राजस्थान के निकाय चुनाव में UGC द्वारा पेश किए जा रहे जाति‑आधारित नियमों को लेकर राजपूत समाज के एक हिस्से में तीव्र असंतोष दिखा। इस मुद्दे ने कई परंपरागत भाजपा गढ़ों में निर्दलीय उम्मीदवारों को समर्थन दिलाया, जिससे पार्टी को चुनावी परिणामों में अनपेक्षित दबाव का सामना करना पड़ा।
भाजपा ने चुनाव से पहले राजपूत वर्ग के बीच UGC के प्रस्ताव को लेकर विरोध प्रदर्शन देखे थे, लेकिन परिणामों में यह स्पष्ट हुआ कि अधिकांश नाराज़ वोटर कांग्रेस की ओर नहीं झुके। कई वार्डों में निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत हासिल की, जबकि कुछ स्थानों पर मतदाता NOTA को भी चुनते दिखे। इस कारण भाजपा को नुकसान हुआ, परंतु कांग्रेस ने भी इस अवसर का पूरा फायदा नहीं उठा पाई।
झालावाड़ में भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वसुंधरा राजे के प्रभाव वाले क्षेत्रों में कांग्रेस की जीत ने पार्टी को झटका दिया। वहीं, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के जोधपुर में मुकाबला बराबरी पर अटक गया, जहाँ निर्दलीय उम्मीदवारों की भूमिका निर्णायक रही। उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी के विद्याधर नगर में भाजपा का वार्ड शेयर 64.3% से घटकर 60% रह गया, जबकि लगभग 20% वार्ड निर्दलीयों के हाथ में चले गए।
उद्योग मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ के झोटवाड़ा क्षेत्र में भी भाजपा का वार्ड शेयर 63% से घटकर 53% हो गया, जहाँ 23% वार्डों में निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की।
राज्यभर में करणी सेना ने UGC के प्रस्ताव के खिलाफ आंदोलन जारी रखा है और इसे भाजपा के लिए "चेतावनी" कहा है। करणी सेना के अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना का कहना है कि यदि प्रस्ताव वापस नहीं लिया गया तो भाजपा को आगे और गंभीर राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि जयपुर में 21 ऐसे उम्मीदवारों को समर्थन दिया गया है जिन्होंने UGC के प्रस्ताव का विरोध लिखा है, और अन्य जिलों में भी कई निर्दलीय उम्मीदवारों को समर्थन मिला है।
भाजपा के परंपरागत गढ़ों में निर्दलीय उम्मीदवारों की बढ़ती भागीदारी के बावजूद कांग्रेस ने इस असंतोष को पूरी तरह अपने पक्ष में नहीं मोड़ा। कई क्षेत्रों में राजपूत वोटर ने कांग्रेस की बजाय निर्दलीय विकल्प को चुना, जिससे भाजपा की जीत में गिरावट आई।
राजस्थान में भाजपा के कई राजपूत नेताओं की तुलना में कांग्रेस के प्रताप सिंह खाचरियावास ने UGC के जाति‑आधारित प्रावधानों के विरोध में मुखर भूमिका निभाई। जयपुर के सिविल लाइंस में भाजपा‑कांग्रेस का मुकाबला बराबरी पर रहा, दोनों को लगभग आधे‑आधे वार्ड मिले, जबकि निर्दलीय उम्मीदवारों ने इस क्षेत्र में कोई जीत नहीं हासिल की।
निकाय चुनाव के बाद भाजपा के भीतर UGC मुद्दे को लेकर आवाजें तेज हो गई हैं। अब सवाल यह है कि यह स्थानीय स्तर पर निर्दलीय ताकत का उदय है या भाजपा के पारंपरिक वोट‑बैंक में उभरती असंतुष्टि का शुरुआती संकेत।
राजस्थान निकाय चुनाव में वोट प्रतिशत (वर्षानुसार)
2021: भाजपा – 35.11%, कांग्रेस – 40.30%, निर्दलीय – 24.59%
2026: भाजपा – 36.11%, कांग्रेस – 35.14%, निर्दलीय – 27.75%
भाजपा की बढ़त 1% रही, कांग्रेस 5.16% पीछे रही, जबकि निर्दलीय और NOTA की बढ़त 3.16% रही।
भाजपा ने इस मुद्दे पर डैमेज कंट्रोल शुरू कर दिया है। भीलवाड़ा में जैनमुनि पुलक सागर ने बताया कि उन्होंने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से इस मामले पर चर्चा की, जहाँ भागवत ने इसे लागू न करने का संकेत दिया। करणी सेना ने पंचायत चुनाव से पहले अपने आंदोलन को तेज करने की चेतावनी जारी की है, जबकि भाजपा पर UGC के जातीय नियमों को लेकर निर्णय लेने का दबाव बढ़ता जा रहा है।
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