राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय पावरलिफ्टर अशोक मलिक ने चौथा स्थान हासिल किया, जो उन्हें पदक से वंचित कर दिया। यह घटना उन कई घटनाओं में से एक है जहां भारतीय एथलीटों ने विश्व स्तर पर पदक जीतने के लिए संघर्ष किया है, लेकिन उन्हें बहुत कम अंतर से हार का सामना करना पड़ा है।
अशोक मलिक ने पुरुषों के लाइटवेट पैरा पावरलिफ्टिंग इवेंट में एक व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया, लेकिन उन्हें चौथा स्थान मिला। यह घटना ग्लासगो में हुई, जहां अशोक ने अपने पहले प्रयास में 195 किग्रा और दूसरे प्रयास में 200 किग्रा का भार उठाया। हालांकि, उनका तीसरा प्रयास 205 किग्रा का भार उठाने में असफल रहा, जिससे उन्हें चौथा स्थान मिला।
इस घटना में इंग्लैंड के मार्क स्वान ने स्वर्ण पदक जीता, जबकि नाइजीरिया के रोलैंड एजुरुइके ने रजत पदक जीता। मलेशिया के बोनी बुन्यAU गुस्तिन ने कांस्य पदक जीता। भारत के दूसरे प्रतिभागी परमजीत कुमार ने सातवां स्थान हासिल किया।
अशोक मलिक का करियर बहुत संघर्षों से भरा हुआ है। उन्होंने 2018 में एशियाई पैरा गेम्स में एक गंभीर चोट का सामना किया था, जिससे उनकी बाजू की हड्डियां टूट गई थीं। लेकिन उन्होंने अपने प्रशिक्षकों की मदद से अपनी ताकत को फिर से बनाया और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वापसी की।
अशोक मलिक ने 2022 में एशिया-ओसेनिया चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता और 2022 में एशियाई पैरा गेम्स में कांस्य पदक जीता। उन्होंने 2024 में विश्व कप में रजत पदक जीता और पैरालंपिक खेलों में छठा स्थान हासिल किया। उन्होंने 2026 में एशिया-ओसेनिया चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता और राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय पैरा-स्पोर्ट्स टीम के एक प्रमुख सदस्य के रूप में भाग लिया।
Comments ()
No comments yet. Be the first to share your thoughts!