अमेरिका में पढ़ाई का सपना देख रहे भारतीय छात्रों के लिए बड़ी चिंता की खबर है। स्टूडेंट वीज़ा (F-1 वीज़ा) के लिए अपॉइंटमेंट और प्रोसेसिंग में हो रही भारी देरी के कारण कई छात्रों का फॉल सेमेस्टर (अगस्त-सितंबर में शुरू होने वाला अकादमिक सत्र) अधर में लटक गया है।
अमेरिकी दूतावास और वाणिज्य दूतावासों में वीज़ा स्लॉट की भारी कमी है, और कई मामलों में तो अपॉइंटमेंट की तारीखें ही सेमेस्टर शुरू होने के बाद मिल रही हैं। इससे उन छात्रों की परेशानी और बढ़ गई है जिन्होंने यूनिवर्सिटी में दाखिला तो पक्का कर लिया है, लेकिन वीज़ा न मिलने के कारण वे समय पर अमेरिका नहीं पहुंच पा रहे हैं।
क्या है पूरा मामला?
भारत में अमेरिकी वीज़ा की मांग पिछले कुछ सालों में काफी बढ़ी है, लेकिन दूतावास की क्षमता उस हिसाब से नहीं बढ़ पाई है। कोविड-19 महामारी के दौरान बैकलॉग जमा हो गया था, और उसके बाद से ही वीज़ा प्रोसेसिंग में देरी का सिलसिला जारी है। हालांकि, अमेरिकी सरकार ने कुछ राहत के उपाय भी किए हैं, जैसे कि कुछ श्रेणियों के लिए इंटरव्यू में छूट देना, लेकिन स्टूडेंट वीज़ा के लिए अभी भी इंटरव्यू अनिवार्य है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में स्टूडेंट वीज़ा के लिए औसत इंतज़ार की अवधि कई हफ्तों से लेकर कुछ महीनों तक हो सकती है, जो कि फॉल सेमेस्टर की समयसीमा से कहीं अधिक है। इसका सीधा असर उन छात्रों पर पड़ रहा है जिन्होंने प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटीज़ में दाखिला लिया है और उन्हें अपनी पढ़ाई शुरू करने के लिए समय पर अमेरिका पहुंचना ज़रूरी है।
छात्रों पर क्या असर?
वीज़ा में देरी का सबसे बड़ा असर यह हो रहा है कि छात्र या तो अपना सेमेस्टर डिफर करने को मजबूर हैं, या फिर ऑनलाइन क्लासेस से शुरुआत करनी पड़ रही है। कई यूनिवर्सिटीज़ ने तो यह नियम बना दिया है कि अगर छात्र समय पर वीज़ा नहीं ला पाते हैं, तो उनका एडमिशन अगले सेमेस्टर के लिए टाल दिया जाएगा।
वहीं, कुछ छात्रों को तो अपनी यूनिवर्सिटी बदलने तक की नौबत आ गई है, क्योंकि उन्हें ऐसी जगह दाखिला लेना पड़ा जहां वीज़ा प्रोसेसिंग जल्दी हो सके। यह स्थिति खासकर उन छात्रों के लिए और भी मुश्किल है जिन्होंने स्कॉलरशिप या फाइनेंशियल एड हासिल की है, क्योंकि उनकी स्कॉलरशिप की शर्तें भी समय पर पढ़ाई शुरू करने से जुड़ी होती हैं।
क्या कर सकते हैं छात्र?
विशेषज्ञों का कहना है कि छात्रों को चाहिए कि वे जल्द से जल्द वीज़ा अपॉइंटमेंट बुक करें और अपने दस्तावेज़ पूरे रखें। साथ ही, वे अपनी यूनिवर्सिटी के इंटरनेशनल स्टूडेंट ऑफिस से संपर्क करके लेट एनरोलमेंट या डिफरमेंट की संभावना तलाश सकते हैं। कुछ यूनिवर्सिटीज़ ऐसे छात्रों के लिए ऑनलाइन कोर्स शुरू करने की सुविधा भी दे रही हैं, ताकि उनकी पढ़ाई का नुकसान न हो।
इसके अलावा, छात्र अमेरिकी दूतावास में अपॉइंटमेंट के लिए एक्सपेडाइट (तत्काल) अपॉइंटमेंट का अनुरोध भी कर सकते हैं, लेकिन इसकी कोई गारंटी नहीं है। फिलहाल, यही सलाह दी जा रही है कि छात्र घबराएं नहीं, बल्कि अपने विकल्पों को समझें और अपनी यूनिवर्सिटी के साथ लगातार संपर्क में रहें।
अमेरिकी सरकार ने हालांकि कहा है कि वह स्टूडेंट वीज़ा प्रोसेसिंग को प्राथमिकता दे रही है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि स्लॉट की कमी और प्रोसेसिंग में देरी के कारण कई छात्रों का फॉल सेमेस्टर खतरे में है। ऐसे में, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले हफ्तों में अमेरिकी प्रशासन इस समस्या से निपटने के लिए कोई ठोस कदम उठाता है या नहीं।
Comments ()
Be the first to share your perspective on this story!