नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में इंवेस्ट करने वालों के लिए स्कीम चुनना अब पहले के मुकाबले आसान हो सकता है.पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) ने NPS की अलग-अलग स्कीम को कैटेगराइज करने और उनसे जुड़ी जानकारी दिखाने के लिए नया ढांचा लागू किया है.
इसके तहत इंवेस्टर्स को किसी स्कीम में इक्विटी यानी शेयरों में इंवेस्टमेंट की हिस्सेदारी, रिस्क, रिटर्न, फीस और बेंचमार्क जैसी जानकारी एक समान तरीके से दिखाई जाएगी. इसके अलावा 1 अक्टूबर 2026 से पॉइंट ऑफ प्रेजेंस (PoP) के जरिए नया NPS खाता खुलवाने पर हर परमानेंट रिटायरमेंट अकाउंट नंबर (PRAN) के लिए ₹200 का वन टाइम रजिस्ट्रेशन फीस लगेगा.
यह रकम एक साथ खाते से नहीं काटी जाएगी. केंद्रीय रिकॉर्ड रखने वाली एजेंसियां (CRA) हर तिमाही ₹50 के हिसाब से यूनिट रद्द करके इस फीस की वसूली करेंगी. खाता खुलने की प्रक्रिया पूरी होने वाली तिमाही के अगले महीने में यह रकम PoP को दी जाएगी.
5 कैटेगरी में बांटी जाएंगी स्कीम्स
PFRDA ने 28 अगस्त 2026 को जारी सर्कुलर में NPS स्कीम की नई कैटेगरी तय की हैं. नई व्यवस्था में मुख्य रूप से शेयरों में निवेश की हिस्सेदारी के आधार पर स्कीम को पांच कैटेगरी में रखा जाएगा.
इससे इंवेस्टर्स को स्कीम चुनने से पहले यह समझने में आसानी होगी कि उनका पैसा शेयर मार्केट में कितना लगाया जा सकता है और उसमें कितना रिस्क है.
एक स्कीम सिर्फ एक ही कैटेगरी में होगी
नई व्यवस्था में किसी स्कीम को दो कैटेगरी के बीच नहीं रखा जा सकेगा. उदाहरण के लिए, कोई स्कीम एक साथ कैटेगरी B और कैटेगरी C में शामिल नहीं हो सकती. उसे तय कैटेगरी में से किसी एक में ही रखा जाएगा. इससे अलग-अलग NPS स्कीम की तुलना करना भी आसान होगा.
एक तरीके से दिखेगी स्कीम की जानकारी
NPS प्लेटफॉर्म्स पर अब स्कीम की जानकारी एक तय क्रम में दिखानी होगी. इंवेस्टर्स पहले स्कीम टाइप और कैटेगरी देख सकेंगे और इसके बाद संबंधित पेंशन फंड की जानकारी हासिल कर सकेंगे. निवेशक इन बातों के आधार पर अलग-अलग स्कीम की तुलना कर सकेंगे...
असेट्स अंडर मैनेजमेंट
सिर्फ रिटर्न देखकर फैसला न करें इंवेस्ट
नए नियम का मकसद इंवेस्टर्स को स्कीम की पूरी तस्वीर दिखाना है. ज्यादा रिटर्न वाली स्कीम में जोखिम भी ज्यादा हो सकता है. इसलिए इंवेस्टर्स को केवल पिछले रिटर्न पर ध्यान देने के बजाय इक्विटी में निवेश, जोखिम और बेंचमार्क के मुकाबले प्रदर्शन भी देखना चाहिए.
मौजूदा NPS खाताधारकों पर क्या असर?
नई व्यवस्था का उद्देश्य मुख्य रूप से स्कीम के नाम, क्लासिफिकेशन और जानकारी दिखाने के तरीके को एक जैसा करना है. सरकारी क्षेत्र से जुड़े खातों पर ये नए क्लासिफिकेशन रूल लागू नहीं होंगे. अन्य मौजूदा NPS खाताधारकों के लिए स्कीम का नाम या कैटेगरी बदलने का मतलब यह नहीं है कि उन्हें अपने आप कोई नया निवेश फैसला लेना होगा. हालांकि, अगर उनकी स्कीम में बदलाव, रिस्ट्रक्चरिंग या मर्जर होता है, तो उन्हें इसकी जानकारी ध्यान से देखनी चाहिए.
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