बलरामपुर में मंगलवार की शाम एक सड़क हादसे ने एक पूरे परिवार की खुशियां छीन लीं। जिस घर से बच्चों की पढ़ाई और बारावफात की तैयारियों को लेकर चहल-पहल होनी थी, बुधवार को उसी घर से एक साथ चार जनाजे उठे। हर आंख नम थी और हर जुबान पर हादसे का जिक्र। यू-टर्न लेते समय तेज रफ्तार डंपर की चपेट में आई कार में सवार मौलाना मोहम्मद शरीफ (50), उनकी पत्नी तबस्सुम बानो (45), बेटे उजैम (22) और बेटी रुश्दा (14) की मौत हो गई। हादसे में सात वर्षीय बेटी हुदा गंभीर रूप से घायल है, जिसका इलाज चल रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार नगर के मोहल्ला बलुआ निवासी मौलाना मोहम्मद शरीफ मंगलवार सुबह अपनी कार से भिनगा से लखनऊ के लिए निकले थे। उनके साथ पत्नी तबस्सुम बानो और बच्चे उजैम, रुश्दा व हुदा भी थे। बताया गया कि मौलाना अपने बच्चों को लखनऊ छोड़ने जा रहे थे। बेटा उजैम लखनऊ में रहकर नीट की तैयारी कर रहा था, जबकि दूसरा बच्चा भी वहीं पढ़ाई करता था। इसी दौरान बाराबंकी-बहराइच हाईवे पर बिंदोरा चौराहे के पास परिवार ढाबे की ओर मुड़ने के लिए यू-टर्न ले रहा था। तभी तेज रफ्तार डंपर ने कार को सामने से जोरदार टक्कर मार दी।
टक्कर इतनी भीषण थी कि कार के परखच्चे उड़ गए। मौलाना मोहम्मद शरीफ, उनकी पत्नी तबस्सुम बानो, बेटे उजैम और बेटी रुश्दा ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। सात वर्षीय हुदा गंभीर रूप से घायल हो गई। हादसे की सूचना जैसे ही बलरामपुर पहुंची, परिवार में चीख-पुकार मच गई। देखते ही देखते मोहल्ले में मातम पसर गया। पारिवारिक दामाद ने बताया कि मौलाना मोहम्मद शरीफ भिनगा के मदरसा अरबिया अनवारूल उलूम में शिक्षक थे। परिवार के बच्चों की पढ़ाई लखनऊ में चल रही थी। इसके साथ ही परिवार की बड़ी बेटी का लखनऊ में इलाज चल रहा था। उसे देखने और बच्चों को लखनऊ छोड़ने के लिए वह परिवार के साथ निकले थे।बताया गया कि रास्ते में परिवार के साथ चाय-नाश्ता करने के लिए ढाबे की ओर कार मोड़ी जा रही थी। इसी दौरान सामने से तेज रफ्तार डंपर आ गया और कार को रौंद दिया। कुछ ही सेकंड में परिवार की जिंदगी हमेशा के लिए बदल गई।
बुधवार को जिले में बारावफात को लेकर लोगों में उत्साह था। नगर और मोहल्लों में सजावट की जा रही थी। लोग त्योहार की तैयारियों में जुटे थे, लेकिन हादसे की खबर ने बलुआ मोहल्ले की खुशियों को मातम में बदल दिया। सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में लोग परिवार के घर पहुंचने लगे। घर की महिलाओं का रो-रोकर बुरा हाल था। मां की मौत के बाद बच्चों को याद कर परिजन बार-बार बेसुध हो रहे थे। बुधवार सुबह चारों शव जब घर पहुंचे तो माहौल पूरी तरह गमगीन हो गया। जनाजे के साथ चलने के लिए हजारों की भीड़ उमड़ पड़ी। हर तरफ सिसकियां सुनाई दे रही थीं। कुछ ही घंटों में एक परिवार के चार जनाजे एक साथ उठे और लोगों ने नम आंखों से उन्हें सुपुर्दे खाक किया।
मौलाना मोहम्मद शरीफ का पैतृक घर नगर के मोहल्ला बलुआ में है। उनके चार बेटे बताए गए हैं। परिवार करीब दस वर्षों से भिनगा के पुरानी बाजार में मकान बनाकर रह रहा था। उनके बेटों में सुहेम (21), सुरेम (18) और नोएम (14) हैं। हादसे में उजैम की मौत हो गई। मंगलवार की सुबह परिवार इसी घर से लखनऊ के लिए रवाना हुआ था, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि यह सफर परिवार के लिए आखिरी सफर साबित होगा।
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