बालजीवन मेडिसिन्स की ‘शक्ति तरंग’ दवा को लेकर हिन्दुस्तान ने जो सवाल उठाए थे, वे अब कार्रवाई की चौखट तक पहुंच गए हैं। आयुष विभाग की टीम ने शुक्रवार को सारसौल स्थित मैसर्स बालजीवन मेडिसिन्स प्रा.लि. पर छापामारी की। कंपनी में तैयार मिलीं दवाएं सीज कर दी गईं। यही नहीं, प्रोडक्शन और बिक्री पर तत्काल रोक लगाकर कंपनी मालिक को नोटिस दिया है। शक्ति तरंग कैप्सूल के दोनों प्रकार के नमूने जांच के लिए लखनऊ लैब भेजे गए हैं।
यह मामला इसलिए गंभीर है क्योंकि, विभागीय स्वीकृत सूची में ‘शक्ति तरंग कैप्सूल’ नाम से उत्पाद दर्ज है, जबकि कंपनी की वेबसाइट पर इसी नाम से जुड़े दो अलग उत्पाद ‘शक्ति तरंग विद मकरध्वज’ और ‘शक्ति तरंग विद शिलाजीत’ अलग-अलग नाम और कीमत के साथ प्रदर्शित किए गए हैं। ऐसे में सवाल सिर्फ नाम बदलने तक सीमित नहीं है। उत्पाद की स्वीकृति किस फॉर्मूलेशन के लिए है, पैक पर क्या जानकारी दी जा रही है और बाजार में किस नाम से दवा बेची जा रही है, इन सभी पहलुओं पर अब विभाग की नजर है। क्षेत्रीय आयुर्वेदिक अधिकारी डॉ. नरेंद्र कुमार के नेतृत्व में टीम ने फर्म के अभिलेखों, उत्पादों और निर्माण प्रक्रिया से संबंधित दस्तावेजों की जांच की। फर्म स्वामी सौरभ अग्रवाल भी मौके पर मौजूद रहे। निरीक्षण के बाद विभाग ने तैयार कैप्सूलों की बिक्री तत्काल न करने और नए कैप्सूल का निर्माण नहीं करने के निर्देश दिए। फर्म को नोटिस भी जारी किया गया है। विभाग ने ‘शक्ति तरंग विद मकरध्वज’ और ‘शक्ति तरंग विद शिलाजीत’ से संबंधित नमूने लिए हैं। इन्हें राजकीय विश्लेषक, आयुर्वेद एवं यूनानी औषधि निर्माणशाला, लखनऊ भेजा गया है। नमूनों की गुणवत्ता और उपलब्ध अभिलेखों की जांच के बाद रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। डॉ. नरेंद्र ने बताया कि कंपनी में तैयार माल सीज कर दिया गया है।
विभागीय रिकॉर्ड में फर्म को ‘शक्ति तरंग’ और ‘शक्ति तरंग गोल्ड’ कैप्सूल के निर्माण व बिक्री की अनुमति प्राप्त है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, अलग नाम और फॉर्मूलेशन के साथ प्रदर्शित उत्पादों के संबंध में आयुष विभाग, लखनऊ को रिपोर्ट भेजी जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई होगी।
-स्वीकृत सूची में दर्ज ‘शक्ति तरंग कैप्सूल’ और वेबसाइट पर प्रदर्शित ‘शक्ति तरंग विद मकरध्वज’ व ‘शक्ति तरंग विद शिलाजीत’ क्या एक ही फॉर्मूलेशन हैं?
-यदि फॉर्मूलेशन अलग है तो क्या दोनों उत्पादों की अलग-अलग स्वीकृति है?
-अलग नाम और कीमत के साथ बिक्री की अनुमति किस आधार पर मिली?
-पैकेजिंग और लेबल पर दर्ज दावे स्वीकृत मानकों के अनुरूप हैं या नहीं?
फर्जीवाड़ा सिर्फ दवाओं में नहीं हुआ, कंपनी के लाइसेंस को लेकर भी धोखाधड़ी के आरोप हैं। मैसर्स बालजीवन मेडिसिन्स के फार्म 25-डी में वैद्य वेदराम सिंह का नाम दर्ज है। जबकि, उनकी पत्नी धनवंती ने वर्ष 2009 में कंपनी को लिखित रूप से पति के निधन की सूचना दे दी थी। पत्र में उन्होंने पति की ग्रेच्युटी और प्रोविडेंट फंड की राशि उपलब्ध कराने का अनुरोध भी किया था। जब कंपनी को 2009 में ही वेदराम सिंह की मृत्यु की जानकारी थी, तो 2023 में जारी/नवीनीकृत ड्रग लाइसेंस में उनका नाम किस आधार पर बना रहा? क्षेत्रीय अधिकारी डॉ. नरेंद्र कुमार ने बताया कि इस पूरे प्रकरण को लेकर आयुष निदेशक को पत्र भेजा गया है।
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