भारत में चुनावों की मतदान विधियों में लगातार बदलाव हो रहा है। 1951‑52 के पहले आम चुनाव से लेकर आज तक, लोकसभा और विधानसभा चुनावों में ईवीएम का उपयोग बढ़ता गया, जबकि कुछ चुनाव अभी भी पारंपरिक बैलेट पेपर पर आधारित हैं।
लोकसभा और विधानसभा चुनावों में ईवीएम के व्यापक उपयोग का इतिहास इस प्रकार है – 1951‑52 में पहला आम चुनाव, 1962 में मतदान के तरीके में बदलाव, 1982 में पहली बार ईवीएम का प्रयोग, 1998 में उसका विस्तार, 2004 में सभी लोकसभा सीटों पर ईवीएम, 2013 में वीवीपैट की शुरुआत और 2019 में सभी मतदान केंद्रों पर वीवीपैट।
इन चुनावों के अलावा, राज्यसभा, एमएलसी, पंचायत और राष्ट्रपति चुनाव अभी भी बैलेट पेपर से ही होते हैं। राज्यसभा और एमएलसी चुनावों में आनुपातिक प्रतिनिधित्व और एकल संक्रमणीय मत प्रणाली अपनाई जाती है, जबकि मतदान खुली मतपत्र व्यवस्था पर आधारित है।
पंचायत चुनावों में भी स्थिति विविध है। 2023 की पंचायती राज मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, 53 % राज्य ग्राम पंचायत चुनावों में बैलेट पेपर का उपयोग करते हैं। केवल तीन राज्य (केरल, सिक्किम) और दो केंद्रशासित प्रदेश (दादरा व नगर हवेली, दमन व दीव) सभी ग्राम पंचायत निर्वाचन क्षेत्रों में ईवीएम का प्रयोग करते हैं। 22 % राज्य कुछ क्षेत्रों में ईवीएम अपनाते हैं, जबकि बाकी में बैलेट पेपर जारी रहता है। जिला पंचायत चुनावों में 17 % राज्य सभी निर्वाचन क्षेत्रों में ईवीएम का उपयोग करते हैं।
राज्यसभा चुनाव में विधायकों द्वारा मतदान होता है। संविधान के अनुच्छेद 80(4) के तहत, राज्यसभा के सदस्यों का चुनाव राज्य की विधानसभा के निर्वाचित विधायक करते हैं। 2003 से खुली मतपत्र व्यवस्था लागू है, जिससे राजनीतिक दल अपने विधायकों के वोट की पुष्टि के लिए अधिकृत एजेंट नियुक्त कर सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 2006 के कुलदीप नैयर बनाम भारत संघ मामले में इस व्यवस्था को संवैधानिक माना।
एमएलसी चुनाव, जो विधान परिषद के सदस्यों के चुनाव के समान है, भी बैलेट पेपर पर आधारित हैं। संविधान के अनुच्छेद 171(4) के अनुसार, विधान परिषद के चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व और एकल संक्रमणीय मत प्रणाली से होते हैं। मतदाता अपनी प्राथमिकता के अनुसार 1, 2, 3 अंक लिखते हैं, और पहली प्राथमिकता के वोटों की गिनती के बाद, यदि आवश्यक हो तो अगली प्राथमिकताओं के वोट हस्तांतरित किए जाते हैं।
राष्ट्रपति चुनाव भी बैलेट पेपर से ही होता है, जिसमें ईवीएम का प्रयोग नहीं होता। संविधान के अनुच्छेद 55(3) के तहत, राष्ट्रपति का चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व और एकल संक्रमणीय मत प्रणाली से होता है। मतदान गुप्त होता है, जिससे किसी भी राजनीतिक दल को यह देखने का अधिकार नहीं मिलता कि उसके सांसद या विधायक ने किस उम्मीदवार को वोट दिया।
नगर निगम और नगर निकाय चुनावों की मतदान विधि राज्य के चुनावी नियमों पर निर्भर करती है। उदाहरण के तौर पर, दिल्ली नगर निगम के चुनाव ईवीएम से होते हैं, जबकि पंजाब ने 2026 में नगर निकाय चुनावों के लिए बैलेट पेपर का उपयोग तय किया। इस निर्णय को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी गई, और 22 मई 2026 को हाईकोर्ट ने कहा कि पंजाब नगर निकाय चुनाव नियम, 1994 में बैलेट पेपर और ईवीएम दोनों से मतदान का प्रावधान है; इसलिए राज्य निर्वाचन आयोग को किसी एक विधि को चुनने का अधिकार है।
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