रायबरेली में एक पिता ने ही अपनी बेटी का सुहाग उजाड़ दिया। नसीराबाद थाना क्षेत्र के कुंवर मऊ गांव में पुराने जमीनी विवाद को लेकर हुए खूनी संघर्ष में ससुर ने परिजनों के साथ मिलकर दामाद पर चाकू से हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल दामाद की जिला अस्पताल ले जाते समय रास्ते में मौत हो गई। घटना के बाद मृतक पक्ष ने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाया है। दुर्गा सिंह निवासी वीरेंद्र कुमार सिंह का ससुर तेजबहादुर सिंह से गांव के बाहर स्थित लगभग 13 बिस्वा जमीन को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। गुरुवार सुबह तेज बहादुर उस जमीन पर निर्माण कार्य करवा रहे थे। सुबह करीब 8:30 बजे वीरेंद्र मौके पर पहुंचे और निर्माण कार्य रुकवाने को कहा। विवाद बढ़ने पर उन्होंने यूपी-112 पर सूचना दी। पुलिस मौके पर पहुंची लेकिन निर्माण कार्य नहीं रुका।
शाम करीब 4:30 बजे वीरेंद्र दोबारा निर्माण कार्य रुकवाने पहुंचे, जहां ससुर तेजबहादुर सिंह, सास रीता सिंह और मीरा सिंह से मारपीट हो गई। इस दौरान वीरेंद्र का सिर फट गया। परिजन उन्हें थाने लेकर पहुंचे, जहां पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ मारपीट का मुकदमा दर्ज कर मेडिकल कराया। इलाज के बाद वीरेंद्र घर लौट आए। रात करीब 10 बजे वीरेंद्र गांव के लल्लू, अंकित और अमरेश के साथ दोबारा पूरे बरवन गांव स्थित तेजबहादुर के ट्यूबवेल पर पहुंचे। वहां तेजबहादुर के न मिलने पर सभी लोग पूरे कनपुरियन पहुंचे, जहां निर्माण कार्य चल रहा था। इसी दौरान फिर दोनों पक्षों में विवाद और मारपीट शुरू हो गई। आरोप है कि इसी दौरान तेजबहादुर सिंह ने वीरेंद्र के पेट में कई बार चाकू से वार कर दिया। गंभीर रूप से घायल वीरेंद्र जान बचाने के लिए भागे लेकिन कुछ दूर जाकर गिर पड़े।
मौजूद लोगों ने गांव के महेंद्र कुमार सिंह को सूचना दी। मौके पर पहुंचे महेंद्र सिंह घायल वीरेंद्र को अपनी गाड़ी से सीएचसी नसीराबाद लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टर अंकित ने प्राथमिक उपचार के बाद हालत गंभीर होने पर जिला अस्पताल रेफर कर दिया। एंबुलेंस से जिला अस्पताल ले जाते समय रास्ते में वीरेंद्र सिंह की मौत हो गई। थाना प्रभारी पवन कुमार सोनकर ने बताया कि पहली मारपीट की तहरीर पर तीन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। बाद में दोबारा मारपीट की घटना हुई जिसमें वीरेंद्र की मौत हो गई। शव पोस्टमार्टम के लिए गया है रिपोर्ट आने के बाद मामले की जांच कर आगे की कार्रवाई की जाएगी
वीरेंद्र सिंह की मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। पत्नी नीतू सिंह और बेटे अभिजीत, अधीर तथा बेटी ऋषि का रो-रोकर बुरा हाल है। पत्नी नीतू बिलखते हुए बार-बार यही कह रही थी कि अब बच्चों का पालन-पोषण कैसे होगा।
मृतक के मामा विशंभर सिंह, ग्रामीण महेंद्र सिंह और पूर्व प्रधान बबलू सिंह ने आरोप लगाया कि शाम 4 बजे हुई पहली मारपीट के बाद अगर पुलिस आरोपियों को तत्काल हिरासत में ले लेती तो दोबारा विवाद नहीं होता और यह घटना टल सकती थी। ग्रामीणों ने पुलिस अधीक्षक से मामले में लापरवाह पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग की है।
बताया जा रहा है कि वीरेंद्र की पत्नी नीतू सिंह की नानी रामवती की तीन बेटियां थीं। वर्ष 2014 में रामवती ने अपनी कुछ जमीन नीतू के नाम बैनामा कर दी थी। बाद में नीतू का प्रेम विवाह वीरेंद्र सिंह से हो गया। वर्ष 2021 में वीरेंद्र ने उसी जमीन का कुछ हिस्सा बेच दिया, जिसकी जानकारी होने पर ससुर तेजबहादुर सिंह और नीतू की मौसी मीरा सिंह ने न्यायालय में आपत्ति दर्ज कराई। लेकिन 24 अप्रैल 2026 को तत्कालीन तहसीलदार ने आपत्ति खारिज करते हुए जमीन का मालिकाना हक वीरेंद्र के पक्ष में दे दिया। इसी जमीन पर निर्माण कार्य को लेकर विवाद बढ़ता गया और आखिरकार यह जमीनी विवाद वीरेंद्र सिंह की मौत की वजह बन गया।
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