उत्तर प्रदेश में सपा और कांग्रेस 2027 के विधानसभा चुनाव में गठबंधन कर एक साथ लड़ने की योजना बना रहे हैं। अब दोनों दलों के बीच सीट शेयरिंग को लेकर गंभीर बातचीत चल रही है।
सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी के रायबरेली दौरे के दौरान सपा नेताओं ने यूपी में सीट बंटवारे पर चर्चा की, लेकिन सबसे बड़ा विवाद रायबरेली और अमेठी के विधानसभा क्षेत्रों को लेकर बना हुआ है।
कांग्रेस अपनी छह लोकसभा सीटों के तहत आने वाले विधानसभा क्षेत्रों में अधिक हिस्सेदारी चाहती है, जबकि सपा कम सीटें देने का प्रस्ताव रख रहा है। सपा ने कांग्रेस को कुल 86 विधानसभा सीटें (6 लोकसभा क्षेत्रों में 2‑2 और बाकी 74 क्षेत्रों में 1‑1) का ऑफर दिया है, पर कांग्रेस 105‑115 सीटों की माँग कर रही है। इस वजह से दोनों पक्षों के बीच 20‑30 सीटों का अंतर बना हुआ है।
सपा का फॉर्मूला इस प्रकार है: कांग्रेस की जीत वाली 6 लोकसभा सीटों के प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में दो‑दो सीटें देना, और बाकी 74 लोकसभा क्षेत्रों में एक‑एक सीट देना। इस गणना के अनुसार सपा कांग्रेस को 86 सीटें (74 + 12) प्रदान करने को तैयार है। कुल 80 लोकसभा सीटों में से 6 पर कांग्रेस के सांसद हैं।
दूसरी ओर, कांग्रेस 403 विधानसभा सीटों में से 100‑से‑अधिक सीटों पर चुनाव लड़ने की योजना बना रही है और अपनी माँग के अनुसार 105‑115 सीटें चाहती है, जिसमें बड़े जिलों की प्रमुख सीटें शामिल हैं।
रायबरेली‑अमेठी में असली टकराव दोनों दलों के पारंपरिक दावों की वजह से है। कांग्रेस इन दो जिलों की सीटें सपा को नहीं देना चाहती, जबकि सपा भी इन क्षेत्रों में अपनी जीत को नहीं छोड़ने को तैयार है। विशेषकर रायबरेली के ऊंचाहार और हरचंदपुर, तथा अमेठी के गौरीगंज और अमेठी सीटें सपा के लिये ‘पारंपरिक दुर्ग’ मानी जा रही हैं।
2022 के विधानसभा चुनाव में सपा ने रायबरेली में चार सीटें (ऊंचाहार, हरचंदपुर, बछरावां, सरेनी) और अमेठी में दो सीटें (गौरीगंज, अमेठी) जीती थीं, जबकि तिलोई, जगदीशपुर और अन्य दो सीटें भाजपा के पास गई थीं। सपा इन जीतों को किसी भी हालत में कांग्रेस को नहीं देना चाहती, जिससे टकराव गहरा हो रहा है।
रायबरेली‑अमेठी में सपा के कुछ विजयी विधायक बागी होकर भाजपा के करीब चले गए हैं, जिससे स्थिति और जटिल हो गई है। उदाहरण के तौर पर, ऊंचाहार के पूर्व विधायक मनोज पांडेय और हरचंदपुर के स्थानीय नेता राहुल लोधी को सपा फिर से जीतना चाहती है। अमेठी में गौरीगंज के बागी विधायक राकेश प्रताप सिंह तथा गायत्री प्रजापति परिवार का प्रभाव भी सपा के लिए महत्त्वपूर्ण है, इसलिए सपा इन सीटों को कांग्रेस को नहीं देना चाहती।
सूत्रों के अनुसार, दोनों दलों के बीच अंतिम समझौते में सीटों की संख्या में थोड़ा इजाफा हो सकता है, जिससे जल्द ही अंतिम रूप मिल सकता है। वर्तमान में सपा 80‑86 सीटें देने को तैयार है, जबकि कांग्रेस 105‑115 की माँग रखती है। यदि दोनों पक्ष समझौता कर लेते हैं, तो संभावित संख्या 90‑95 सीटों के आसपास आ सकती है। अब देखना बाकी है कि कौन सा फॉर्मूला अंतिम रूप लेगा।
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