उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी (सपा) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने मिलकर चुनाव लड़ने का इरादा जताया है। सपा के प्रमुख अखिलेश यादव ने कई बार कहा है कि कांग्रेस के साथ गठबंधन ही उनका एकमात्र विकल्प है, और कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने भी इसे स्वीकार किया है।
बिहार राज्य में बसपा की अध्यक्ष मायावती ने कांग्रेस या सपा के साथ गठबंधन के किसी भी सम्भावना को खारिज कर दिया है, जबकि असदुद्दीन ओवैसी लगातार सपा के साथ सहयोग की गुहार लगा रहे हैं। आज़ाद समाज पार्टी (ADSP) के अध्यक्ष चंद्रशेखर आज़ाद ने भी गठबंधन के लिये दरवाज़ा खुला रखा है, पर अभी तक कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया है।
गठबंधन की बात तो चल रही है, पर सीट शेयरिंग का फॉर्मूला अभी तक तय नहीं हुआ। कांग्रेस का एक वर्ग मायावती या चंद्रशेखर आज़ाद की पार्टी के साथ गठबंधन की संभावना देख रहा है, जबकि कई रिपोर्ट्स के अनुसार राहुल गांधी ने अखिलेश यादव के साथ गठबंधन को तय कर लिया है, जिससे अन्य दलों के लिये अब दरवाज़ा बंद हो गया है।
कांग्रेस ने कहा है कि वह सपा के साथ ही गठबंधन में जाएगी, पर अपनी शर्तों पर। इस बार सपा यह तय नहीं करेगा कि कांग्रेस किन सीटों पर लड़ सकती है; बल्कि कांग्रेस खुद अपनी सीटें और उम्मीदवार तय करेगी। वहीं सपा ने कहा है कि यदि गठबंधन में कोई अड़चन आती है, तो वह सभी 403 सीटों पर अकेले लड़ने को तैयार है।
कांग्रेस के भीतर जल्दबाजी का माहौल है। पार्टी चाहते हैं कि सीट बंटवारे का फॉर्मूला जल्द से जल्द तय हो, ताकि चुनावी रणनीति को अंतिम रूप दिया जा सके। इमरान मसूद ने कहा है कि अक्टूबर तक गठबंधन में सीटों की संख्या और नाम तय कर लेना चाहिए, नहीं तो कांग्रेस की बार्गेनिंग पावर कमज़ोर पड़ जाएगी।
दूसरी ओर, सपा ने कहा है कि वह अपनी तैयारियों को पूरा करने के बाद ही सीट बंटवारे पर चर्चा करेगा। सपा का मानना है कि अगर गठबंधन में देर हुई तो कांग्रेस को अपनी बढ़त खोनी पड़ेगी।
दोनों पार्टियों को यह भी पता है कि अकेले 403 सीटों पर जीत हासिल करना उनके लिये संभव नहीं है। पश्चिमी यूपी में सपा कमजोर है, जबकि पूरे राज्य में कांग्रेस का संगठन न के बराबर है। इसलिए दोनों पार्टियां अपनी‑अपनी बार्गेनिंग पावर को मजबूत रखते हुए गठबंधन की मेज पर बैठना चाहती हैं।
इमरान मसूद का दावा है कि कांग्रेस ने 150 से अधिक सीटों की सूची सपा को सौंप दी है, पर सपा की ओर से अभी तक कोई पुष्टि नहीं मिली है। अखिलेश यादव ने कहा है कि उनके लिये सीटों की संख्या से ज्यादा जीत की गारंटी मायने रखती है, इसलिए वे उन जगहों पर ही लड़ेंगे जहाँ जीत की संभावना अधिक है।
वर्तमान में गठबंधन की अनौपचारिक बातचीत चल रही है, पर अभी तक कोई औपचारिक समझौता नहीं हुआ है। सपा और कांग्रेस दोनों ही अपनी‑अपनी कमजोरियों को समझते हुए, जल्द से जल्द सीट शेयरिंग को अंतिम रूप देने की कोशिश में हैं।
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