लगभग 348 दिनों तक कारागार में रहने के बाद जब समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खां के बेटे अब्दुल्ला आजम जेल से रिहा होकर घर पहुंचे, तो यह राहत उनके लिए सुकून से ज्यादा इम्तिहान भरी साबित हुई। पिता के साथ लंबी कैद काटने के बाद घर की चौखट पर कदम रखने वाले अब्दुल्ला के सामने इस वक्त चौतरफा चुनौतियों का ऐसा चक्रव्यूह है, जिससे पार पाना उनके और समाजवादी पार्टी दोनों के लिए बड़ी परीक्षा बन गया है।
यह हैं चुनौतियां पिता की रिहाई के लिए कानूनी मोर्चेबंदी जेल से बाहर आने के बाद अब्दुल्ला के लिए सबसे बड़ी और पहली चुनौती अपने पिता आजम खां की मजबूत कानूनी पैरवी कर उन्हें बाहर लाना है। राहत की उम्मीद लेकर जेल से बाहर आए आजम खां को जैसे ही रिहाई मिली, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उन्हें तुरंत अपनी कस्टडी में ले लिया। अब्दुल्ला घर पहुंचने के कुछ ही घंटों बाद शनिवार की रात को ही गाजियाबाद के लिए रवाना हो गए, जहां ईडी उनके पिता से जुड़े मामलों की जांच और पेशी को लेकर सक्रिय है। पिता को कानूनी शिकंजे से सुरक्षित बाहर निकालना उनके सामने सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
विधानसभा चुनाव और सपा की सियासी उम्मीदें उत्तर प्रदेश में नजदीक आ रहे विधानसभा चुनावों के मद्देनजर समाजवादी पार्टी की निगाहें रामपुर और आजम खां के परिवार पर टिकी हैं। 22 अक्तूबर को ही सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने रामपुर पहुंचकर जेल में आजम खां से मुलाकात की थी और टिकटों व चुनावी रणनीतियों पर लंबी चर्चा की थी। जब तक आजम खां खुद पूरी तरह कानूनी लड़ाइयों से मुक्त होकर बाहर नहीं आते, तब तक पार्टी की सियासी अपेक्षाओं और रामपुर की राजनीतिक जमीन पर पकड़ बनाए रखने की पूरी जिम्मेदारी अब्दुल्ला आजम के कंधों पर आ गई है।
बिखरते समर्थकों को एकजुट रखना और चुनावी गणित रामपुर की राजनीति में कभी आजम खां के इर्द-गिर्द घूमने वाला मजबूत सियासी कुनबा आज बिखरता नजर आ रहा है। कई पुराने चेहरे या तो दूसरे दलों में जा चुके हैं या राजनीतिक रूप से गुमनाम हो चुके हैं। ऐसे में रामपुर के स्थानीय समर्थकों को जोड़े रखना, जनता के बीच जाकर उनका भरोसा कायम करना और स्थानीय चुनावी समीकरणों को अपने पक्ष में साधना अब्दुल्ला के लिए किसी कड़ी चुनौती से कम नहीं है।
पारिवारिक जिम्मेदारियों का निर्वहन लंबे समय तक पिता और पुत्र दोनों के एक साथ जेल में बंद रहने के कारण पूरा परिवार गहरे मानसिक और सामाजिक दबाव से गुजरा है। घर से चंद कदमों की दूरी पर स्थित जेल की काल कोठरियों में 348 दिन बिताने के बाद, अब जब अब्दुल्ला बाहर आए हैं, तो उन पर परिवार को संभालने, अपनों को वक्त देने और इस कठिन समय में परिजनों को संबल देने का भी दबाव है।
यूनिवर्सिटी का संरक्षण और कानूनी संकट आजम खां का ड्रीम प्रोजेक्ट मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी इस वक्त सबसे बड़े संकट के दौर से गुजर रही है। यूनिवर्सिटी के भवनों के ध्वस्तीकरण का मामला अदालत में लंबित है, वहीं दूसरी ओर ईडी ने भी इस पर अपनी कार्रवाई का दायरा बढ़ा दिया है। यूनिवर्सिटी के अस्तित्व और उसकी संपत्तियों का संरक्षण करना अब अब्दुल्ला आजम की प्राथमिक जिम्मेदारियों में शामिल हो चुका है।
