जंतर-मंतर पर जोरदार विरोध प्रदर्शन करने वाले रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन ने दावा किया कि सरकार उनकी मांगों पर एक केंद्रीय मंत्री के जरिए बातचीत के लिए तैयार हो गई है। रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन ने यह भी कहा कि एक केंद्रीय मंत्री आंदोलनकारियों से व्यक्तिगत रूप से बातचीत करेंगे। इस बीच यूपी के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने शनिवार को आंदोलन की अगुवाई कर रहे हर्ष दुबे समेत प्रतिनिधिमंडल के अन्य सदस्यों से बातचीत की। उन्होंने भरोसा दिया कि मांगों को अगले दो दिन में केंद्रीय नेतृत्व के समक्ष रखा जाएगा और केंद्रीय मंत्री के साथ उनकी बैठक भी कराई जाएगी।
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने लखनऊ में आंदोलनकारी हर्ष दुबे, मृत्युंजय पाठक और शिवा शर्मा समेत प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत में कहा कि आंदोलनकारियों की मांगों से संबंधित पत्र हमें मिला है। हमने वह पत्र केंद्रीय नेतृत्व को सौंप दिया है। केंद्रीय नेतृत्व का कहना है कि जंतर-मंतर पर धरना दे रहे हमारे युवा साथियों की मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने भरोसा दिया कि किसी भी स्थिति में देश के युवाओं और छात्रों का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा और सभी को साथ लेकर आगे बढ़ा जाएगा। दो दिन बाद केंद्रीय मंत्री के साथ इनकी बैठक होगी। हम इन्हें लेकर जाएंगे।
बता दें कि आरक्षण सुधार आंदोलन की अगुवाई कर रहे हर्ष दुबे ने लखनऊ में शनिवार को उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने अपनी मांगों का ज्ञापन डिप्टी सीएम को सौंपा। हर्ष दुबे ने कहा कि हमारा मानना है कि मौजूदा शिक्षा व्यवस्था में कुछ बच्चे मेरिट में ऊपर हैं जबकि कुछ बहुत नीचे। यह तब है जब सभी के लिए पढ़ाई का स्तर समान है।
हर्ष दुबे ने कहा कि आंदोलन का मकसद सभी छात्रों की बौद्धिक क्षमता का समान विकास सुनिश्चित करना है ताकि आगे व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में सभी को समान अवसर मिल सके। सबको नए मौके उपलब्ध कराने की जरूरत है जिससे किसी भी छात्र के साथ अन्याय ना हो और पूरे समाज का हित सुनिश्चित किया जा सके।
रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन जो कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की तर्ज पर चल रहा एक इंस्टाग्राम बेस्ड कैंपेन है। सीजेपी ने अपने फॉलोअर्स से शुक्रवार को जंतर-मंतर पर प्रोटेस्ट में शामिल होने की अपील की थी। इस विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोग जमा हुए थे। रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन पेज के इंस्टाग्राम पर लगभग 5.6 मिलियन फॉलोअर्स हैं।
रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन ने आगे लिखा- याद रखें, आंदोलन अभी खत्म नहीं हुआ है। उम्मीद है कि अजीत भारती, नेहा लालदास, ए. रंगनाथन और दूसरे लोग भी इस चर्चा में शामिल होंगे। वे अपने तर्कों और आंकड़ों के जरिए इन मुद्दों को और मजबूती से रख सकते हैं। बता दें कि शुक्रवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन के बैनर तले लोग जमा हुए थे। दिल्ली पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया था। क्या हैं प्रदर्शनकारियों की मांगें?
प्रदर्शनकारियों की दलील है कि सरकार मदद देने की प्रक्रिया में लाभार्थी के परिवार की आर्थिक हालात पर भी विचार किया जाना चाहिए। इसमें शिक्षा, कोचिंग, स्कॉलरशिप और दूसरे खर्चों के लिए मदद शामिल है। अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा से जुड़े एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि हमारी मांग है कि यह तय करते समय कि किसे सरकारी मदद की जरूरत है, आर्थिक हालात पर विचार किया जाना चाहिए। एक गरीब व्यक्ति को चाहे उसकी जाति कुछ भी हो शिक्षा, कोचिंग और दूसरी जरूरतों के लिए मदद दी जानी चाहिए। एक अन्य प्रदर्शनकारी ने कहा कि मदद उनको दी जानी चाहिए जिन्हें इसकी जरूरत है।
प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि आरक्षण व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की जानी चाहिए। आरक्षण का लाभ वंचितों तक नहीं पहुंच पाते हैं। एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि हम कई वर्षों से यह मुद्दा उठा रहे हैं। हमारा कहना है कि सरकार को यह देखना चाहिए कि क्या मौजूदा सिस्टम अपना मकसद पूरा कर रहा है? क्या फायदे जमीनी स्तर पर मिल रहे हैं। यूट्यूबर अजीत भारती ने भी कोटा के अंदर कोटा व्यवस्था की मांग की। उन्होंने क्रीमी-लेयर क्राइटेरिया लाने पर सरकार की स्थिति पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि आप इसे लागू क्यों नहीं करेंगे? यह बहुत अजीब है कि सरकार उन चंद दलित नेताओं के आगे झुक रही है जो केवल अपने जाति समूह की बात करते हैं।
अजीत भारती ने एक और मांग की कि सरकार आरक्षण सिस्टम और पिछले 8 दशकों में इसके असर की जांच के लिए एक श्वेत पत्र पब्लिश करे। उन्होंने बिहार में मुसहर समुदाय का उदाहरण देते हुए कहा कि कम राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिलने के कारण इस समूह को आरक्षण का पूरा फायदा नहीं मिला है। एक अन्य प्रदर्शनकारी ने कहा कि क्या दशकों पहले शुरू किया गया आरक्षण आज के सामाजिक और आर्थिक हालात को ठीक कर रहा है। बीते कुछ दशकों में हालात बदल गए हैं। इस पर बातचीत होनी चाहिए कि क्या मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा की जरूरत है।
आंदोलनकारियों ने एक बड़ी मांग यह की कि बड़े इंस्टिट्यूट समेत हायर एजुकेशनल इंस्टिट्यूट में एडमिशन के लिए न्यूनतम मार्क्स की सीमा होनी चाहिए। अजीत भारती ने कहा कि आप मेरिट से समझौता करके एक विकसित भारत का सपना नहीं बेच सकते हैं। यदि 50 फीसदी काबिल युवाओं या पढ़ने वाले लड़के-लड़कियों को IITs, IIMs या हायर एजुकेशन में एडमिशन नहीं मिलेगा तो आपकी एफिशिएंसी वहीं 50 फीसदी कम हो जाएगी।
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