सत्ताइस के समर की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है। राजनीतिक सरगर्मियां तेजी पकड़ रही हैं। क्या सत्ता और क्या विपक्ष, सभी राजनीतिक दल बीजेपी, सपा, बसपा और कांग्रेस तैयारियों में जुट गए हैं। भाजपा 'बूथ जीता-चुनाव जीता' के फार्मूले पर आगे बढ़ रही है। सपा सरकार बनने पर युवाओं और महिलाओं के लिए बड़े वादों से जनता को लुभाने में जुटी है। बसपा आकाश आनंद को आगे करके जेन-जी वोटरों को अपने पाले में करने में जुटी है। कांग्रेस भी चौपालों के बहाने जनता के बीच पहुंच रही है। सभी कोशिशों के परिणाम तो चुनाव के नतीजे ही बताएंगे। हालांकि, राजनीतिक दल समर से पहले कमर कसते जरूर दिख रहे हैं।
न केवल पार्टी बल्कि सरकार के मोर्चे पर भी वोटरों को साधने में जुटी है। पुराने लाभार्थी वोटबैंक को मजबूत करने के साथ ही इनका आकार भी बढ़ाया जा रहा है। 60 साल से ज्यादा उम्र की महिलाओं को फ्री बस यात्रा और 50 हजार मेधावी छात्राओं को स्कूटी देने की योजना इसी का हिस्सा है। मंडलवार यूपी का दौरा करने के बाद अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जिलेवार पूरे प्रदेश को मथने में जुटे हैं। विकास की तस्वीर सरकार पेश कर रही है जबकि संगठन सामाजिक समीकरण साधने में जुटा है। पीडीए की काट पर खास फोकस है। हालिया जेन-जी आंदोलन के बाद पार्टी ने अपनी रणनीति के केंद्र में युवाओं को रखा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन 17 सितम्बर पर होने वाले सेवा संकल्प अभियान में ज्यादातर गतिविधियां युवाओं को ध्यान में रखकर तय की गई हैं। सरकार ने युवा आयोग भी बनाने का ऐलान किया है।
सपा कार्यक्रमों से संगठन और वादों से वोटरों को साधने में जुटी है। सपा मुखिया अखिलेश यादव जिला, महानगर अध्यक्षों और पार्टी पदाधिकारियों के साथ बैठकों में राजनीतिक स्थितियों का जायजा ले रहे हैं। पार्टी बूथ स्तर पर सपा समर्थक मतदाताओं के नाम सूची से कटने से बचाने और कट गए नामों को जुड़वाने की कवायद में जुटी है। बड़े पैमाने पर सीटवार सर्वे करवाए जा रहे हैं। इसके अलावा महिला लाभार्थियों को साधने की गरज से सपा ने हर साल 40 हजार रुपये देने, समाजवादी पेंशन फिर शुरू करने, कन्या विद्याधन योजना लाने और यशभारती योजना फिर शुरू करने की घोषणाएं की हैं।
खराब राजनीतिक दौर से गुजर रही बसपा अपने कोर वोटरों को पाले में लाने के साथ ही सोशल इंजीनियरिंग से वोटबैंक का दायरा बढ़ाने की कवायद में जुटी है। बसपा प्रमुख मायावती भाजपा और अन्य राजनीतिक दलों के लुभावने वादों से अपने वोटरों को सचेत कर रही हैं। वहीं, आकाश आनंद को आगे करके पार्टी युवा तबके को साधने की कोशिश कर रही है। पार्टी की चिंता अपने कोर वोटरों में युवा वर्ग के छिटकने की है। रणनीति को धार देने के लिए पार्टी स्ट्रैटिजिक सर्वे भी करवा रही है। संभावित प्रत्याशियों के साथ भी बैठकें की जा रही हैं।
बीते एक साल में संगठन दुरुस्त करने के बाद अब कांग्रेस चुनावी राजनीति को धार देती दिख रही है। सपा के साथ गठबंधन करके चुनाव में उतरने की तैयारी में जुटी कांग्रेस राम मंदिर में चंदा चोरी के मसले पर चौपाल करके भाजपा को घेरने की कोशिश कर रही है। पेपर लीक और बेरोजगारी के मामलों से युवाओं को अपने पाले में लाने के प्रयास हो रहे। राहुल गांधी को केंद्र में रखकर पार्टी बड़े मुद्दों से राजनीति साधने में जुटी है।
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