आजम खां 14 दिन की न्यायिक हिरासत में, भेजे गए डासना जेल मनी लॉन्ड्रिंग मामले में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खां को ईडी की विशेष अदालत ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जिला कारागार डासना भेज दिया है। आजम खां को अब 13 नवंबर को दोबारा अदालत में पेश किया जाएगा। विशेष न्यायाधीश अवनीश कुमार पांडेय ने जेल अधीक्षक को उनके स्वास्थ्य का ध्यान रखने और नियमित रूप से दवाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम ने आजम खां को शनिवार को रामपुर जिला कारागार से बाहर आते ही धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत गिरफ्तार कर लिया था। उन्हें 11 महीने बाद पैन कार्ड धोखाधड़ी मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिली थी। रविवार को उनको ईडी की विशेष अदालत में पेश किया गया।
सुनवाई के दौरान ईडी के जांच अधिकारी ने आरोप लगाया कि आजम खां ने किसानों की जमीन पर कब्जा कर मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय और उससे जुड़े ट्रस्ट की स्थापना की। विश्वविद्यालय के निर्माण के दौरान ठेकेदारों व अन्य लोगों से अवैध रूप से धन एकत्र किया गया। ईडी ने करीब 426 करोड़ रुपये के लेनदेन को अपराध से अर्जित धन (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) बताया।
जांच एजेंसी के मुताबिक, इस मामले में पीएमएलए की धारा 50 के तहत 34 गवाहों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। जांच अभी जारी है और अन्य गवाहों के बयान भी दर्ज किए जाने हैं। ईडी ने वित्तीय लेनदेन की कड़ियों का पता लगाने और साक्ष्य जुटाने के लिए सात दिन की कस्टडी रिमांड मांगी थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया।
गिरफ्तारी की प्रक्रिया पर बचाव पक्ष ने उठाए सवाल सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने आजम खां की गिरफ्तारी की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उनके अधिवक्ता व पूर्व सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता महेश यादव ने आरोप लगाया कि गिरफ्तारी के समय उन्हें गिरफ्तारी पत्र उपलब्ध नहीं कराया गया। परिवार को फोन से सूचना देने के ईडी के दावे को भी गलत बताया। बचाव पक्ष ने अदालत से गिरफ्तारी के अधिकार और उसकी आवश्यकता, दोनों पहलुओं की सावधानीपूर्वक जांच करने का आग्रह किया।
वहीं, जांच अधिकारी ने अदालत को बताया कि गिरफ्तारी के समय आजम खां ने गिरफ्तारी मेमो लेने से मना कर दिया था। ईडी ने दावा किया कि ईमेल और मोबाइल फोन के माध्यम से उनके परिजनों को गिरफ्तारी की सूचना दी गई। इसके साक्ष्य के तौर पर स्क्रीनशॉट भी अदालत में प्रस्तुत किए गए।
वर्ष 2019 में दर्ज 26 मामलों के आधार पर ईसीआईआर ईडी की ओर से अदालत को बताया गया कि वर्ष 2019 में आजम खां के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं में 26 मामले दर्ज किए गए थे। इन्हीं मामलों के आधार पर ईडी ने एक अगस्त 2019 को धनशोधन निवारण अधिनियम की धारा चार के तहत एनफोर्समेंट केस इंफॉर्मेशन रिपोर्ट (ईसीआईआर) दर्ज की थी। इसके अलावा 13 अक्तूबर 2026 को रामपुर के अजीमनगर थाने में एक और प्राथमिकी दर्ज की गई। इसमें भारतीय न्याय संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अपराधों का जिक्र है।
नियमित दवाएं उपलब्ध कराने के निर्देश अदालत ने आजम खां से उनके स्वास्थ्य के संबंध में भी जानकारी ली। उन्होंने बताया कि वह नियमित दवाएं लेते हैं और नमाज भी अदा करते हैं। अदालत ने जेल अधीक्षक को उनके स्वास्थ्य का ध्यान रखने और नियमित दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
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