शाहजिल को अदालत ने जमानत दे दी। मामले में सिविल लाइन क्षेत्र के एक इलाका निवासी एएमयू कर्मचारी ने मुकदमा दर्ज कराया था। इसमें कहा था कि 17 अगस्त की शाम को अज्ञात व्यक्ति ने उनके बेटे को दोस्तों से मिलने के बहाने वीएम हॉल के कमरे में बुलाया। वहां उसे बंधक बनाकर आपत्तिजनक वीडियो बनाई। उसकी जेब में रखे हुए 5600 रुपए भी छीन लिए और यौन उत्पीड़न किया।
वीडियो वायरल करने की धमकी देकर रुपये ले लिए। पुलिस ने जांच की तो पूरा गिरोह सामने आया। पुलिस ने शुक्रवार को बीबीए के छात्र पीलीभीत निवासी शाहजिल को गिरफ्तार किया। पता चला कि यह गिरोह गे डेटिंग ऐप पर जुड़े लोगों को निशाना बनाते थे। यहां कई प्रोफाइल बना रखी थीं, जिनके माध्यम से युवकों से दोस्ती करते थे। फिर मिलने के बहाने वीएम हॉल में बुलाते थे। वहां डरा-धमकाकर अश्लील वीडियो बना लेते थे। उस वीडियो को वायरल करने की धमकी देकर वसूली करते थे।
लगातार दो मुकदमे दर्ज होने के बाद एएमयू प्रशासन हरकत में आया है। प्रॉक्टर ने बताया है कि यह गिरोह न सिर्फ डेटिंग ऐप, बल्कि अन्य बहानों से भी लोगों को बुलाकर ब्लैकमेल करता था। इसमें ये भी सामने आया है कि गिरोह का एक सदस्य पीड़ित को किसी बहाने से लेकर आता था। कमरे में जाते ही सदस्य चला जाता था और तीन-चार लोग बाहर से आते थे। वो पीड़ित को देख चोर होने का शोर मचा देते और ब्लैकमेल करके रुपये लेते थे।
गिरोह का तरीका तय था। ऐप पर दोस्ती के बाद पीड़ित को मिलने के बहाने वीएम हॉल के एक कमरे में बुलाया जाता था। कमरे में पहले से मौजूद एक लड़का पीड़ित के आते ही आपत्तिजनक स्थिति में आ जाता था। ठीक उसी वक्त गिरोह के तीन-चार अन्य सदस्य बाहर से कमरे में घुसते थे और हंगामा करते हुए कहते थे कि हॉल में ये क्या हो रहा है। इसके बाद डरा-धमकाकर अश्लील वीडियो बना लिया जाता। वीडियो वायरल करने की धमकी देकर रुपये वसूले जाते थे।
पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरोह सिर्फ एक नहीं बल्कि दो ऐप- ग्राइंडर और माय बॉय के जरिए सक्रिय था। दोनों ही ऐप पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर युवकों से दोस्ती की जाती थी।
सीओ तृतीय, सर्वम सिंह ने कहा कि मामले में अब तक दो मुकदमे दर्ज हो चुके हैं। गिरोह में शामिल चार लोगों के नाम प्रकाश में आए हैं, जिनकी तलाश की जा रही है। साक्ष्य भी जुटाए जा रहे हैं। आरोपी के फोन से मिले वीडियो के आधार पर पीड़ितों को भी चिह्नित किया जा रहा है।
बन्नादेवी क्षेत्र के एक इलाका निवासी पीड़ित ने बन्नादेवी थाने में दूसरा मुकदमा दर्ज कराया है। इसमें कहा है कि चार सितंबर को शाम साढ़े पांच बजे वह पार्ट टाइम काम करके लौट रहा था, तभी ऐप के जरिए उसकी बात हुई और वह वीएम हॉल में पहुंचा। वहां मौजूद उवैश उर्फ भोला, मन्नान, जुनैद और शाहजिल ने उसे एक कमरे में ले जाकर मारपीट की और दो खातों से करीब 60 हजार रुपये ट्रांसफर करा लिए। साथ ही वीडियो बनाकर ब्लैकमेल किया गया। युवक ने मामले की शिकायत साइबर सेल में की थी।
शाहजिल को पुलिस ने न्यायालय में पेश करके 14 दिन की न्यायिक रिमांड मांगी थी। अदालत ने छात्र की गिरफ्तारी को अवैध करार देते हुए रिमांड के आवेदन को रद्द कर दिया। साथ ही उसे 25 हजार रुपये के व्यक्तिगत बंधपत्र पर विवेचना में सहयोग करने और साक्ष्यों से छेड़छाड़ न करने की शर्तों पर रिहा करने का आदेश दिया। इसमें कहा गया है कि घटना 17 अगस्त 2026 की थी, जबकि मुकदमा 25 दिन बाद बिना किसी स्पष्टीकरण के दर्ज कराया गया। केस डायरी का अवलोकन करने पर पता चला कि वादी का बेटा स्वेच्छा से मिलने गया था। इस आधार पर पुलिस द्वारा लगाई गई धारा नहीं बनती।
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