UPI के 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर लागू होने वाले मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर केंद्र सरकार और कांग्रेस के बीच विवाद तेज हो गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस कदम को "UPI टैक्स" कहकर आलोचना की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अमेरिकी दबाव का आरोप लगाया।
सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि वित्त संबंधी स्थायी समिति ने UPI के लिए स्तरीय MDR और आय मॉडल तैयार करने पर ज़ोर दिया था और इसे बिना देरी अधिसूचित कर लागू करने की सलाह दी थी।
एक वरिष्ठ सरकारी सूत्र ने प्रश्न उठाया कि अगर समिति ने टिकाऊ आय व्यवस्था की जरूरत बताई थी तो राहुल गांधी अब इसका विरोध क्यों कर रहे हैं। अधिकारी के अनुसार, 12 अगस्त को जब समिति की रिपोर्ट को अपनाया गया, तब कांग्रेस के पाँच सांसद—पी. चिदंबरम, मनीष तिवारी, गौरव गोगोई, किशोरी लाल और के. गोपीनाथ—हाज़िर थे और उन्होंने कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई।
अब तक कांग्रेस की ओर से इस दावे पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
वित्त स्थायी समिति ने शून्य‑MDR मॉडल की दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता पर चिंता जताई थी। रिपोर्ट में कहा गया कि 2026‑27 के लिए लगभग 2,000 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान किया गया है, जबकि उद्योग की अनुमानित परिचालन लागत 20,700 करोड़ रुपये है। इस अंतर के कारण भुगतान सेवा प्रदाताओं को सरकारी सहायता पर अधिक निर्भर रहना पड़ सकता है, जिससे साइबर सुरक्षा, धोखाधड़ी रोकथाम और नेटवर्क बुनियादी ढांचे में निवेश पर असर पड़ सकता है।
समिति ने आत्मनिर्भर आय मॉडल की आवश्यकता पर बल दिया, विशेषकर छोटे व्यापारियों और कम‑मूल्य वाले UPI लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए। ग्रामीण और छोटे शहरों में डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहित करने हेतु ऐसी योजनाओं की जरूरत पर प्रकाश डाला गया।
नए शुल्क ढांचे के तहत 15 अक्टूबर 2026 से 2,000 रुपये से अधिक के पात्र कारोबारी लेनदेन पर 0.4% MDR लागू होगा, जो व्यापारी से लिया जाएगा। इस शुल्क की अधिकतम सीमा 300 रुपये रखी गई है, जबकि व्यक्ति‑से‑व्यक्ति लेनदेन पर यह शुल्क नहीं लगेगा।
छोटे व्यापारियों को राहत देने के लिए UPI QR के माध्यम से महीने में 1 लाख रुपये तक के लेनदेन को MDR से मुक्त किया गया है, और आवश्यक सेवाओं के लिए अलग दरें तय की गई हैं।
सरकार का कहना है कि यह शुल्क ग्राहक पर नहीं बल्कि भुगतान बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, साइबर सुरक्षा और नेटवर्क निवेश को स्थिर रखने के लिए है।
राहुल गांधी ने इस नई शुल्क संरचना को "UPI टैक्स" कहा और आरोप लगाया कि यह कदम भारत को अमेरिका के हितों के लिए मोड़ रहा है। उन्होंने इस निर्णय को वापस लेने की मांग की।
वहीं सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए बताया कि MDR का बोझ ग्राहक पर नहीं डाला गया है; इसका उद्देश्य UPI व्यवस्था के लिए एक दीर्घकालिक वित्तीय ढांचा तैयार करना है।
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