भाजपा ने उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लक्ष्य बनाते हुए अपनी संगठनात्मक संरचना में बड़ा बदलाव किया है। पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन की ओर से घोषित नई टीम में विनोद तावड़े को राज्य प्रमुख बनाए रखने के साथ‑साथ चार सह‑प्रभारियों की नियुक्ति की गई।
विनोद तावड़े के साथ सह‑प्रभारियों में राष्ट्रीय सचिव जगदीश ईश्वर पटेल, महाराष्ट्र की पूर्व राज्यसभा सांसद डॉ. मेधा कुलकर्णी, झारखंड के दो पूर्व विधायक अनंत ओझा और राज्यसभा सांसद प्रदीप वर्मा शामिल हैं। इन सभी को अलग‑अलग सामाजिक‑सांस्कृतिक प्रोफ़ाइल और जमीनी अनुभव के आधार पर चुना गया है।
जगदीश ईश्वर पटेल गुजरात से हैं और गुजरात मॉडल के जमीनी कैडर एवं बूथ‑प्रबंधन में माहिर माने जाते हैं। वह कुर्मी (पाटीदार) समुदाय से हैं, जो OBC वर्ग में महत्वपूर्ण वोट‑बैंक बनाता है।
डॉ. मेधा कुलकर्णी महाराष्ट्र से आती हैं, ब्राह्मण वर्ग से हैं और महिलाओं एवं प्रबुद्ध वर्ग में मजबूत संगठनात्मक पकड़ रखती हैं। उनका उद्देश्य महिला मतदाता वर्ग को सीधे जोड़ना और कल्याणकारी योजनाओं की डिलीवरी पर नजर रखना है।
अनंत ओझा झारखंड के दो‑बार के विधायक और पूर्व महामंत्री हैं। वह युवा नेटवर्क और बूथ‑स्तर के काम को सुदृढ़ करने में विशेषज्ञ हैं।
प्रदीप वर्मा झारखंड के राज्यसभा सांसद और पूर्व प्रदेश महामंत्री हैं। वह जमीनी मोर्चेबंदी और अनुशासन में निपुण माने जाते हैं तथा सोनार जाति से हैं।
2024 के लोकसभा चुनाव में SP‑CPI के ‘PDA’ फॉर्मूले ने भाजपा के वोट‑बैंक को धक्का दिया था, जिससे यूपी में 80 में से 33 सीटों पर गिरावट आई। तावड़े की टीम का पहला काम इस कास्ट समीकरण को सुधारना और OBC के छिटके हुए वोटों को फिर से जोड़ना है।
नए टीम में तीन OBC और दो ब्राह्मण नेताओं को शामिल करके पार्टी ने OBC‑सवर्ण संतुलन बनाने की कोशिश की है। साथ ही मेधा कुलकर्णी के माध्यम से महिला मतदाता वर्ग को सीधे संबोधित किया जाएगा।
भाजपा ने उत्तर प्रदेश को छह संगठनात्मक क्षेत्रों—पश्चिम, ब्रज, कानपुर‑बुंदेलखंड, अवध, काशी और गोरखपुर—में बाँटा है। चार सह‑प्रभारियों को लगभग 100‑100 सीटों की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी, जिससे हर ज़ोन में माइक्रो‑मैनेजमेंट संभव हो सके।
यह रणनीति पहले सुनील बंसल‑अमित शाह के दौर में सफल रही थी, जहाँ गैर‑UP नेताओं को प्रमुख जिम्मेदारी देकर क्षेत्रीय गुटबाजी से बचा गया था। अब तावड़े की नई टीम केंद्र, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रदेश संगठन (पंकज चौधरी) के बीच समन्वय को मजबूत करेगी।
भाजपा के लिए 2027 में लगातार तीसरा बार यूपी की गद्दी पर काबिज होना सिर्फ राज्य जीत नहीं, बल्कि 2029 के राष्ट्रीय चुनावों के लिए एक मजबूत आधार बनाना है। तावड़े के साथ काम करने वाले ये चार सिपहसालार गुजरात‑महाराष्ट्र के कैडर अनुभव और झारखंड‑बिहार की जमीनी राजनीति को मिलाकर SP‑Congress गठबंधन को तोड़ने की कोशिश करेंगे।
विश्लेषकों का मानना है कि यह टीम ‘मिशन‑2027’ के लिये भाजपा की सबसे तीव्र और प्रभावी हथियार बन सकती है।
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