रूस‑यूक्रेन संघर्ष में ड्रोन तकनीक तेज़ी से बदल रही है। रूसी सेना ने पुराने प्रोपेलर वाले गेरान ड्रोन को जेट‑इंजन से सशक्त कर नया वर्जन तैयार किया है, जिसे अब गेरान‑4 और गेरान‑5 कहा जाता है। ये ड्रोन पारंपरिक मिसाइलों की तरह कार्य कर रहे हैं।
तकनीकी तौर पर इनकी अधिकतम गति 600 km/h तक पहुँचती है, 90 kg तक का वॉरहेड ले जा सकती है और लगभग 1,000 km की रेंज रखती है। थर्मल कैमरा, AI‑आधारित गाइडेंस सिस्टम और जाम‑रोधी लिंक की मदद से ये लक्ष्य की पहचान रात में या खराब मौसम में भी कर लेते हैं और इलेक्ट्रॉनिक जॉमिंग से बचते हैं।
इन उन्नत फीचर्स के कारण यूक्रेन की वायु रक्षा प्रणाली अब इन ड्रोन को केवल 60 % ही इंटरसेप्ट कर पा रही है, जबकि पहले के प्रोपेलर वर्जन के खिलाफ इंटरसेप्शन रेट 90‑95 % तक था। तेज़ गति और स्मार्ट नेविगेशन ने एंटी‑ड्रोन सिस्टम को लक्ष्य पर पहुँचने से पहले प्रतिक्रिया देने का समय काफी घटा दिया है।
गेरान ड्रोन मूल रूप से ईरान के शाहेद मॉडल से प्रेरित थे, लेकिन रूसी इंजीनियरों ने जेट इंजन, AI गाइडेंस और उन्नत सेंसर जोड़कर उन्हें पूरी तरह नया रूप दिया है। अब ये ड्रोन क्रूज‑मिसाइल की गति से उड़ते हैं, जिससे एंटी‑ड्रोन रडार और मैन्युअल ट्रैकिंग दोनों ही कठिन हो गए हैं।
रूस इन ड्रोन का उत्पादन हर महीने हजारों इकाइयों में कर रहा है। कई प्रमुख घटकों के लिए चीन से सप्लाई ली जा रही है, जिससे लागत कम रहती है और उत्पादन लाइन चलती रहती है। इस किफ़ायती लेकिन प्रभावी हथियार ने महंगी मिसाइलों का विकल्प पेश कर दिया है।
उन्नत गेरान ड्रोन ने यूक्रेन की वायु रक्षा पर गहरा असर डाला है। पहले प्रोपेलर ड्रोन को मोबाइल एंटी‑एयरक्राफ्ट गन, मशीन‑गन या छोटे मिसाइल सिस्टम से आसानी से गिराया जा सकता था, पर अब तेज़ जेट‑पावर्ड वर्जन के कारण इंटरसेप्शन रेट घट गया है। परिणामस्वरूप अधिक ड्रोन लक्ष्य तक पहुँच रहे हैं, जिससे ऊर्जा सुविधाओं, इन्फ्रास्ट्रक्चर और सैन्य ठिकानों को खतरा बढ़ गया है। यूक्रेन को अब तेज़ इंटरसेप्टर या उन्नत मिसाइल सिस्टम विकसित करने की जरूरत है, लेकिन पश्चिमी देशों से मिलने वाले एंटी‑ड्रोन सिस्टम भी इन नए खतरों के लिए पूरी तरह तैयार नहीं हैं।
यह बदलाव केवल यूक्रेन तक सीमित नहीं है। कम लागत पर मिसाइल जैसी क्षमताओं वाले ड्रोन युद्ध की प्रकृति बदल रहे हैं। रूस बड़े पैमाने पर उत्पादन कर बड़े हमले कर सकता है, जबकि यूक्रेन को महंगे इंटरसेप्टर पर भारी खर्च करना पड़ रहा है, जिससे आर्थिक दबाव भी बढ़ रहा है। ईरान भी इन अपग्रेडेड ड्रोन में रुचि दिखा रहा है, जिससे मध्य‑पूर्व में ड्रोन युद्ध और जटिल हो सकता है।
उत्पादन और सप्लाई चेन की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। प्रतिबंधों के बावजूद रूसी कारखाने चीन‑निर्मित पार्ट्स का उपयोग करके लागत घटा रहे हैं और निरंतर उत्पादन जारी रख रहे हैं। इस कारण यूक्रेन और उसके सहयोगियों को हर महीने हजारों नए ड्रोन का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उनकी जवाबी कार्रवाई की क्षमता पर अतिरिक्त दबाव बन रहा है।
कुल मिलाकर, जेट‑पावर्ड गेरान ड्रोन ने हवाई युद्ध को नया मोड़ दे दिया है। तेज़ गति, लंबी रेंज, AI‑गाइडेंस और किफ़ायती उत्पादन का संयोजन यूक्रेन की वायु रक्षा पर भारी दबाव डाल रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य के संघर्षों में ऐसे सस्ते लेकिन घातक ड्रोन सामान्य हो जाएंगे, और पारंपरिक एंटी‑एयर सिस्टम को लेज़र वेपन, हाई‑स्पीड इंटरसेप्टर और उन्नत रडार जैसी नई तकनीकों के साथ पुनः डिज़ाइन करना पड़ेगा।
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