बिहार में बाढ़ की तबाही के बीच, पूर्णिया के निर्दलीय सांसद पप्पू यादव रात के समय कटिहार जिले के कुरसेला प्रखंड पहुंचे। उन्होंने रेलवे स्टेशन के मालगोदाम में शरण ले रहे बाढ़ पीड़ितों से मिलना और मदद करना चाहा, जिससे उनके आसपास तुरंत भीड़ जमा हो गई।
सांसद ने सबसे पहले महिलाओं को जमीन पर एक लाइन में बैठने का निर्देश दिया। फिर वह स्वयं भीड़ में शामिल होकर सैकड़ों बाढ़ पीड़ित महिलाओं के पास पहुँचे और एक-एक करके 500 रुपये हाथ में दे कर आर्थिक सहायता प्रदान की।
जब वे वहाँ से निकलने लगे, तो बचे हुए पीड़ितों ने उन्हें रोक कर अतिरिक्त सहायता की गुहार लगाई। पप्पू यादव ने अपनी गाड़ी के गेट पर खड़े होकर भीड़ में आगे-पीछे चलते हुए रुपये बाँटते रहे, जिससे कई लोग उनके आसपास जमा हो गए। थोड़ी मशक्कत के बाद वह अपनी गाड़ी को आगे बढ़ा कर स्थल छोड़ आए।
वहां पहुंचकर उन्होंने नेताओं, पदाधिकारियों और ठेकेदारों पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि राज्य के खजाने में नेता‑पदाधिकारी और ठेकेदारों के लिए पर्याप्त धन है, जबकि गरीबों को अभी भी बाढ़ में मरना पड़ रहा है। उनका एकमात्र लक्ष्य बाढ़ पीड़ित और गरीब परिवारों तक अधिकतम मदद पहुँचाना है, जिसमें हर महिला को 500‑1000 रुपये और राशन की व्यवस्था शामिल है।
सांसद ने बताया कि बाढ़ के कारण बिहार के 19 जिलों में लगभग 56 लाख लोग प्रभावित हैं और इस समय कई विधायक अपने क्षेत्रों में नहीं दिख रहे हैं। उन्होंने कहा कि बाढ़ बचाव के लिए पिछले 40 साल में किए गए टेंडर और एंटी‑इरोशन कार्यों की सुप्रीम कोर्ट द्वारा जांच होनी चाहिए, क्योंकि खर्च किए गए धन का हिसाब नहीं दिख रहा है।
पप्पू यादव ने भागलपुर, मुंगेर, लखीसराय और कटिहार जैसे कई जिलों में बाढ़ राहत की कमी को उजागर किया। उन्होंने बताया कि भागलपुर में सात दिन से लोग भूखे हैं, सामुदायिक रसोई केवल एक घंटे के लिए खुलती है और बुनियादी सुविधाओं की पूरी कमी है। उन्होंने 62 ठेकेदारों को फ्लड‑फाइटिंग के काम में लूट के लिए आरोपित किया।
कटिहार के कुरसेला प्रखंड में चल रहे सामुदायिक किचन के बारे में भी सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि एक घंटे में 300 लोगों को भोजन कराना और 5,000 रुपये का बिल बनाना अस्वीकार्य है, जबकि आम जनता को भूख और कष्ट झेलना पड़ रहा है।
बाढ़ को अभी तक राष्ट्रीय आपदा घोषित न करने पर भी उन्होंने सवाल उठाया और कोसी त्रासदी के समय सरकार द्वारा आपदा घोषणा को याद दिलाते हुए वर्तमान सरकार की नीतियों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि इस सरकार के आने के बाद 1,363 बांध टूट चुके हैं और किसान व किसान वर्ग बर्बाद हो गया है।
सांसद ने फरक्का‑संघ, भीमनगर‑बैराज और बगहा‑बैराज जैसे मुद्दों को लेकर राज्य सरकार को जवाबदेह ठहराया, और कहा कि वर्तमान में सभी जनप्रतिनिधियों को बाढ़ प्रभावित इलाकों में जाकर सीधे मदद करनी चाहिए। उन्होंने आश्वासन दिया कि वह लगातार बाढ़‑ग्रस्त क्षेत्रों में पहुंचते रहेंगे और पीड़ित परिवारों तक राहत पहुँचाते रहेंगे।
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