ग्रेटर नोएडा के यमुना एक्सप्रेसवे पर रात के करीब 11:15 बजे एक बस में आग लग गई, जिससे नौ यात्रियों की मौत और 20 से अधिक लोगों को बचाया गया। इस दुर्घटना ने एक गंभीर प्रश्न उठाया: ऐसी बस, जिस पर कई राज्यों के विभिन्न प्रमाणपत्र और 19 चालान थे, वह सड़क पर कैसे चलती रही?
ब्यौरा बताता है कि दुर्घटना वाली बस का मालिक मध्य प्रदेश के छतरपुर का निवासी है। बस का संचालन मध्य प्रदेश‑आधारित राज कल्पना ट्रैवल्स द्वारा किया जाता है, परंतु उसका रजिस्ट्रेशन बिहार के मधुबनी जिले के परिवहन विभाग में है। फिटनेस प्रमाणपत्र राजस्थान से, जबकि पॉल्यूशन प्रमाणपत्र हरियाणा ने जारी किया था। बस दिल्ली के कश्मीरी गेट से महोबा के बीच चलती थी और यमुना एक्सप्रेसवे के जेवर क्षेत्र में आग लगी। इस तरह बस की पूरी पृष्ठभूमि में मध्य प्रदेश, बिहार, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश का जुड़ाव उजागर हुआ।
जांच में सामने आया कि बस पर 1.75 लाख रुपये के 19 चालान थे। इनमें कम उम्र के चालक से चलाने, फ्यूल‑चेंज, रेट्रोफिटिंग नियमों और परमिट उल्लंघन के जुर्माने शामिल थे। जनवरी 2026 में कम उम्र के ड्राइवर को चलाने का चालान, और जून 2025 में फ्यूल‑चेंज व रेट्रोफिटिंग के उल्लंघन के कारण भी जुर्माना लगाया गया था। इन सभी उल्लंघनों के बावजूद बस को सड़क पर चलने की अनुमति क्यों मिली, यह सवाल बना हुआ है।
बस के इंजन से लगातार आवाज आने की शिकायत भी दर्ज थी। प्रारम्भिक रिपोर्ट में बताया गया कि एसी में शॉर्ट सर्किट या इंजन लुब्रिकेंट ऑयल में स्पार्क के कारण आग लगी। आग तेज़ी से फैल गई और धुएँ के कारण कई यात्रियों को बाहर निकलने में कठिनाई हुई।
फायर‑ब्रिगेड और पुलिस के त्वरित हस्तक्षेप से 20 से अधिक यात्रियों को बचाया गया, परन्तु नौ लोग धुएँ और आग में फँस कर मार गए। कुछ घायल यात्रियों को अस्पताल में भर्ती कराया गया।
ब्यौरा के अनुसार, सुनील कुमार नाम के एक यात्री ने घटना के बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि बस यमुना एक्सप्रेसवे के किलोमीटर 33 पर पहुंचते ही ड्राइवर की कैबिन से जलती हुई बदबू आने लगी, पर चालक ने इसे नजरअंदाज किया। बाद में अचानक तेज़ लपटें निकलीं, यात्रियों ने शोर मचा कर बस रोकने की कोशिश की, पर चालक और कंडक्टर ने यात्रियों को दबाव में रखकर रोकने से इनकार किया। यही कारण था कि आग का प्रकोप तेजी से फैला।
घटना के बाद चालक पवन और कंडक्टर योगेश को हिरासत में ले लिया गया। पुलिस ने दोनों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।
अब सवाल बस के मालिक की भी ओर बढ़ा है। 19 चालानों के बावजूद बस का संचालन जारी रहने के पीछे जिम्मेदारी किसकी होगी—केवल चालक‑कंडक्टर की, या मालिक की भी? जांच में यह स्पष्ट किया जाएगा कि मालिक ने इन उल्लंघनों को रोकने में कोई कदम उठाया या नहीं।
यह घटना नियम‑उल्लंघन पर केवल चालान काटने की प्रणाली की कमी को उजागर करती है। जब कई बार गंभीर उल्लंघन सामने आए हों, तो वाहन को रोकने की प्रक्रिया क्यों नहीं शुरू हुई, यह सवाल अब नीति निर्माताओं और नियामकों के सामने है।
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