हरियाणा के रेवाड़ी के एक गांव से निकले कमलजीत सिंह ने शायद कभी नहीं सोचा होगा कि जिस खेल को वह बचपन में अपना भविष्य मानते थे, एक दिन उसी खेल की चोट उन्हें दूसरी राह चुनने पर मजबूर कर देगी। कमलजीत एथलीट बनना चाहते थे। ट्रैक पर दौड़ना उनका सपना था। इसके लिए उन्होंने कड़ी मेहनत भी शुरू कर दी थी, लेकिन 2019 में लगी एक गंभीर चोट ने महज 15 साल की उम्र में उनके एथलेटिक्स करियर को खत्म कर दिया। जिस उम्र में एक खिलाड़ी अपने सपनों को आकार देता है, उसी उम्र में कमलजीत को अपना पहला सपना छोड़ना पड़ा। हालांकि, उन्होंने खेल को छोड़ने के बजाय अपनी दिशा बदलने का फैसला किया। उन्होंने पिस्टल उठाई और शूटिंग की दुनिया में कदम रखा।
वर्षों बाद वही कमलजीत सिंह एशियाई खेलों के मंच पर खड़े थे। वह भी ऐसे समय में जब उन्हें व्यक्तिगत स्पर्धा के फाइनल में जगह नहीं मिली थी और मिश्रित टीम स्पर्धा में भी वह मूल रूप से उतरने वाले नहीं थे। आखिरी समय पर टीम में शामिल किए गए कमलजीत ने इस मौके को हाथ से नहीं जाने दिया। सुरुचि सिंह के साथ मिलकर उन्होंने 10 मीटर एयर पिस्टल मिश्रित टीम स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीत लिया। इतना ही नहीं, फाइनल में 484.6 अंक के साथ नया एशियाई रिकॉर्ड भी बना दिया। साथ ही भारत को एशियाड 2026 का शूटिंग में पहला स्वर्ण भी दिलाया। वरना भारत इस खेल में स्वर्ण के लिए जूझता दिख रहा था।
बचपन में स्प्रिंट में जाने का था सपना कमलजीत एक मध्यमवर्गीय परिवार से आते हैं। रेवाड़ी, हरियाणा के गांव में पले-बढ़े कमलजीत का शुरुआती लगाव शूटिंग से नहीं, बल्कि एथलेटिक्स से था। उन्होंने धावक बनने का सपना देखा था और ट्रैक पर भारत का प्रतिनिधित्व करने की तैयारी शुरू कर दी थी। एक युवा खिलाड़ी के लिए खेल केवल मैदान पर किया जाने वाला काम नहीं होता। वह उसकी पहचान और भविष्य का हिस्सा बन जाता है। कमलजीत भी अपने ट्रैक करियर को लेकर गंभीर थे। उन्होंने स्प्रिंटर के रूप में ट्रेनिंग की और भारत के लिए दौड़ने का सपना देखा, लेकिन जिंदगी ने उनके लिए कुछ और तय कर रखा था। 2019 में एक चोट ने बदल दी जिंदगी साल 2019 कमलजीत के लिए निर्णायक साबित हुआ। एथलेटिक्स की ट्रेनिंग के दौरान लगी गंभीर चोट ने उनका ट्रैक करियर खत्म कर दिया। महज 15 साल की उम्र में जिस खेल में वह अपना भविष्य देख रहे थे, उससे उन्हें दूर होना पड़ा। यह किसी भी युवा खिलाड़ी के लिए बड़ा झटका था। कमलजीत के सामने अब सवाल था कि खेल की दुनिया में आगे कैसे बढ़ा जाए। उन्होंने हार मानने के बजाय नई शुरुआत करने का फैसला किया। यही वह मोड़ था, जहां एथलेटिक्स ट्रैक से उनकी यात्रा शूटिंग रेंज तक पहुंची।
15 साल की उम्र में थामी पिस्टल चोट के बाद कमलजीत ने पिस्टल शूटिंग को अपना नया खेल बनाया। साल 2019 में उन्होंने शूटिंग शुरू की। यह उनके लिए बिल्कुल नई शुरुआत थी। एथलेटिक्स और शूटिंग की जरूरतें अलग थीं। अब उन्हें ट्रैक पर दौड़ने के बजाय एकाग्रता, तकनीक, निशाने की सटीकता और मानसिक मजबूती पर काम करना था, लेकिन नई चुनौती सिर्फ खेल तक सीमित नहीं थी।
कमलजीत एक मध्यमवर्गीय परिवार से आते थे और शूटिंग महंगा खेल है। मैच फीस, यात्रा और महंगी गोलियों का खर्च परिवार के लिए आसान नहीं था। शुरुआती दौर में आर्थिक दबाव इतना बढ़ गया था कि कमलजीत ने शूटिंग छोड़ने के बारे में भी सोचा। यहीं उनके परिवार की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण हो गई। जब परिवार ने नहीं पूछे सवाल, बस साथ दिया कमलजीत के माता-पिता और उनके चाचा ने उनके सपने को आगे बढ़ाने के लिए अपनी बचत तक खर्च की। आर्थिक मुश्किलों के बावजूद उन्होंने कमलजीत से यह नहीं कहा कि शूटिंग का खर्च बहुत ज्यादा है या उन्हें कोई दूसरा रास्ता चुन लेना चाहिए। इसके बजाय परिवार ने उनका साथ दिया। कमलजीत को जो कुछ चाहिए था, उसे उपलब्ध कराने के लिए परिवार ने अपनी बचत का इस्तेमाल किया। उनके लिए यह सिर्फ एक खिलाड़ी की मदद करना नहीं था, बल्कि उस बच्चे के दूसरे सपने को बचाना था, जिसका पहला सपना चोट की वजह से पहले ही टूट चुका था।
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