अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच चीन को इरान से अधिक जिम्मेदार बताया, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा पर नई चिंताएँ उत्पन्न हुई हैं।
इस बयान को अमेरिकी विदेश नीति के वरिष्ठ अधिकारियों ने क्षेत्र में चीन के बढ़ते सैन्य और आर्थिक प्रभाव के संदर्भ में दिया। उपराष्ट्रपति ने कहा कि चीन की आर्थिक शक्ति और रणनीतिक निवेश, विशेष रूप से बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) के तहत, क्षेत्रीय देशों पर अधिक दबाव डाल रहे हैं।
इसके विपरीत, इरान पर लगाए गए व्यापक प्रतिबंधों के बावजूद, इरान को क्षेत्रीय संघर्षों में सीमित भूमिका निभाने के लिए माना गया है। उपराष्ट्रपति ने यह भी उल्लेख किया कि इरान की सैन्य क्षमताएँ अभी भी सीमित हैं, जबकि चीन की नौसेना और एयरोस्पेस क्षमताएँ तेजी से बढ़ रही हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि यह बयान अमेरिका के चीन पर दबाव बढ़ाने के प्रयासों का हिस्सा है, विशेषकर दक्षिण चीन सागर और तुर्की के काला सागर में। इसके अलावा, यह बयान क्षेत्रीय गठबंधनों को मजबूत करने के उद्देश्य से भी लिया गया है।
चीन के विदेश मंत्रालय ने इस पर त्वरित जवाब दिया, जिसमें उन्होंने कहा कि अमेरिका का यह कथन गलत है और चीन का क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के प्रति प्रतिबद्धता स्पष्ट है। उन्होंने यह भी बताया कि चीन ने इरान के साथ आर्थिक सहयोग को बढ़ाने के लिए कई पहलें शुरू की हैं।
इस बीच, इरान के विदेश मंत्रालय ने भी अपनी स्थिति स्पष्ट की, यह कहते हुए कि इरान क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए प्रतिबद्ध है और किसी भी बाहरी दबाव से स्वतंत्र रूप से कार्य कर रहा है।
अमेरिकी सरकार ने इस बयान के बाद क्षेत्रीय देशों से संवाद बढ़ाने और संयुक्त सैन्य अभ्यासों को तीव्र करने की अपील की। इस कदम के तहत, अमेरिका ने तुर्की, सऊदी अरब और इज़राइल के साथ सुरक्षा वार्ता को आगे बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है।
इस घटना के बाद, अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चीन और इरान के बीच संभावित सहयोग पर चर्चा तेज हो गई है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि चीन-इरान सहयोग क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को बदल सकता है, जबकि अन्य का तर्क है कि यह सहयोग सीमित रहेगा।
इस बीच, अमेरिकी कांग्रेस में इस विषय पर बहस शुरू हुई है, जहाँ कुछ सांसदों ने चीन के खिलाफ प्रतिबंध लगाने की मांग की है, जबकि अन्य ने इरान पर लगाए गए प्रतिबंधों को बनाए रखने का समर्थन किया है।
अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वित्तीय बाजारों पर भी इस बयान का असर पड़ा है, जहाँ कुछ निवेशकों ने चीन के शेयरों में निवेश कम कर दिया और इरान से जुड़े प्रोजेक्ट्स में रुचि बढ़ा दी।
इस प्रकार, पश्चिम एशिया में तनाव और चीन-इरान संबंधों के बीच जटिल गतिशीलता के बीच, अमेरिकी उपराष्ट्रपति का यह बयान क्षेत्रीय राजनीति और आर्थिक नीतियों पर गहरा प्रभाव डाल सकता है।
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