...सोचिए, अगर आप किसी अनजान शहर के किसी कैफे या बस स्टॉप पर अकेले खड़े हों और अचानक कोई अजनबी मुस्कुराकर पूछे- 'और दोस्त, आज का दिन कैसा बीत रहा है?'
हमारे भारत में तो ऐसा नजारा बहुत आम है. वाराणसी की अड़ियों पर चाय की चुस्कियों के साथ अजनबियों का घंटों बतियाना, लखनऊ की तहजीब में मिलने वाला अपनापन या जयपुर की गलियों में किसी अजनबी को चाय के लिए न्योता देना- यह सब हमारी भारतीय संस्कृति की पहचान रही है लेकिन बड़े शहरों में या पश्चिमी देशों के समाजों में लोग अकेलेपन से जूझ रहे हैं. खासकर हाई-राइज बिल्डिंग्स की सोसाइटीज में, जहां हजारों परिवार एक-दूसरे के साथ तो रहते हैं लेकिन अधिकांश लोग अपने पड़ोसी परिवार को भी नहीं जानते.
हालांकि, दुनिया के कुछ शहर ऐसे भी हैं जिन्होंने अकेलेपन की समस्या को खुद तक पहुंचने ही नहीं दिया है. पर क्या आप यकीन करेंगे कि अजनबियों को अपनों की तरह गले लगाने वाली यह बेफिक्र गर्मजोशी किसी एशियाई देश में नहीं, बल्कि कड़कड़ाती ठंड और बर्फ से ढके स्वीडन में सबसे ज्यादा देखने को मिलती है? इस शहर का नाम है गॉथेनबर्ग. जिसे ठंडे मुल्क का सबसे 'गर्मजोश' शहर कहा जाता है.
यूरोप और नॉर्डिक देशों के लोगों को आमतौर पर थोड़ा शांत, गंभीर और अपनी दुनिया में मस्त रहने वाला माना जाता है. लेकिन गॉथेनबर्ग ने इस धारणा को पूरी तरह से झुठला दिया है. आप यहां के लोगों को बातूनी कह सकते हैं लेकिन यही स्वभाव इस शहर को अकेलेपन से जूझ रही बाकी दुनिया से अलग करती है. मिलनसार होने की इस आदत को ही इस शहर ने अपना कल्चर बना लिया है.
मशहूर ग्लोबल ट्रैवेल प्लेटफॉर्म द्वारा दुनिया भर के 39 प्रमुख शहरों के 12,000 से अधिक लोगों पर किए गए 'सोशल सिटी इंडेक्स' सर्वे में गॉथेनबर्ग को आधिकारिक तौर पर दुनिया का सबसे सामाजिक और बातूनी शहर चुना भी गया था. शोध के अनुसार, गॉथेनबर्ग के निवासी अपनी व्यक्तिगत व्यस्तताओं से ज्यादा सामाजिक मुलाकातों को तरजीह देते हैं. ठीक वैसे ही जैसे वाराणसी के घाटों पर बिना किसी औपचारिक रिश्ते के लोग एक-दूसरे के साथ बैठते हैं और सुख-दुख साझा करने लगते हैं. गॉथेनबर्ग में भी अजनबियों से बात करना और नए दोस्त बनाना दिनचर्या का अहम हिस्सा है.
गॉथेनबर्ग के लोगों के इतना बातूनी होने के पीछे एक बहुत बड़ी सांस्कृतिक वजह है, जिसे स्वीडिश भाषा में 'फिका' कहा जाता है. जैसे वाराणसी में 'अड़ी जमाना' यानी चाय की दुकान पर बैठकर दुनिया भर के मुद्दों पर चर्चा करना एक परंपरा है, ठीक उसी तरह स्वीडन में 'फिका' गपशप का एक पवित्र अनुष्ठान है. यहां के लोग दिन में कम से कम दो बार अपने काम से पूरी तरह ब्रेक लेते हैं. वे मोबाइल और लैपटॉप साइड में रखते हैं, कॉफी का मग उठाते हैं और पास बैठे अजनबियों के साथ खुलकर बातें करते हैं.
गॉथेनबर्ग का मशहूर हेगा कैफे स्ट्रीट इसका सबसे बड़ा उदाहरण है. यहां के ऐतिहासिक कैफे में दोपहर होते ही लोगों की भीड़ जमा हो जाती है और माहौल ठीक उसी तरह हंसी-ठहाकों से गूंजने लगता है, जैसे हमारे बनारस की गलियों में चाय के कुल्हड़ के साथ जमता है.
इस सोशल इंडेक्स में गॉथेनबर्ग ने दुनिया के कई नामचीन शहरों को पीछे छोड़ दिया था. लेकिन दुनिया के इन शहरों की भी अपनी अलग-अलग पहचान है. जैसे अमेरिका के न्यू ऑर्लीन्स को चैटिस्ट यानी अजनबियों से सबसे ज्यादा बातचीत शुरू करने का दर्जा मिला है. वहीं न्यू यॉर्क के लोग बाहर जाकर खाना खाने और लोगों से मिलने-जुलने में आगे रहते हैं. गॉथेनबर्ग की बात करें तो यहां के लोग अजनबियों से घुलने-मिलने में जरा भी झिझक नहीं दिखाते. इस वजह से इसे दुनिया के सबसे लिबरल शहरों में गिना जाता है. यहां के लोग बाहर जाकर मिलने और बात करने का कोई भी मौका हाथ से जाने नहीं देते.
आज के दौर में जहां ज्यादातर शहरों में लोग एक-दूसरे के बगल में बैठकर भी अपने Smartphone की स्क्रीन में खोए रहते हैं, वहीं गॉथेनबर्ग का माहौल किसी राहत जैसा लगता है. यहां लोग सोशल मीडिया का इस्तेमाल जरूर करते हैं, लेकिन सिर्फ इसलिए ताकि वे तय कर सकें कि शाम को किस पब या कैफे में मिलना है.
यहां नीली ट्राम में सफर करते समय या किसी पार्क की बेंच पर बैठते ही आपको अहसास हो जाएगा कि यहां कोई अकेला नहीं बैठता. बस एक हल्की-सी मुस्कान और हेलो ही काफी है, और देखते ही देखते एक नया रिश्ता और लंबी बातचीत का सिलसिला शुरू हो जाता है. यही कारण है कि दुनिया भर से आने वाले पर्यटकों के लिए गॉथेनबर्ग सिर्फ घूमने की जगह नहीं, बल्कि इंसानी रिश्तों की उस मिठास और गर्माहट को महसूस करने का एक खूबसूरत जरिया बन गया है, जो हमें हमारे अपने शहरों की याद दिलाता है.
Comments ()
Be the first to share your perspective on this story!