उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के अंदर नेतृत्व में बदलाव की चर्चा तेज़ी से चल रही है। राज्य पार्टी प्रमुख अजय राय को हटाने की संभावना पर विचार किया जा रहा है।
कई बैठकों में यह तय किया गया है कि पार्टी के शीर्ष पद पर ब्राह्मण या OBC चेहरे को लाकर पारम्परिक वोट बैंक को फिर से आकर्षित किया जा सकता है।
रामपुर खास से विधायक और कांग्रेस विधायक दल की नेता आराधना मिश्रा इस दावेदारी में सबसे आगे हैं। वह वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी (राज्यसभा सांसद) की बेटी हैं और अपने पिता की राजनीतिक विरासत को संभाल रही हैं।
आराधना, जिन्हें “मोना” के नाम से भी जाना जाता है, तीन बार विधायक रह चुकी हैं और पिता के नौ बार रामपुर खास से विधायक रहने के बाद उन्होंने दिल्ली में राज्यसभा सदस्य का पद संभाला।
प्रतापगढ़ में तिवारी परिवार का 47 साल से दबदबा रहा है। दो दशकों से सक्रिय आराधना को प्रियंका गांधी वाड्रा की करीबी माना जाता है; उन्होंने ‘लड़की हूं, लड़ सकती हूं’ अभियान में प्रमुख भूमिका निभाई थी।
8 सितंबर को दिल्ली में राज्य प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम, प्रमोद तिवारी और आराधना मिश्रा के बीच हुई बैठक ने अटकलों को गरम कर दिया। बैठक का मुख्य मकसद तिवारी परिवार की स्थिति समझना था, परन्तु इसे नेतृत्व परिवर्तन की तैयारी भी माना जा रहा है।
स्रोतों के अनुसार कांग्रेस ब्राह्मण समुदाय तक पहुंचने की जरूरत को गंभीरता से देख रही है और शीर्ष पद पर ब्राह्मण चेहरे को लाना फायदेमंद समझा जा रहा है। राहुल गांधी राज्य इकाई की गतिविधियों पर नज़र रख रहे हैं और उन्होंने पहले दलित चेहरे को राज्य प्रभारी नियुक्त करने का फैसला किया था।
पार्टी का लक्ष्य ब्राह्मण‑दलित वोट बैंक को एकजुट करके योगी सरकार की ‘ब्राह्मण‑विरोधी’ छवि का फायदा उठाना है। अब सवाल यह है कि क्या यह कदम देर से नहीं आया और नई नियुक्त राज्य प्रभारी की तेज़ी का कारण क्या है।
अटकलें हैं कि राजेंद्र पाल गौतम और अजय राय के बीच तालमेल नहीं बन पाया है, जिससे नेतृत्व परिवर्तन में बाधा उत्पन्न हो सकती है। राज्य प्रभारी ने हाल ही में कहा कि मतभेदों की बातें बीजेपी की ओर से फैलाई जा रही हैं और उनका कोई आधार नहीं है।
अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। अजय राय, जो 2022 के चुनावों के बाद राज्य अध्यक्ष बने, को अभी तक विधानसभा चुनावों में अपनी कार्यक्षमता साबित करने का मौका नहीं मिला, इसलिए उनका हटना आसान नहीं हो सकता।
एक कार्यकर्ता ने कहा कि मौजूदा अध्यक्ष ने ही पार्टी को लोकसभा चुनाव में मोदी सरकार के खिलाफ लड़ाया है और चुनाव के समय उन्हें बदलना कठिन होगा। एक अन्य वरिष्ठ नेता ने कहा कि जल्द ही घोषणा हो सकती है, जिससे यूपी में कांग्रेस की स्थिति बदल सकती है।
अंतिम फैसला राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के हाथ में है, जबकि बीजेपी और सपा भी इस पर बारीकी से नज़र रख रही है।
Comments ()
Be the first to share your perspective on this story!