बासपा के पूर्व राज्यसभा सांसद एवं एमएलसी अशोक सिद्धार्थ ने गुरुवार सुबह ट्विटर‑जैसे प्लेटफ़ॉर्म ‘एक्स’ पर लंबा पोस्ट लिखकर राजनीति से संन्यास ले लेने का ऐलान किया। उन्होंने कहा, “मेरे लिए आपका नेतृत्व सर्वोपरि है; मेरे रिश्ते, परिवार, सब कुछ इसके सामने तुच्छ हैं।”
मायावती ने पहले कहा था कि यदि सिद्धार्थ पूरी तरह से राजनीति से हट जाएँ तो यह आकाश आनंद के भविष्य के लिए फायदेमंद होगा और पार्टी में उसे स्वतंत्र रूप से काम करने की अनुमति मिलेगी। इस शर्त के बाद ही सिद्धार्थ ने अपना संन्यास घोषित किया।
सिद्धार्थ का बासपा से जुड़ाव मायावती के साथ गहरा रहा है। उन्होंने एमएलसी से लेकर राज्यसभा सदस्य तक का सफर तय किया और अपनी बेटी की शादी मायावती के भतीजे आकाश आनंद से करवाई। फिर भी, पार्टी के अंदर उनके कार्यों को लेकर सवाल उठने लगे, जिससे मायावती का गुस्सा बढ़ा।
उन्हें बासपा के वरिष्ठ नेता माना जाता था; उनके पिता कांशीराम के सहयोगी थे और पार्टी में उनका क़दम‑दर‑क़दम ऊपर उठता गया। उत्तर प्रदेश के कई मंडलों के साथ‑साथ कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और ओडिशा में बासपा को मजबूत करने की जिम्मेदारी भी उन्हें सौंपी गई।
आकाश आनंद के ससुर होने के कारण सिद्धार्थ का पार्टी में रुतबा और भी बढ़ गया। 2023 में उनकी बेटी प्रज्ञा की आकाश आनंद से शादी के बाद उनका प्रभाव और गहरा हो गया, जिससे कई नेताओं को लगा कि वे बासपा के भीतर अपना अलग गुट बना रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सिद्धार्थ ने आकाश आनंद को बासपा का भविष्य बताया और इस बात को कई बार मायावती को बताया, जिससे वह नाराज़ हुईं। कई चेतावनियों के बावजूद स्थिति नहीं बदली, और 2024 में उन्हें पार्टी से बाहर कर दिया गया। बाद में माफी मांगने पर उन्हें पुनः शामिल किया गया, पर हाल ही में फिर से बाहर निकाला गया।
मायावती का आरोप है कि सिद्धार्थ ने आकाश आनंद को राजनीतिक तौर पर गुमराह किया है, यह मानते हुए कि आनंद बासपा की बुआ से अधिक सिद्धार्थ की बात मानते हैं। हालांकि, आकाश आनंद ने स्पष्ट किया कि वह मायावती के मार्गदर्शन में ही काम करता है।
सिद्धार्थ पर यह भी आरोप लगा कि उन्होंने पार्टी के भीतर एक “समानांतर व्यवस्था” स्थापित करने की कोशिश की, जिससे वरिष्ठ और वफादार नेताओं की पहुँच सीमित हो गई। कई राज्य‑स्तरीय नेताओं ने महसूस किया कि उनका महत्व घट रहा है, जिससे असंतोष बढ़ा।
मायावती ने कई बार कहा कि बासपा में दो सत्ता केंद्र नहीं हो सकते; वह ही अंतिम निर्णयकर्ता हैं। जब उन्हें लगा कि सिद्धार्थ का प्रभाव संगठन के अनुशासन को बिगाड़ रहा है, तो उन्होंने उन्हें किनारे कर दिया।
सिद्धार्थ ने अपने बयान में कहा, “मैं कांशीराम जी की कसम खाता हूँ, मैंने कभी पार्टी के हित के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया।” उन्होंने यह भी कहा कि आकाश आनंद उनके दामाद नहीं, बल्कि मायावती के भतीजे हैं, और उनका खून उनके भीतर बहता है, इसलिए उन्हें गुमराह करना असंभव है।
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