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बिहार के समस्तीपुर जिले के मुसरीघरारी थाना क्षेत्र के बखरी बुजुर्ग पंचायत के चर्चित पूर्व मुखिया सह मुखिया पति शशिनाथ झा हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने पटना हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें हत्या और आपराधिक षड्यंत्र के दोषी ठहराए गए पांच अभियुक्तों की सजा निलंबित कर उन्हें जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने पांचों दोषियों को दो सप्ताह के भीतर निचली अदालत के सामने आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है।
निचली अदालत ने पांच दोषियों को सुनाई थी उम्रकैद
मामले में समस्तीपुर की निचली अदालत ने अर्जुन दास उर्फ कारिया, निलेंद्र गिरि, हिमांशु राय, सुनील कुमार और सुमित कुमार उर्फ फुचुकिया को शशिनाथ झा की हत्या और आपराधिक षड्यंत्र का दोषी ठहराया था। अदालत ने सभी को आजीवन कारावास के साथ 10-10 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई थी। वहीं, सुनील कुमार को शस्त्र अधिनियम की धारा 27(3) के तहत भी अलग से आजीवन कारावास की सजा दी गई थी। निचली अदालत का फैसला 13 अगस्त 2024 को आया था। .ads-row{display:flex;gap:10px;flex-wrap:wrap;}
48 घंटे की देरी को हाईकोर्ट ने माना था अहम
पटना हाईकोर्ट ने दोषियों को जमानत देते समय प्राथमिकी दर्ज कराने में हुई करीब 48 घंटे की देरी समेत कुछ अन्य परिस्थितियों को महत्वपूर्ण माना था। हाईकोर्ट में यह दलील भी दी गई थी कि शिकायतकर्ता और मृतक की पत्नी माधुरी देवी उस समय पंचायत की मुखिया थीं और मामले में राजनीतिक रंजिश की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने इन आधारों को दोषियों को जमानत देने के लिए पर्याप्त नहीं माना। शीर्ष अदालत ने कहा कि केवल एफआईआर दर्ज कराने में देरी या शिकायतकर्ता के निर्वाचित मुखिया होने जैसे तथ्यों के आधार पर निचली अदालत के विस्तृत और तर्कसंगत निष्कर्षों पर संदेह नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने गवाहों के बयान, आरोपियों के आपसी संबंध और अपराध में इस्तेमाल सामग्री की बरामदगी से जुड़े निचली अदालत के विश्लेषण में ऐसी कोई गंभीर खामी नहीं पाई, जिसके आधार पर दोषसिद्धि के बाद सजा को निलंबित किया जाता।
पत्नी माधुरी देवी ने दर्ज कराई थी एफआईआर
पूर्व मुखिया शशिनाथ झा की हत्या के बाद उनकी पत्नी माधुरी देवी ने मुसरीघरारी थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। उस समय वह बखरी बुजुर्ग पंचायत की मुखिया थीं। एफआईआर में चार लोगों को नामजद करते हुए अन्य अज्ञात आरोपियों पर पति की हत्या का आरोप लगाया गया था। मामले की सुनवाई के दौरान निचली अदालत ने आरोपियों को दोषी करार दिया। इसके बाद पटना हाईकोर्ट ने आपराधिक अपील लंबित रहने के दौरान पांच दोषियों की सजा स्थगित कर उन्हें जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया था। माधुरी देवी और बिहार सरकार ने हाईकोर्ट के इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। माधुरी देवी की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दलील दी गई कि शशिनाथ झा की हत्या बेहद निर्मम तरीके से की गई थी। निचली अदालत ने गवाहों के बयान, परिस्थितिजन्य साक्ष्यों और बरामदगी समेत मामले के सभी पहलुओं की विस्तार से जांच करने के बाद दोषसिद्धि की थी। सुप्रीम कोर्ट ने इन दलीलों को महत्वपूर्ण माना और कहा कि केवल प्राथमिकी दर्ज कराने में देरी जैसे आधारों पर निचली अदालत के विस्तृत फैसले को दरकिनार नहीं किया जा सकता।
पंचायत से लौटते समय बरसाई गई थीं गोलियां
6 अगस्त 2021 की सुबह मुसरीघरारी थाना क्षेत्र के बखरी बुजुर्ग गांव में पूर्व मुखिया शशिनाथ झा की कई गोलियां मारकर हत्या कर दी गई थी। बताया गया कि वह गांव में जमीन विवाद को लेकर पंचायत करने गए थे। पंचायत खत्म होने के बाद लौटते समय हथियारबंद अपराधियों ने उन पर गोलियां चला दीं। गंभीर रूप से घायल शशिनाथ झा को इलाज के लिए ले जाया गया, लेकिन उनकी मौत हो गई। वह बखरी बुजुर्ग पंचायत के दो बार मुखिया रह चुके थे। हत्या के समय उनकी पत्नी माधुरी देवी पंचायत की मुखिया थीं। घटना के बाद आक्रोशित समर्थकों और ग्रामीणों ने सड़क जाम कर उग्र प्रदर्शन किया था।
पुलिस जांच में सामने आया था चुनावी रंजिश का एंगल
पुलिस जांच के दौरान हत्या के पीछे आगामी पंचायत और नगर निकाय चुनाव से जुड़ी राजनीतिक रंजिश का एंगल भी सामने आया था। पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार करने के साथ हत्या में इस्तेमाल पिस्टल और दो बाइक बरामद की थीं। पुलिस के अनुसार, हत्या की योजना पहले से बनाई गई थी और कई लोगों ने मिलकर वारदात को अंजाम दिया था। मृतक की पत्नी और तत्कालीन मुखिया माधुरी देवी के बयान पर दर्ज एफआईआर में चार नामजद और कई अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया था।
अब पांचों दोषियों को दो हफ्ते में करना होगा सरेंडर
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पांचों दोषियों को दो सप्ताह के भीतर ट्रायल कोर्ट में आत्मसमर्पण करना होगा। सरेंडर के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में लिया जाएगा। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने दोषियों को अपनी लंबित अपील की जल्द सुनवाई और निस्तारण के लिए हाईकोर्ट का रुख करने की स्वतंत्रता दी है। शीर्ष अदालत ने यह भी साफ किया कि सजा निलंबन और जमानत से जुड़े उसके आदेश में की गई टिप्पणियों को मूल आपराधिक अपील के अंतिम निस्तारण के दौरान मामले के गुण-दोष पर अंतिम राय नहीं माना जाएगा। यानी शशिनाथ झा की हत्या के बाद उनकी पत्नी माधुरी देवी ने जिस मामले में न्याय की लड़ाई शुरू की थी, उसमें पटना हाईकोर्ट से मिली पांच दोषियों की राहत अब सुप्रीम कोर्ट ने पलट दी है। चार साल पुराने इस हत्याकांड में पांच दोषियों को अब दो सप्ताह के भीतर फिर से जेल लौटना होगा।
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