महाराष्ट्र के जालना तालुका में स्थित कडवंची गांव, जिसे द्राक्ष हब और ‘द्राक्षों की पंढरी’ के नाम से जाना जाता है, इस वर्ष सूखे की मार से जूझ रहा है।
पर्याप्त वर्षा न होने के कारण यहाँ की द्राक्ष बागें संकट में हैं, और कुओं व खेत तालाबों में पानी की कमी ने फसल बचाने को मुश्किल बना दिया है।
कडवंची में लगभग 1300‑1400 एकड़ द्राक्ष बाग हैं, और अधिकांश किसान इस फसल पर अपनी आजीविका निर्भर करते हैं। द्राक्ष की खरीद के लिए महाराष्ट्र के अलावा छत्तीसगढ़, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और गुजरात से भी व्यापारी आते हैं।
इस वर्ष के सूखे से खेत तालाब पूरी तरह भर नहीं पाए, और कई कुओं ने भी तलहटी पकड़ ली है, जिससे पानी की व्यवस्था एक बड़ी चुनौती बन गई है।
द्राक्ष बागों के छंटाई सीजन में प्रवेश करते ही किसानों ने पहले ही लाखों रुपये खर्च कर दिए हैं, परंतु पानी की कमी के कारण कई किसान छंटाई से पीछे हट रहे हैं।
किसान कृष्णा क्षीरसागर ने 2001 में दो एकड़ में द्राक्ष बाग लगाई थी और धीरे-धीरे 17 एकड़ तक बढ़ा लिया। परंतु इस वर्ष बारिश नहीं हुई, नदी का पानी भी नहीं आया और खेत तालाब भी नहीं भर पाए।
कृष्णा ने 17 एकड़ पर लगभग 10 लाख रुपये खर्च किए हैं, जबकि 60‑65 लाख रुपये की आमदनी की उम्मीद थी। पानी की कमी के कारण अब यह आय लगभग 10 लाख रुपये तक रह गई है।
कृष्णा का कहना है कि यदि 10‑15 दिनों में बारिश होती है तो छंटाई करके फसल ली जा सकती है। वे सरकार से द्राक्ष उत्पादक किसानों की मदद और जल समस्या के स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं।
उद्धव क्षीरसागर, जिनके पास 10 एकड़ द्राक्ष बाग है, पर भी इसी तरह की समस्या है। उन्होंने 4‑4.5 लाख रुपये खर्च किए हैं, परंतु इस वर्ष पानी की कमी के कारण 40‑45 लाख रुपये की उम्मीद की आय भी घट गई है।
उद्धव ने भी सरकार से खडकपूर्णा धरण या नदी जोड़ परियोजना के जरिए पानी उपलब्ध कराने की मांग की है।
सुनिल जोशी, जो पाँच एकड़ में से दो एकड़ बाग पानी के अभाव में निकाल चुके हैं, ने 6‑6.5 लाख रुपये खर्च किए थे और 20‑22 लाख रुपये की आमदनी की उम्मीद थी।
सुनिल का कहना है कि यदि बारिश नहीं हुई तो कडवंची के लगभग 90 प्रतिशत द्राक्ष बाग प्रभावित हो सकते हैं, और वे भी खडकपूर्णा धरण से पानी उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं।
कडवंची के किसान लंबे समय से द्राक्ष उत्पादन पर निर्भर हैं, और उन्होंने कुएं, खेत तालाब व सिंचाई के लिए अन्य व्यवस्थाएं भी बनाई हैं। लेकिन इस वर्ष का सूखा इन जल स्रोतों को खतरे में डाल रहा है।
किसानों का कहना है कि एक बार द्राक्ष बाग में खर्च शुरू होने के बाद पानी, दवा, मजदूरी और अन्य कृषि कार्यों पर लगातार खर्च करना पड़ता है, और बीच में पानी की कमी होने पर पहले किया गया खर्च भी डूबने का खतरा रहता है।
किसानों की मांग है कि सरकार द्राक्ष उत्पादक किसानों को आर्थिक सहायता दे और कडवंची के जल संकट का स्थायी समाधान निकाले। वे खडकपूर्णा धरण से पानी उपलब्ध कराने की भी अपील कर रहे हैं।
वर्तमान में कडवंची के द्राक्ष बागों को बचाने के लिए किसानों की नजरें आसमान पर टिकी हैं। बारिश होने पर बागों को बचाने की उम्मीद है, परंतु अगर बारिश नहीं हुई तो लाखों रुपये खर्च करके खड़ी की गई द्राक्ष बागें सूखने का खतरा बढ़ सकता है।
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