उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्से में स्थित देवरिया, अपनी समृद्ध विरासत, धार्मिक स्थल और राजनीतिक पहचान के कारण उल्लेखनीय है। यह जिला 16 मार्च 1946 को गोरखपुर से अलग होकर स्थापित हुआ और 1994 में इसके उत्तर‑पूर्वी भाग को अलग कर कुशीनगर जिला बनाया गया।
‘देवरिया’ नाम की उत्पत्ति पर कई सिद्धांत हैं। जिला प्रशासन की वेबसाइट के अनुसार, यह नाम ‘देवारण्य’ या ‘देवपुरिया’ से आया माना जाता है, जबकि सरकारी गजेट में बताया गया है कि मुख्यालय देवरिया के नाम पर ही जिला का नाम पड़ा।
ऐतिहासिक तौर पर यह क्षेत्र प्राचीन कोशल राज्य से जुड़ा था। यहाँ विभिन्न स्थानों पर मिली प्राचीन मूर्तियां, सिक्के, मंदिरों के अवशेष और अन्य पुरातात्विक सामग्री स्थानीय समाज के प्राचीन जीवन की झलक पेश करती हैं।
स्वतंत्रता संग्राम में देवरिया का विशेष योगदान रहा। कक्षा‑5 के छात्र रामचंद्र विद्यार्थी, केवल 14 साल की उम्र में पुरानी कचहरी पर तिरंगा फहराते हुए अंग्रेज़ी गोली से शहीद हुए। इसके अलावा, पैना गाँव की कई महिलाएँ अंग्रेज़ों के अत्याचार से बचने के लिये सरयू नदी में जल‑समाधि ले लीं, जिसे इतिहास में जल‑जौहर कहा जाता है।
भौगोलिक रूप से देवरिया की सीमाएँ उत्तर में कुशीनगर, पूर्व में बिहार के गोपालगंज और सिवान, दक्षिण में मऊ‑बलिया और पश्चिम में गोरखपुर से मिलती हैं। जिला मुख्यालय देवरिया, गोरखपुर से लगभग 53 किमी पूर्व में स्थित है। घाघरा (सरयू), राप्ती और छोटी गंडक प्रमुख नदियाँ हैं। यहाँ की मुख्य भाषाएँ हिंदी और भोजपुरी हैं। धार्मिक रूप से बरहज तहसील के माइल गाँव में स्थित देवरहा बाबा आश्रम, रुद्रपुर का दुग्धेश्वरनाथ मंदिर, देवरिया शहर का हनुमान मंदिर और श्री तिरुपति बालाजी मंदिर प्रमुख स्थल हैं।
राजनीतिक इतिहास में देवरिया समाजवादी आंदोलन, कांग्रेस की पुरानी सियासत और भाजपा के उभार से जुड़ा रहा है। विश्वनाथ राय (कांग्रेस), समाजवादी नेता मोहन सिंह, श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी, भाजपा के कलराज मिश्र (2014 में लोकसभा जीत) और वर्तमान में कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही (भाजपा) इस क्षेत्र के प्रमुख नाम रहे हैं।
जिला प्रशासन के अनुसार, देवरिया में पाँच तहसीलें – देवरिया सदर, सलेमपुर, रुद्रपुर, बरहज और भाटपाररानी – तथा 16 विकासखंड हैं। जिले का क्षेत्रफल 2,540 वर्ग किमी और 2011 की जनगणना के अनुसार जनसंख्या 31,00,946 है।
देवरिया में सात विधानसभा सीटें हैं: रुद्रपुर, देवरिया, पथरदेवा, रामपुर कारखाना, भाटपाररानी, सलेमपुर और बरहज। इन सीटों का लोकसभा क्षेत्रों से अलग‑अलग जुड़ाव है। रुद्रपुर और बरहज बांसगांव (सुरक्षित) लोकसभा क्षेत्र में आते हैं, जबकि देवरिया, पथरदेवा और रामपुर कारखाना देवरिया लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा हैं। भाटपाररानी और सलेमपुर सलेमपुर लोकसभा क्षेत्र में शामिल हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के शशांक मणि ने देवरिया सीट से जीत दर्ज की।
2024 के विधानसभा चुनाव में प्रमुख परिणाम इस प्रकार रहे:
- देवरिया: भाजपा के शलभमणि त्रिपाठी ने जीत हासिल की, सपा के अजय प्रताप सिंह (पिंटू), बसपा के रामसरण और कांग्रेस के पुरषोत्तम नारायण सिंह के खिलाफ।
- बरहज: भाजपा के दीपक कुमार मिश्र ने जीत दर्ज की, सपा के मुरली मनोहर जयसवाल के मुकाबले।
- भाटपाररानी: भाजपा के सभाकुवंर कुशवाहा ने जीत हासिल की, सपा के आशुतोष कुशवाहा, कांग्रेस के केशव चंद्र यादव और बसपा के अजय कुशवाहा के बीच।
- पथरदेवा: भाजपा के सूर्य प्रताप शाही (कृषि मंत्री) ने सपा के ब्रह्माशंकर त्रिपाठी को हराकर जीत ली।
- रामपुर कारखाना: भाजपा के सुरेंद्र चौरसिया ने जीत हासिल की, सपा, कांग्रेस और बसपा के प्रतिद्वंदियों को पीछे छोड़ते हुए।
- रुद्रपुर: भाजपा के जय प्रकाश निषाद ने सपा के राम भुआल निषाद को मात दी।
- सलेमपुर: भाजपा की विजयलक्ष्मी गौतम ने सपा के मनबोध प्रसाद को हराकर जीत दर्ज की।
इन परिणामों से स्पष्ट है कि देवरिया में भाजपा का प्रभाव मजबूत है, जबकि अन्य दलों के उम्मीदवार भी स्थानीय स्तर पर सक्रिय रहे हैं।
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