मेटा के स्मार्ट चश्मों से प्राइवेसी उल्लंघन के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। ज्यादातर शिकायतें छुपकर वीडियो बनाने और उसे इंटरनेट पर अपलोड करने से जुड़े हैं। मेटा ने साल 2025 में 70 लाख से ज्यादा एआई स्मार्ट ग्लास की बिक्री की हैं। ऐसे में इन चश्मों से जुड़े प्राइवेसी उल्लंघन के बढ़ते मामले वाकई में चिंताजनक हैं।
स्मार्ट गैजेट्स हमारी जिंदगी को आसान बनाते हैं, लेकिन जब बात निजता की आती है, तो कई बार ये खतरे की घंटी भी साबित होते हैं। वियरेबल टेक्नोलॉजी के बढ़ते चलन के बीच स्मार्ट चश्मों से बिना इजाजत वीडियो रिकॉर्ड करने के मामले तेजी से बढ़ रहे थे। इस गंभीर समस्या और यूजर्स की लगातार उठ रही चिंताओं को देखते हुए टेक दिग्गज मेटा ने अपने लोकप्रिय एआई ग्लास में कई अहम सुरक्षा अपडेट किए हैं। इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी व्यक्ति सार्वजनिक जगहों पर दूसरों की सहमति के बिना उनका वीडियो न बना सके।
मेटा पर यह दबाव सिर्फ यूजर्स की शिकायतों तक सीमित नहीं है। कंपनी को मार्च महीने में दायर किए गए एक क्लास-एक्शन मुकदमे का भी सामना करना पड़ रहा है। स्वीडिश मीडिया की एक जांच में यह आरोप लगाया गया था कि कंपनी इन चश्मों से रिकॉर्ड किए गए कंटेंट को स्टोर कर रही है और अपने एआई मॉडल को प्रशिक्षित करने के लिए उसे मानव समीक्षकों के पास भेज रही है। प्राइवेसी से जुड़े इन गंभीर दावों के बावजूद बाजार में इन चश्मों का दबदबा कायम है और साल 2025 में मेटा ने इसके 70 लाख से अधिक यूनिट्स बेचे थे।
लोगों के बीच विश्वास बहाल करने और सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए मेटा अब एक बड़ा जागरूकता अभियान चला रही है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और बिलबोर्ड्स के जरिए आम जनता को यह बताया जा रहा है कि जब कोई व्यक्ति स्मार्ट चश्मे से रिकॉर्डिंग करता है, तो उसकी पहचान कैसे की जाए। साथ ही कंपनी ने इंटरनेट से उन सभी पोस्ट और ट्यूटोरियल्स को भी हटाना शुरू कर दिया है, जिनमें इन स्मार्ट चश्मों की सुरक्षा से छेड़छाड़ करने के तरीके बताए गए थे।
हाल ही में एक कंटेंट क्रिएटर पर मेटा स्मार्ट चश्मे से बिना अनुमति के रिकॉर्डिंग करने और वीडियो पोस्ट करने का एक मामला सामने आया है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि मेटा के स्मार्ट चश्मे से उसकी वीडियो रिकॉर्ड कर इंस्टाग्राम रील के तौर पर पोस्ट कर दी गई। उसके साथ यह घटना 24 अगस्त को दिल्ली के खान मार्केट के पास हुई। इस मामले में मेटा और कंटेट क्रिएटर को दिल्ली हाई कोर्ट के तरफ से नोटिस भेजा गया है। शिकायतकर्ता का यह भी आरोप है कि इंस्टाग्राम पर वीडियो को रिपोर्ट करने के बावजूद उसे नहीं हटाया गया।
इंस्टाग्राम प्रमुख एडम मोसेरी ने भी हाल में कहा था कि मेटा लोगों को दूसरों की रिकॉर्डिंग करने से पूरी तरह नहीं रोक सकता। हालांकि, कंपनी यह सुनिश्चित करने की कोशिश करती है कि रिकॉर्डिंग के दौरान संकेत देने वाली लाइट सक्रिय रहे, ताकि दूसरों को पता चल सके कि उनकी रिकॉर्डिंग हो रही है।
संविधान का अनुच्छेद 19(1)(a) नागरिकों को अभिव्यक्ति और सूचना इकट्ठा करने की आजादी देता है। हालांकि, यह आजादी असीमित नहीं है। अगर रिकॉर्डिंग से किसी के अधिकारों का उल्लंघन होता है, तो कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
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