CEC ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों की भागीदारी वाली बैठक के बाद चुनाव आयोग ने प्रेस रिलीज जारी कर यह स्पष्ट किया कि पश्चिम बंगाल, बिहार और अन्य राज्यों में SIR (स्टेज्ड इम्प्लीमेंटेशन रूटीन) से जुड़े सभी निर्णय सर्वसम्मति से लिये गये थे।
हाल ही में एक अंग्रेजी दैनिक ने बताया था कि कई राज्यों में SIR के फैसलों पर दो चुनाव आयुक्तों ने CEC के फैसले पर असहमति जताई थी, जिससे विपक्ष ने CEC को निशाना बनाया। आयोग ने कहा कि इस तरह की कोई असहमति नहीं रही और सभी निर्णय पारदर्शी रूप से लिये गये।
आयोग के अनुसार, SIR से जुड़ा पहला आदेश 24 जून 2025 को जारी किया गया, जिसकी शुरुआत बिहार से हुई। इसके बाद पश्चिम बंगाल और अन्य राज्य‑केंद्र शासित प्रदेशों के लिए क्रमशः आदेश जारी किए गये। इन सभी आदेशों को एक ही बैठक में सर्वसम्मति से मंजूरी मिली।
सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई 2026 को अपने आदेश में SIR को वैध माना, जिससे आयोग के निर्णय को और मजबूती मिली।
सर्वसम्मति से तैयार किए गये शेड्यूल की दो प्रमुख तिथियाँ हैं: 12 राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों के लिए 27 अक्टूबर 2025 और 19 राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों के लिए 14 मई 2026। मतदाता सूची की अंतिम पुष्टि तीसरे चरण के शेष 12 राज्यों में सूची के अंतिम प्रकाशन के बाद होगी।
आयोग ने बताया कि सीनियर डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर की अध्यक्षता वाली एक समिति, जिसमें IIT/IIIT से एक स्वतंत्र विशेषज्ञ भी शामिल होगा, ECINET की समीक्षा करेगी। यह समिति यह जांचेगी कि सिस्टम मौजूदा कानूनों व नियमों के अनुरूप है या नहीं, और फिर अपनी रिपोर्ट आयोग को सौंपेगी।
पिछले कुछ महीनों में राज्य के CEOs से मिले इनपुट के आधार पर पोर्टल में कई अपग्रेड किए गये हैं। आवश्यकता पड़ने पर फील्ड अधिकारियों को अतिरिक्त सुविधाएँ प्रदान की जाएँगी। नई IT मॉड्यूल और पोर्टल से जुड़ी योजनाओं की मंजूरी से पहले अधिकारी समिति (COO) में चर्चा होगी।
राजनीतिक टिप्पणी के संदर्भ में, राहुल गांधी पर रविशंकर प्रसाद ने झूठे आरोप लगाने का आरोप लगाया। प्रसाद ने कहा कि 27 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने SIR प्रक्रिया को वैध माना और यह प्रक्रिया 24 जून 2025 को बिहार से शुरू हुई, फिर पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में लागू हुई। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस, TMC और CP(I)M ने SIR को चुनौती देने के बाद भी कोई ठोस परिणाम नहीं निकाला।
दिल्ली में दावे‑आपत्तियों की अंतिम तिथि 30 अक्टूबर 2026 कर दी गई, जबकि निपटारे की समय सीमा 30 नवंबर 2026 तय की गई। महाराष्ट्र में दावे‑आपत्तियों की अंतिम तिथि 12 अक्टूबर 2026 और निपटारे की सीमा 10 नवंबर 2026 कर दी गई।
इन घोषणाओं के बाद बीजेपी सांसद रविशंकर प्रसाद ने कहा कि चुनाव आयोग की बैठक में CEC और दोनों चुनाव आयुक्त मौजूद थे और सभी निर्णय सर्वसम्मति से लिये गये थे, जिससे असहमति के आरोप निराधार सिद्ध होते हैं।
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