बॉक्स‑ऑफिस पर छोटे बजट की ‘हनुमान अंश’ ने उम्मीद से बेहतर कमाई की, जिससे कई निर्माताओं ने पौराणिक कहानियों की ओर रुख किया। इसी सिलसिले में इस हफ़्ते सिनेमाघरों में आई ‘महाकाव्य श्री रामायण कथा’।
नाम सुनते ही दर्शकों को रामायण की भव्यता और भावनात्मक गहराई की उम्मीद होती है, पर फिल्म देखने के बाद सवाल यही बचता है – क्या यह महाकाव्य वास्तव में बड़े स्क्रीन के लिए तैयार था?
कहानी अयोध्या से शुरू होती है, जहाँ शाश्वत नाम का छोटा बच्चा अपने परिवार के साथ मंदिर दर्शन के लिए आता है। वहीं उसे एक साधु मिलते हैं, जो उसे रामायण की कथा सुनाना शुरू करते हैं। आगे फिल्म में जय और विजय के दो जन्म दिखाए जाते हैं, जिन्हें श्राप के कारण रावण और कुंभकर्ण के रूप में पुनर्जन्म मिलता है। सीता का स्वयंवर, राम का वनवास, रावण के साथ युद्ध – ये सभी प्रमुख मोड़ दर्शकों को परिचित लगते हैं, पर प्रस्तुतिकरण में कमी स्पष्ट है।
देव शर्मा राम के किरदार में सादगी लाते हैं और कोशिश करते हैं कि भूमिका को ईमानदारी से निभाया जाए, पर कई बार उनकी अनावश्यक मुस्कुराहटें दर्शक को असहज कर देती हैं। रजनीश दुग्गल रावण में ठीक दिखते हैं, लेकिन स्क्रीन टाइम कम होने के कारण उनका प्रभाव सीमित रहता है। अंजलि अरोड़ा का डी‑ग्लैम सीता का रूप अलग है, फिर भी अभिनय में झिझक साफ़ दिखती है, जिससे किरदार में भरोसा टूट जाता है।
फिल्म की सबसे बड़ी समस्या तकनीकी पहलू में नज़र आती है। सिनेमैटोग्राफी और एडिटिंग ठीक‑ठाक हैं, पर VFX और ग्राफिक्स कई जगह फिल्म के मज़े को बर्बाद कर देते हैं। पौराणिक युद्ध, राक्षस और महलों को बड़े पर्दे पर शानदार दिखाने की उम्मीद के बावजूद, कई दृश्य ऐसे लगते हैं जैसे शुरुआती VFX प्रोजेक्ट से निकाले हों। ग्राफिक्स न सिर्फ कहानी की भव्यता घटाते हैं, बल्कि कभी‑कभी उसका मज़ाक भी बनाते हैं।
कॉस्ट्यूम कुछ हद तक प्रभावशाली हैं, पर मेकअप और प्रोस्थेटिक्स अक्सर किरदारों की गंभीरता को कम कर देते हैं।
निर्देशन की बात करें तो अभिषेक सिंह ने फिल्म को संभाला है, पर नई दृष्टिकोण या सरप्राइज़ की कमी स्पष्ट है। रामायण की विशाल कहानी को नए नजरिए से पेश करने के कई मौके थे, पर फिल्म वही पुराना रास्ता अपनाती है, जिससे दर्शक अक्सर स्क्रीन से ज्यादा एग्जिट गेट की ओर देखते हैं।
संगीत भी फिल्म को बचाने में नाकाम रहता है। कोई यादगार गाना नहीं है, न ही कोई हुक ट्रैक जो थिएटर से बाहर निकलते समय दिमाग में गूँज उठे। बैकग्राउंड स्कोर कुछ दृश्यों में माहौल बनाता है, पर वह भी फिल्म की कमजोरियों को छुपा नहीं सकता।
संक्षेप में, ‘महाकाव्य श्री रामायण कथा’ में कहानी तो बड़ी है, पर उसे बड़े स्क्रीन पर उतारने की तैयारी उतनी नहीं लगती। देव शर्मा का राम और रजनीश दुग्गल का रावण कुछ हद तक प्रभावशाली हैं, पर खराब VFX, औसत निर्देशन, फीका संगीत और कम प्रमोशन फिल्म को संभाल नहीं पाते। रामायण जैसी महाकाव्य कहानी के कई बेहतर विकल्प पहले से मौजूद हैं, इसलिए सिर्फ नाम देखकर इस फिल्म में बड़ी उम्मीदें रखना निराशा ही देगा।
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