समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पार्टी में तथाकथित 'परिवारवाद' को लेकर जारी बहसों के बीच एक बड़ा राजनीतिक बयान दिया है। उन्होंने कहा कि पार्टी में उनके परिवार के पांच सदस्यों का सांसद होना असल में संगठन के लिए एक बड़ा 'फायदा' है। इसी पारिवारिक मजबूती और आपसी भरोसे की वजह से समाजवादी पार्टी कभी दोफाड़ नहीं हुई।
न्यूज एजेंसी पीटीआई को दिए एक इंटरव्यू में अखिलेश यादव ने स्पष्ट किया कि कई अन्य राजनीतिक दलों की तरह सपा में टूट की नौबत इसलिए नहीं आई क्योंकि इसका नेतृत्व मजबूत पारिवारिक और वैचारिक जड़ों से जुड़ा हुआ है।
पार्टी के भीतर एकजुटता का गणित समझाते हुए सपा प्रमुख ने कहा कि संसद में परिवार के पांच सदस्यों की मौजूदगी के साथ-साथ कई वरिष्ठ मुस्लिम नेता और कड़े समाजवादी विचारधारा वाले सांसद एकजुट हैं।
उन्होंने कहा, "क्या आपने कभी सोचा कि पूरी पार्टी में कभी बड़ी टूट क्यों नहीं हुई? क्योंकि एक ही परिवार से पांच सांसद हैं। हमारे साथ कई समर्पित मुस्लिम नेता और पक्के समाजवादी भी हैं, इसलिए हमारी ताकत कम होने का सवाल ही नहीं उठता।"
गठबंधन के मुद्दे पर तमाम अटकलों को खारिज करते हुए अखिलेश यादव ने कहा, "समाजवादी पार्टी कभी अपने सहयोगियों का साथ नहीं छोड़ती। जब हम किसी के साथ आगे बढ़ने का फैसला करते हैं, तो उस वादे को पूरी ईमानदारी से निभाते हैं।"
अखिलेश यादव ने एक बार फिर दोहराया कि उनकी राजनीति का मुख्य आधार PDA (पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक) है। उन्होंने सत्ताधारी दल पर PDA के नारे को तोड़-मरोड़कर पेश करने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी का अंतिम लक्ष्य समाजवाद और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों पर आधारित सरकार बनाना है।
उन्होंने दावा किया कि विरोधी दल PDA की एकजुटता से घबराए हुए हैं। जनता जितनी परेशान होगी, PDA का जनाधार उतना ही मजबूत होता जाएगा।
त्योहारों के मौसम में बढ़ती महंगाई को लेकर अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब पेट्रोल, डीजल और दैनिक उपयोग की चीजें महंगी हो रही हैं, तो चीनी के दाम भी क्यों बढ़ाए जा रहे हैं?
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की नीति से बड़े उद्योगपतियों को फायदा पहुंचा रही है, जबकि आम उपभोक्ता महंगाई की मार झेल रहा है। "मुनाफा कमाने का यह पैसा आखिर किसकी जेब में जा रहा है?"
15 करोड़ राशन कार्डधारकों का जिक्र करते हुए उन्होंने पूछा कि अगर देश में प्रति व्यक्ति आय बढ़ रही है, तो मुफ्त राशन पर निर्भर इतने बड़े वर्ग की वास्तविक कमाई क्या है?
उत्तर प्रदेश की प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था पर चिंता जताते हुए सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि सरकारी स्कूलों को जानबूझकर कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकारी प्राथमिक स्कूलों में ज्यादातर गरीब और वंचित वर्गों के बच्चे पढ़ते हैं। अगर उनकी सरकार आती है, तो स्कूलों के इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाया जाएगा और बच्चों को पौष्टिक भोजन दिया जाएगा।
महिलाओं को आर्थिक मदद देने के वादे पर उन्होंने कहा कि सपा ने सबसे पहले सालाना 40,000 रुपए देने का ऐलान किया था, जिसकी नकल अब भाजपा कर रही है।
इंटरव्यू के आखिर में उन्होंने मीडिया की स्वतंत्रता पर बोलते हुए कहा कि आज के दौर में सच बोलना सबसे मुश्किल काम हो गया है। सच बोलने वालों को निशाना बनाया जा रहा है, लेकिन समाजवादी पार्टी सामाजिक न्याय और सिद्धांतों की लड़ाई जारी रखेगी।
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