पटना में गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने का असर दिखने लगा है। गंगा और पुनपुन नदी के जलस्तर बढ़ने से सभी स्लुईस गेट बंद कर दिए गए हैं ताकि नदियों का पानी शहर में नहीं आ पाए। शहर का सीवरेज और बारिश के पानी को उच्च क्षमता के पंप की मदद से गंगा और पुनपुन नदी में डाला जा रहा है। शहर पूरी तरह से सुरक्षित है। बुडको ने सभी प्रमुख नालों पर अतिरिक्त पंप लगाकर जलनिकासी 24 घंटे कर रहा है। गंगा का जल स्तर खतरे का निशान पार करने के बाद दीघा एसटीपी बंद कर दिया गया है। सूबे का सबसे बड़ा दीघा एसटीपी को अस्थायी रूप से बंद किया गया है। जेपी गंगा पथ के उत्तर में गंगा नदी किनारे स्थित एसटीपी के चारों ओर पानी भर गया है।
जलस्तर अधिक होने के कारण सुरक्षा कारणों से एसटीपी बंद है। सीवरेज का ट्रीटमेंट फिलहाल बाधित है। गंगा नदी का जलस्तर घटने और सामान्य होने के बाद दीघा सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट फिर से चालू होगा। गंगा का जलस्तर बढ़ने से बल्कि स्लुईस गेट बंद कर बुडको पंप के जरिए आसानी से पानी निकाल रहा है। गंगा नदी के जलस्तर बढ़ने से पटना शहर का पानी 107 पंपों से निकाला जा रहा है। दीघा नहर समेत सभी प्रमुख बड़े नालों पर उच्च क्षमता के पंप लगाए गए हैं। गंगा नदी में डाले जाने वाले सभी डीपीएस में इलेक्ट्रिक और डीजल पंप सक्रिय है। स्थायी डीपीएस में 62 पंप तैनात हैं।
पुनपुन नदी के खानपुर और बरमुत्ता के पास 16 पंपों से शहर का पानी निकाला जा रहा है। खानपुर में 5 इलेक्ट्रिक और 3 डीजल पंप लगाए गए हैं। बरमुत्ता में भी 5 इलेक्ट्रिक और 3 डीजल पंप लगाए गए हैं। हालांकि गंगा और पुनपुन नदी का जलस्तर घटने लगा है। बावजूद इसके बुडको के एमडी के निर्देश पर सभी स्थायी और अस्थायी डीपीएस पर अधिकारियों की 24 घंटे तैनाती है। लगातार सभी डीपीएस चलाए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मंगलवार को पटना से सटे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया और वर्तमान स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की समस्याओं को तत्काल समाधान पर त्वरित कदम उठाने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने कहा है कि बाढ़ से प्रभावित प्रत्येक व्यक्ति तक राहत एवं आवश्यक सहायता पहुंचाना हमारी प्राथमिकता है। उन्होंने संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रभावित क्षेत्रों में युद्धस्तर पर राहत, बचाव एवं आवश्यक सुविधाएं बहाल कराना सुनिश्चित करें।
मुख्यमंत्री के साथ उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी और मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार भी हवाई सर्वेक्षण में सीएम के साथ थे। मालूम हो कि मुख्यमंत्री ने सोमवार को पटना से भागलपुर तक के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया था। उन्होंने पदाधिकारियों को यह भी कहा है कि बाढ़ राहत एवं बचाव कार्य के लिए बनी मानक संचालन प्रणाली के तहत सभी कार्य करें।
भागलपुर जिले में भी बाढ़ का कहर देखने को मिला है। यहां खरीक अंचल स्थित 120 मीटर लंबे काजीकौरेया-राघोपुर तटबंध का 20 मीटर हिस्सा और कट गया है। इसी तटबंध का 30 मीटर हिस्सा रविवार देर रात ही कट चुका था। इस कारण राघोपुर पंचायत जलमग्न हो गई है। गांव में पानी का दबाव बढ़ता जा रहा है। लोग ऊंचे स्थानों की ओर पनाह ले रहे हैं। जल संसाधन विभाग नवगछिया के कार्यपालक अभियंता गौतम कुमार ने बताया कि रिंग बांध बनाने से पड़े दबाव के कारण सुबह 10 मीटर कटाव हुआ था, जो बढ़कर 20 मीटर तक फैल गया है।
गंगा का बैकवाटर लगातार बहने से नीचे से मिट्टी खिसक रही है। इस वजह से फिलहाल लगभग 120 मीटर लंबे बांध पर खतरा बना हुआ है। हालात पर काबू पाने के लिए प्रशासन ने हाथी पांव (बांस और तार का फ्रेम) लगाकर उसमें जियो बैग भरकर कटाव वाले हिस्से को सुरक्षित करने का काम शुरू किया है। इस काम के लिए करीब 100 ट्रैक्टरों को जियो बैग ढोने में लगाया गया है। रविवार देर रात बांध टूटने से खरीक की राघोपुर पंचायत के पांच वार्डों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया, जिससे पूरी पंचायत का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। प्रभावित इलाके के लोग सहमे हैं और धीरे-धीरे बढ़ते जलस्तर को देखकर अपने घरों का सामान निकालकर सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हैं। सोमवार सुबह से ही जिला प्रशासन और अभियंताओं की टीम टूटे स्थल पर रिंग बांध बनाने की कवायद में जुटी है।
राघोपुर प्रखंड के निचले इलाकों के चकसिंगार वीरपुर, जुड़ावनपुर करारी, जुड़ावनपुर बरारी ,सरायपुर जहांगीरपुर, कर्मोपुर, तेरसिया पंचायत में बाढ़ का पानी भरा हुआ है। बाढ़ के पानी से पूरा इलाका टापू में तब्दील हो गया है। शिवनगर बिंदा मार्केट, जुड़ावनपुर मार्केट में बाढ़ का पानी भरा हुआ है। जुड़ावनपुर थाना परिसर में पानी प्रवेश कर चुका है। बाजार और मार्केट में बाढ़ का पानी भरने से लोग सामान भी खरीदने नहीं आ पा रहे हैं।
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