तमिलनाडु के स्वास्थ्य मंत्री के.जी. अरुणराज ने सोमवार (17 अगस्त, 2026) को विधानसभा में महिला और बाल स्वास्थ्य से जुड़े कई अहम ऐलान किए। राज्य सरकार पहली बार 'पेरी-मेनोपॉज़ल केयर पॉलिसी' बनाएगी, जिसका मकसद पेरी-मेनोपॉज़ल उम्र की महिलाओं की शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य ज़रूरतों की जल्द पहचान करना है, साथ ही स्क्रीनिंग, काउंसलिंग और इलाज की सुविधा उपलब्ध कराना है।
गर्भवती महिलाओं के ब्लड प्रेशर (BP) की निगरानी के लिए ब्लूटूथ-सक्षम ब्लड प्रेशर मॉनिटर पेश किए जाएंगे, जिससे डेटा रीयल-टाइम में ट्रांसमिट होगा और समय पर इलाज संभव हो सकेगा। वहीं, 18 साल से कम उम्र के टाइप 1 डायबिटीज़ के बच्चों को सरकारी अस्पतालों में सालभर मुफ्त इंसुलिन दिया जाएगा, जिस पर 9.94 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
पहले चरण में 14 जिलों (कल्लाकुरिची, नीलगिरि, तिरुपत्तूर, धर्मपुरी, डिंडीगुल और नमक्कल सहित) की करीब 10,000 गर्भवती महिलाओं को ये BP डिवाइस दिए जाएंगे।
पेरी-मेनोपॉज़ल पॉलिसी के तहत सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) और शहरी PHC पर हर हफ्ते एक निश्चित दिन कैंप लगाए जाएंगे, जहां लक्षणों की जांच, बुनियादी टेस्ट, काउंसलिंग और ज़िला अस्पताल या सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में इलाज के लिए रेफरल किया जाएगा।
'इरुम्बु कन्नमणि' (स्कूल एनीमिया रोकथाम) कार्यक्रम 6.37 करोड़ रुपये की लागत से शुरू किया जाएगा। सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में कक्षा VI, IX और XI के करीब 16.5 लाख किशोरों का हीमोग्लोबिन टेस्ट किया जाएगा और उचित इलाज व निगरानी की जाएगी।
विभाग नवजात शिशुओं में दुर्लभ आनुवंशिक बीमारियों की स्क्रीनिंग भी शुरू करेगा। राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों में होने वाले करीब 4.5 लाख शिशुओं की हब-एंड-स्पोक मॉडल पर सात दुर्लभ आनुवंशिक बीमारियों (जन्मजात हाइपोथायरायडिज्म, जन्मजात अधिवृक्क हाइपरप्लासिया, गैलेक्टोसीमिया और बायोटिनिडेज़ की कमी सहित) की जांच की जाएगी।
बेहद कम वजन वाले नवजात शिशुओं के लिए 'नियो जेनेसिस यूनिट' 16.81 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित की जाएगी। चेन्नई के इंस्टीट्यूट ऑफ ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी और मदुरै, कोयंबटूर, तिरुनेलवेली, चेंगलपट्टू और तिरुचि के सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में गर्भाशय जैसा माहौल बनाया जाएगा।
ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर के लिए बच्चों की स्क्रीनिंग हेतु 'ऑटिज्म अर्ली डिटेक्शन प्रोग्राम' शुरू किया जाएगा। इसके लिए 12,456 विलेज हेल्थ नर्स और 5,000 डॉक्टरों को प्रशिक्षित किया जाएगा। स्कूलों में बचपन के मोटापे की रोकथाम कार्यक्रम शुरू किया जाएगा, जबकि पांच जिलों (कुड्डालोर, नागपट्टिनम, कांचीपुरम, कल्लाकुरिची और विरुधुनगर) में स्कूल ऑर्थोडोंटिक ट्रीटमेंट प्रोग्राम शुरू किया जाएगा, जिसमें 1,500 बच्चों को शामिल किया जाएगा, इस पर 1.80 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
नवजात शिशुओं की सुनने की क्षमता की जांच के लिए ओटोएकॉस्टिक एमिशन और साउंडप्रूफ रूम जैसी सुविधाएं स्थापित की जाएंगी। HIV/AIDS से प्रभावित या पीड़ित बच्चों के लिए मासिक वित्तीय सहायता बढ़ाई जाएगी और 1.21 करोड़ रुपये का अतिरिक्त फंड आवंटित किया जाएगा।
नवजात शिशुओं के लिए ट्रांसपोर्ट वेंटिलेटर, ह्यूमन मिल्क बैंकों के लिए आधुनिक उपकरण, मदर एंड न्यूबॉर्न केयर यूनिट, मध्यम एनीमिया से पीड़ित गर्भवती महिलाओं और गंभीर एनीमिया से पीड़ित किशोरियों को फेरिक कार्बोक्सीमाल्टोज़ इंजेक्शन देना, और मातृ एवं शिशु देखभाल बुनियादी ढांचे को मजबूत करना अन्य ऐलानों में शामिल हैं।
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