केंद्र सरकार और UPI संचालन समिति ने भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 के तहत नया MDR (Merchant Discount Rate) ढांचा घोषित किया है। इस नियम के अनुसार सभी P2P (Person‑to‑Person) लेनदेन पूरी तरह निःशुल्क रहेंगे और 2,000 ₹ तक के सामान्य व्यापारिक भुगतान पर भी कोई शुल्क नहीं लगेगा। परिणामस्वरूप लगभग 96 % P2M (Person‑to‑Merchant) लेनदेन अपरिवर्तित रहेंगे।
नए फ्रेमवर्क में 2,000 ₹ से अधिक के निर्दिष्ट व्यापारिक भुगतानों पर MDR 5 ₹ से 300 ₹ तक सीमित रहेगा। यह कदम UPI के संचालन, सुरक्षा और दीर्घकालिक विस्तार को सुदृढ़ करने के लिए उठाया गया है।
P2P लेनदेन पर जनता को अब कोई चार्ज नहीं देना होगा, चाहे राशि कितनी भी हो। कुल लेनदेन का 70 % हिस्सा P2P श्रेणी में आता है, इसलिए यह वर्ग पूरी तरह छूट वाला रहेगा। साथ ही, 2,000 ₹ तक के किसी भी P2M भुगतान पर भी ग्राहक से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।
छोटे व्यापारियों को अतिरिक्त लागत से बचाने के लिए शून्य‑MDR लागू रहेगा। P2PM (Person‑to‑Person‑Merchant) श्रेणी में QR कोड से महीने में 1 लाख ₹ तक लेनदेन करने वाले स्ट्रीट वेंडर और मोहल्ले की दुकानों से कोई चार्ज नहीं लिया जाएगा। इस कारण लगभग 96 % व्यापारिक लेनदेन सुरक्षित रहेंगे।
डेटा से पता चलता है कि MDR केवल लगभग 4 % व्यापारिक लेनदेन पर लागू होगा, जबकि बाकी 96 % या तो 2,000 ₹ की सीमा से नीचे हैं या शून्य‑MDR के तहत आते हैं। इस प्रकार नया ढांचा छोटे उद्यमियों की रक्षा करते हुए बड़े लेनदेन पर सीमित शुल्क रखता है।
2,000 ₹ से ऊपर के चयनित P2M लेनदेन पर 0.4 % का मामूली MDR लागू होगा, जिसे बैंकों, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स और UPI ऐप प्रदाताओं के बीच बाँटा जाएगा। 75,000 ₹ या उससे अधिक के लेनदेन पर MDR अधिकतम 300 ₹ प्रति लेनदेन तक सीमित रहेगा, जिससे बड़े व्यापारियों की लागत नियंत्रित रहेगी।
रेलवे, दूरसंचार, बीमा, ईंधन और कृषि जैसे कम मार्जिन वाले क्षेत्रों के लिए एकसमान दर तय की गई है। इन सेक्टरों में 2,000 ₹ से ऊपर के लेनदेन पर केवल 5 ₹ का फिक्स्ड MDR लगेगा, जिससे सार्वजनिक सेवाओं पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव नहीं पड़ेगा।
म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज, शेयर ब्रोकर और डीलर से जुड़े निवेश भुगतानों पर 0.02 % का अत्यधिक रियायती MDR लागू होगा, जो अधिकतम 300 ₹ प्रति लेनदेन तक सीमित रहेगा। इसका उद्देश्य खुदरा निवेशकों को डिजिटल निवेश का सस्ता विकल्प देना है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि MDR न तो कोई टैक्स है और न ही NPCI या सरकार द्वारा वसूला जाने वाला शुल्क। यह मर्चेंट पेमेंट सिस्टम के संचालन एवं विस्तार के लिए इकोसिस्टम के बीच बाँटा जाने वाला शुल्क है। बैंकों को निर्देश दिया गया है कि व्यापारी यह लागत ग्राहक पर न डालें और UPI ऐप कंपनियों पर प्लेटफ़ॉर्म फ़ीस या छिपे हुए चार्ज लगाने पर पूर्ण प्रतिबंध है।
नया फ्रेमवर्क यह सुनिश्चित करता है कि आम नागरिकों को पहले की तरह UPI का असीमित उपयोग मिलता रहे। इसमें कोई मासिक कोटा, मात्रा प्रतिबंध या मुफ्त लेनदेन की सीमा नहीं होगी। बैंकों और NPCI द्वारा निर्धारित 1 लाख‑5 लाख ₹ दैनिक लेनदेन सीमा केवल सुरक्षा व जोखिम प्रबंधन के लिए है, और इस पर कोई शुल्क नहीं लगाया जाएगा।
छोटे व्यापारियों को डिजिटल इकोसिस्टम में जोड़ने के लिए एक विशेष फंड स्थापित किया जाएगा। कुल MDR संग्रह का 5 % हिस्सा इस फंड में जाएगा, जिससे देश भर में UPI की स्वीकार्यता बढ़ेगी, ग्रामीण‑अर्धशहरी क्षेत्रों में भुगतान इन्फ्रास्ट्रक्चर का आधुनिकीकरण होगा और छोटे व्यवसायों को डिजिटल भुगतान तंत्र में शामिल किया जाएगा।
यह नया ढांचा वित्तीय स्थायी समिति की 32वीं रिपोर्ट की सिफारिशों के अनुरूप है, जिसमें एक व्यावहारिक राजस्व मॉडल की आवश्यकता बताई गई थी। बड़े लेनदेन से मिलने वाला राजस्व बैंकों और ऐप प्रदाताओं को ग्रामीण‑अर्धशहरी इलाकों में भुगतान इन्फ्रास्ट्रक्चर को सुदृढ़ करने में मदद करेगा, जिससे UPI का पूरा तंत्र दीर्घकालिक, सुरक्षित और तकनीकी रूप से सक्षम बना रहेगा।
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